जानें कौन हैं कामेश्वर चौपाल जो बन सकते हैं बिहार के नये डिप्टी CM, क्या है उनका राम मंदिर कनेक्शन?

कामेश्वर चौपाल (फाइल फोटो)
कामेश्वर चौपाल (फाइल फोटो)

BJP के वरिष्ठ नेता कामेश्वर चौपाल (Kameshwar Chaupal) दलित समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. साल 1989 के राम मंदिर आंदोलन के समय हुए शिलान्यास में कामेश्वर ने ही राम मंदिर की पहली ईंट रखी थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 13, 2020, 8:55 PM IST
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पटना. बिहार में नई सरकार बनाने की कवायद तेज हो गई है. इसी क्रम में शुक्रवार को एनडीए (NDA) के घटक दलों के नेताओं की बैठक सीएम नीतीश कुमार के आवास पर होगी. इसमें नये सीएम का नाम तय किए जाने की भी बात कही जा रही है. हालांकि, यह अनौपचारिक बैठक है, लेकिन माना जा रहा है कि इसमें मुख्यमंत्री पद के लिए नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के नाम का एलान हो सकता है. सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अयोध्या में 1989 में हुए राम मंदिर शिलान्यास के दौरान पहली ईंट रखने वाले कामेश्वर चौपाल (Kameshwar Chaupal) को बिहार का उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है. वह वर्तमान उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी (Sushil Kumar Modi) की जगह बिहार के नये डिप्टी सीएम बनाए जा सकते हैं.

भगवान श्रीराम का नाता बिहार से भी रहा है. साल 1989 में राम मंदिर की नींव के लिए पहली ईंट रखने के साथ ही चौपाल इतने मशहूर हो गए कि वे दो बार बिहार विधान परिषद के सदस्य भी बने. भाजपा के वरिष्ठ नेता कामेश्वर चौपाल दलित समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. 1989 के राम मंदिर आंदोलन के समय हुए शिलान्यास में कामेश्वर ने ही राम मंदिर की पहली ईंट रखी थी. आरएसएस ने उन्हें पहले कारसेवक का दर्जा दिया है. वह 1991 में रामविलास पासवान के खिलाफ चुनाव भी लड़ चुके हैं.

भगवान राम से है चौपाल का खास नाता
एक पत्रिका में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, कामेश्वर चौपाल ने बताया था कि हम लोग जब बड़े हो रहे थे तो राम को अपना रिश्तेदार मानते थे. उनके मुताबिक मिथिला इलाके में शादी के दौरान वर-वधू को राम-सीता के प्रतीकात्मक रूप में देखने की प्रथा है. ऐसा इसलिए क्योंकि मिथिला को सीता का घर कहा जाता है.




मां सीता की धरती से भी है चौपाल का रिश्ता
कामेश्‍वर चौपाल की पत्नी माता सीता बिहार के सीतामढ़ी की रहने वाली थीं. तब से लेकर सीतामढ़ी और अयोध्या के रिश्ते को प्रगाढ़ माना जाता है. जब अयोध्या में राममंदिर के बनाने के लिए संघर्ष चल रहा था, तब विश्व हिन्दू परिषद के आह्वान पर राममंदिर के निर्माण के लिए बिहार से कामेश्वर चौपाल भी ईंट लेकर अयोध्या पहुंचे थे.

मधुबनी के संघ प्रचारक रहे हैं कामेश्वर चौपाल
कामेश्वर ने अपनी पढ़ाई-लिखाई मधुबनी जिले से की है. यहीं वे संघ के संपर्क में आए थे. उनके एक अध्यापक संघ के कार्यकर्ता हुआ करते थे. संघ से जुड़े उसी अध्यापक की मदद से कामेश्वर को कॉलेज में दाखिला मिला था. स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद ही वे संघ के प्रति पूरी तरह से समर्पित हो चुके थे. इसके बाद उन्हें मधुबनी जिले का जिला प्रचारक बना दिया गया था.

1989 में हुआ था राम जन्मभूमि का शिलान्यास
बता दें कि नवंबर 1989 में राम मंदिर के शिलान्यास का कार्यक्रम रखा गया था. उस समय कामेश्वर चौपाल अयोध्या में ही मौजूद थे. वे एक टेंट में रह रहे थे. उनके कमरे में विहिप के तत्कालीन प्रमुख अशोक सिंघल के एक करीबी व्यक्ति आए और उन्हें बताया कि आपको शिलान्यास के लिए चुना गया है. इसके बाद चौपाल ने ही राम के मंदिर निर्माण की पहली ईंट रखी थी.

ऐसा रहा है चौपाल का राजनीतिक करियर
गौरतलब है कि कामेश्वर चौपाल ने साल 1991 में लोक जनशक्ति पार्टी के दिवंगत नेता रामविलास पासवान के खिलाफ चुनाव लड़ा था. हालांकि, वे हार गए थे. साल 2002 में वे बिहार विधानपरिषद के सदस्य बने. साल 2014 में भाजपा ने उन्हें पप्पू यादव की पत्नी रंजीता रंजन के खिलाफ चुनाव मैदान में उतारा था, लेकिन यहां भी उन्हें कामयाबी नहीं मिली.
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