DM का बॉडीगार्ड रहा सतीश पांडेय कैसे बन गया बिहार पुलिस के लिए 'सिरदर्द', दर्ज हैं 95 मामले
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DM का बॉडीगार्ड रहा सतीश पांडेय कैसे बन गया बिहार पुलिस के लिए 'सिरदर्द', दर्ज हैं 95 मामले
अपने परिवार के साथ गैंगस्टर सतीश पांडेय (लाल घेरे में)

90 के दशक में कुख्यात सतीश पांडेय (Satish Pandey) और बाहुबली मोहम्मद शहाबुद्दीन के बीच रेलवे रैक पर अपना दबदबा कायम करने और लेवी वसूलने को लेकर कई बार हिंसक झड़पें हुई थीं.

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संजय कुमार

पटना. बिहार के गोपालगंज जिले के हथुआ थाने के रूपनचक गांव में एक सप्ताह पहले हुई तीन लोगों की हत्या (Gopalganj Triple Murder Case) ने फिलहाल पूरी सरकार को हिला कर रख दिया है. विपक्ष चुनाव से ठीक पहले सरकार को चारों तरफ से घेरने में जुटा है. देर रात हुए तिहरे हत्याकांड में कुचायकोट के JDU विधायक अमरेन्द्र कुमार पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय, (JDU MLA Amrendra Pandey) उनके भतीजे जिला परिषद अध्यक्ष मुकेश पांडेय, भाई कुख्यात सतीश पांडेय और एक अज्ञात के खिलाफ हथुआ थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है. प्राथमिकी फायरिंग में जख्मी जेपी यादव के बयान पर दर्ज की गई है. इस मामले में और आरोपियो के अलावा सतीश पांडेय का नाम फिर से सुर्खियों में है? अब सवाल है कि कौन है यह सतीश पांडेय?

दो दशक से अपराध की दुनिया में है सक्रिय
गोपालगंज के हथुआ थाने के नयागांव तुलसिया के रहनेवाले जेडीयू विधायक आमरेंद्र पांडेय उर्फ पप्पू पांडे का भाई सतीश पांडेय पिछले दो दशक से अपराध की दुनिया में सक्रिय है. सतीश पांडेय पर बिहार सरकार के मंत्री रहे बृजबिहारी प्रसाद हत्याकांड के अलावा कई नरसंहार और हत्याओं का मामला दर्ज है. हालांकि, चार साल से वो जमानत पर बाहर है. सतीश पांडेय ने अपने वर्चस्व को गोपालगंज में स्थापित कर छोटे भाई अमरेंद्र कुमार उर्फ पप्पू पांडेय को विधायक बनाया. कभी पत्नी उर्मिला देवी और कभी बेटे मुकेश पांडेय को जिला पर्षद अध्यक्ष की कुर्सी दिलायी. जिले में चलने वाले टेंडर वार में भी पांडेय भाइयों का सिक्का चलता है और लम्बे अरसे से कोई इस परिवार के सामने खड़े होने की हिम्मत नहीं करता है.



पहलवानी का शौक फिर बिहार पुलिस में नौकरी


कभी अंतरराज्‍यीय अपराधी गिरोह का सरगना और दो लाख रुपए के ईनामी अपराधी सतीश पांडे के खिलाफ तकरीबन 94 से 95 मामले दर्ज हैं. इस बात की जानकारी खुद गोपालगंज के एसपी मनोज तिवारी ने न्यूज़ 18 से बात करते हुए दी. बिहार और उतर प्रदेश पुलिस के लिए लम्बे समय तक वांछित रहा सतीश पांडे गोपालगंज जिले के कुचायकोट थाना के एक गांव का निवासी है. सतीश पांडे की पत्नी उर्मिला पांडे गोपालगंज जिला परिषद की अध्यक्ष रह चुकी हैं और बेटा भी गोपालगंज जिला परिषद का अध्यक्ष है. भाई अमरेंद्र पांडे विधायक हैं. सतीश पांडे ने वर्ष 1990 और 1995 में सीवान जिले के बरौली विधानसभा क्षेत्र से चुनाव भी लड़ा था, लेकिन उसे जीत हासिल नहीं हो सकी थी. बचपन में पहलवानी का शौक रहने वाला सतीश पांडे कभी पहलवान के नाम से भी जाना जाता है. सतीश पांडेय बिहार पुलिस में भर्ती हुआ था और सीवान के जिलाधिकारी का अंगरक्षक भी था. सतीश पांडे ने सीवान के पूर्व सांसद स्वर्गीय जनार्दन तिवारी के भांजे और अपने परम मित्र अभय पांडे की हत्या के बाद अपराध की दुनिया में कदम रखा था.

गैंगस्टर सतीश पांडेय
अपने भाई और समर्थकों के साथ सतीश पांडेय (लाल घेरे में)


शहाबुद्दीन से खूनी अदावत
90 के दशक में कुख्यात सतीश पांडेय और बाहुबली मोहम्मद शहाबुद्दीन के बीच रेलवे रैक पर अपना दबदबा कायम करने और लेवी वसूलने को लेकर कई बार हिंसक झड़पें हुई थीं. इस वर्चस्व की लड़ाई में कइयों की जानें भी गई. उस दौर में शहाबुद्दीन की तूती बोलती थी क्योंकि उस दौरान बिहार में लालू यादव की सरकार थी और मोहम्मद शहाबुद्दीन को लालू और उनके रसूख का खुलकर सहयोग मिलता था लेकिन जैसे-जैसे समय बदलता गया और 2005 में बिहार में तख्तापलट हुआ शहाबुद्दीन कमजोर होते गए और फिर कुख्यात सतीश पांडेय का रेलवे के रैक पर पूरा साम्राज्य स्थापित हो गया.

एके-47 का शौकीन
सवाल यही है कि जब बिहार ने सुशासन का राज है तो संतीश पांडेय लोग कैसे पनपते है. 2018 में लखनऊ में गिरफ्तार पप्पू ने बताया कि माफिया सतीश पाण्डेय के पास छह एके-47 रायफल मौजूद हैं और ऐसे कई हथियार राजन तिवारी के पास भी हैं. इस यक्ष प्रश्न का जबाब हमने ढूंढने की कोशिश की. इस मामले में पुलिस अधिकारियों के संगठन बिहार पुलिस एससोसिएशन के अध्यक्ष और मृत्युंजय सिंह और वरीय पत्रकार रवि उपाध्याय का कहना है कि संतीश पांडेय जैसे लोग सामाजिक परिस्थितियों के बल पर खुद को स्थापित करने में सफल हो जाते हैं लेकिन वो कानून की नजरों में अपराधी हैं और रहेंगे।

माइलेज लेने की कोशिश में राजद
गोपालगंज की घटना को सियासी रंग देने में लगे राजद के दामन पर भी दाग के छींटे कम नहीं हैं. इस मामले में सत्तारूढ़ दल जदयू फिलहाल बैकफुट पर दिख तो रहा लेकिन जदयू नेता 90 के दशक से मौजूदा हालात की तुलना कर पार्टी छवि बेहतर होने का दावा करने में भी लगे हैं.

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First published: May 31, 2020, 10:33 AM IST
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