बिहार: इन 5 कारणों के चलते मोदी कैबिनेट में शामिल नहीं हुई JDU

Vijay jha | News18 Bihar
Updated: May 31, 2019, 10:27 AM IST
बिहार: इन 5 कारणों के चलते मोदी कैबिनेट में शामिल नहीं हुई JDU
नीतीश कुमार

बिहार में छह सीटें जीतने वाली एलजेपी को कैबिनेट में एक जगह मिल रही थी, जबकि बिहार में जेडीयू के कुल 16 सांसद हैं. जेडीयू एनडीए में शिवसेना के बाद दूसरी बड़ी सहयोगी है.

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मोदी सरका -2 की कैबिनेट में सीमित भागीदारी से नाराज जेडीयू ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल नहीं होने का फैसला किया. हालांकि पार्टी ने एनडीए में ही बने रहने की बात कही है. दरअसल जेडीयू अपने लिए तीन मंत्री पद चाहती थी, लेकिन बीजेपी ने जो फॉर्मूला तय किया था इसके तहत सभी घटक दलों की सांकेतिक भागीदारी की बात कही गई थी. जब सहमति नहीं बनी तो अधिक भागीदारी की चाहत रखने वाली जेडीयू ने सरकार से अलग रहना ही मुनासिब समझा.

हालांकि सिर्फ इतनी ही बात नहीं रही, इसके पीछे अन्य वजहें भी रहीं जो जेडीयू मंत्रिमंडल का हिस्सा नहीं बनी. आखिर वे कौन-कौन से कारण रहे, आइये इन पर एक नजर डालते हैं.

अधिक भागीदारी चाहती थी जेडीयू 

बिहार में छह सीटें जीतने वाली एलजेपी को कैबिनेट में एक जगह मिल रही थी जबकि बिहार में जेडीयू के कुल 16 सांसद हैं.  जेडीयू एनडीए में शिवसेना के बाद दूसरी बड़ी सहयोगी है. ऐसे में सांकेतिक प्रतिनिधित्व की बात से नाराज जेडीयू ने सरकार का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया. नीतीश कुमार ने मीडिया के सामने ऐलान किया, यह एक सांकेतिक प्रस्ताव था और ऐसी किसी तरह की सांकेतिक भूमिका हमें नहीं चाहिए. हम सरकार का हिस्सा नहीं होंगे, लेकिन एनडीए में बने रहेंगे.

कम से कम दो पद चाहती थी जेडीयू 

बीजेपी ने जेडीयू को मनाने के लिेए काफी कोशिश की. एक मंत्री पद के बीजेपी के प्रस्ताव पर अंत तक मनाने की कोशिश की गई, लेकिन जेडीयू नेताओं ने आखिर में साफ कह दिया कि दो से कम सीटों पर बात नहीं होगी. पार्टी में चर्चा थी कि अगर सहमति बनती है तो आरसीपी सिंह और ललन सिंह दोनों मंत्री बनाए जाएंगे. हालांकि  पिछड़ा या अति पिछड़ा समुदाय में से किसी एक को मंत्री पद देने की भी बात चल रही थी.

जेडीयू ने आत्मसम्मान से जोड़ लिया
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बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और बिहार बीजेपी प्रभारी भूपेंद्र यादव ने बार-बार नीतीश को मनाने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी. दरअसल जेडीयू ने इस मुद्दे को आत्मसम्मान से जोड़ लिया. बाद में जेडीयू के प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने कहा भी कि मंत्रिमंडल में शामिल होने की हमारी इच्छा है, लेकिन सम्मान से समझौता नहीं कर सकते. आखिर बीजेपी को रामदास अठावले की आरपीआई और जेडीयू में फर्क तो करना ही पड़ेगा. आरपीआई के एक सांसद हैं और जेडीयू के 16.

सभी जेडीयू नेताओं ने जताई असहमति

दिल्ली स्थित 6 के. कामराज लेन स्थित नीतीश कुमार के आवास पर बैठक में जेडीयू के सभी नेताओं ने जेडीयू के शामिल होने को लेकर असहमति जताई. इस बैठक में जेडीयू के प्रधान महासचिव केसी त्यागी, प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह, सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश भी मौजूद थे. सबने यही कहा कि फिलहाल जेडीयू अलग रहे.

आपसी कलह से बचना चाहती थी जेडीयू

दो दिनों से चर्चा तेज थी कि जेडीयू कोटे से दो मंत्री बनाए जा सकते हैं. नाम भी सामने आने लगे थे. पहला नाम नीतीश कुमार के करीबी रहे आरसीपी सिंह का था, जबकि दूसरा मुंगेर के नवनिर्वाचित सांसद राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह का नाम था. बाद में केवल आरसीपी सिंह की चर्चा होने लगी.  इस पर जेडीयू के नेता सहमत नहीं हुए. माना जा रहा था कि अगर किसी एक को तरजीह दी गई तो पार्टी के भीतर ही प्रतिद्वंद्विता देखने को मिल सकती है.

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First published: May 31, 2019, 9:59 AM IST
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