कौन हैं नियोजित शिक्षक और राज्य सरकार क्यों नहीं देना चाहती समान वेतन ?

ग्रामीण स्तर पर बेरोजगार युवाओं को रोजगार के अवसर मुहैया कराने और शिक्षकों की कमी झेल रहे सरकारी विद्यालयों में वर्ष 2003 से शिक्षा मित्र रखे जाने का फैसला किया गया था.

News18 Bihar
Updated: August 27, 2019, 2:48 PM IST
कौन हैं नियोजित शिक्षक और राज्य सरकार क्यों नहीं देना चाहती समान वेतन ?
ग्रामीण स्तर पर बेरोजगार युवाओं को रोजगार के अवसर मुहैया कराने और शिक्षकों की कमी झेल रहे सरकारी विद्यालयों में वर्ष 2003 से शिक्षा मित्र रखे जाने का फैसला किया गया था.
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Updated: August 27, 2019, 2:48 PM IST
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने समान काम-समान वेतन को लेकर  बिहार के नियोजित शिक्षकों (Contract Teachers) की पुनर्विचार याचिका (Review Petition) को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि वह अपने पुराने फैसले पर कायम है. बता दें कि सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय से बिहार के करीब पौने चार लाख नियोजित शिक्षकों को बड़ा झटका लगा है. सबसे खास बात ये है कि इस मसले पर बिहार सरकार ( Bihar Government) के साथ केंद्र सरकार भी कंधे से कंधा मिलाए खड़ी है. हालांकि शिक्षकों का अब भी यही कहना है कि एक ही विद्यालय में एक ही काम के लिए दो अलग-अलग वेतनमान उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है. बहरहाल इन सब के बीच हम जानते हैं कि आखिर ये नियोजित शिक्षक क्या होते हैं? और, सरकार समान काम के लिए समान वेतन क्यों नहीं देना चाहती है?

कौन हैं नियोजित शिक्षक?
ग्रामीण स्तर पर बेरोजगार युवाओं को रोजगार के अवसर मुहैया कराने और शिक्षकों की कमी झेल रहे सरकारी विद्यालयों में वर्ष 2003 से शिक्षा मित्र रखे जाने का फैसला किया गया था. उस समय दसवीं और बारहवीं में प्राप्त किए अंकों के आधार पर इन शिक्षकों को 11 महीने के कांट्रैक्ट पर रखा गया था. इन्हें मासिक 1500 रुपये का वेतन दिया जा रहा था. फिर धीरे धीरे उनका अनुबंध भी बढ़ता रहा और उनकी आमदनी भी बढ़ती रही.

नए और पुराने शिक्षकों के वेतन में काफी अंतर

वर्ष 2006 में इन शिक्षा मित्रों को ही नियोजित शिक्षक (Contract Teacher) के तौर पर मान्यता दे दी गई. बिहार पंचायत नगर प्राथमिक शिक्षक संघ (Primary Teachers Association) के अनुसार बिहार में मौजूदा समय में तीन लाख 70 हजार समायोजित शिक्षक हैं, जिन्हें अपने काम के हिसाब से वेतन नहीं मिल रहा है. दरअसल पूर्व से नियुक्त सरकारी शिक्षकों के वेतनमान इन नियोजित शिक्षकों के मुकाबले लगभग ढाई गुना अधिक है.

समय-समय पर होती रही है वेतन वृद्धि
हालांकि बिहार सरकार ने समय-समय पर नियोजित शिक्षकों के वेतन में भी वृद्धि की है और वर्तमान नियोजित शिक्षकों में प्राइमरी टीचरों को 22 हजार से 25 हजार रुपये प्रतिमाह मिलते हैं, वहीं माध्यमिक शिक्षकों को 22 से 29 हजार रुपये मिलते हैं, हाई स्कूलों के ऐसे शिक्षकों को 22 से 30 हजार रुपये मिलते हैं.
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अतिरिक्त अर्थ भार से डर रही राज्य सरकार
बहरहाल राज्य सरकार समान काम-समान वेतन पर इसलिए आगे नहीं बढ़ रही है क्योंकि राज्य में लगभग पौने चार लाख नियोजित शिक्षक हैं. ऐसे में अगर फैसला शिक्षकों के पक्ष में आता तो उनका वेतन करीब 35 से 40 हजार हो जाएगा. राज्य सरकार के अनुसार वह इस अतिरिक्त खर्च करने के काबिल नहीं है.

केंद्र सरकार ने भी शिक्षकों का नहीं दिया साथ
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में वर्ष 2018 में जब केस पर बहस हो रही थी तो  केंद्र सरकार की ओर से एटार्नी जनरल वेणु गोपाल ने कहा था कि समान वेतन देने में 1.36 लाख करोड़ का अतिरिक्त भार केंद्र सरकार को वहन करना संभव नहीं है.

राज्य सरकार पर पड़ेगा 28 हजार करोड़ का भार
वहीं, राज्य सरकार के वकील ने भी कहा था कि आर्थिक स्थिति नहीं कि लगभग पौने चार लाख नियोजित शिक्षकों को पुराने शिक्षकों के बराबर समान वेतन दे सके. समान काम समान वेतन देने पर सरकार को सालाना 28 हजार करोड़ का बोझ पड़ेगा. एरियर देने की स्थिति में 52 हजार करोड़ भार पड़ेगा.

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First published: August 27, 2019, 2:45 PM IST
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