बिहार: जानें कौन हैं विजय चौधरी की जगह विधान सभा अध्यक्ष बनने जा रहे नंद किशोर यादव

बीजेपी नेता नंद किशोर यादव. फाइल फोटो.
बीजेपी नेता नंद किशोर यादव. फाइल फोटो.

छात्र जीवन से ही राजनीति की शुरुआत करने वाले नंद किशोर यादव (Nand Kishore Yadav) आज की तारीख में एक सफल राजनेता हैं.

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  • Last Updated: November 16, 2020, 9:19 PM IST
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पटना. नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने सोमवार को सातवीं बार सीएम पद की शपथ ली. भाजपा की ओर से तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी उपमुख्यमंत्री होंगे. इन सबके बीच विधानसभा अध्यक्ष का पद भाजपा के खाते में गया है. नंद किशोर यादव इस बार पूर्व स्पीकर विजय चौधरी का स्थान लेने जा रहे हैं. बिहार में हाल में पूरे हुए विधानसभा चुनाव में एनडीए को 125 सीटें मिलीं, जिनमें से नीतीश कुमार की जदयू को 43 सीटें मिलीं और बीजेपी को जेडीयू से 31 सीटें अधिक (74 सीट) हासिल हुईं. ऐसे में इस बार भाजपा ने विधानसभा अध्यक्ष पद पर भी दावा ठोका और यह उसके ही खाते में गई.

बता दें कि नंद किशोर यादव ने छात्र जीवन से ही राजनीति की शुरुआत की थी. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सक्रिय स्वयंसेवक के रूप में समाज सेवा-यात्रा शुरू करने वाले नंदकिशोर यादव का राजनीतिक सफरनामा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ने के बाद प्रारंभ हुआ.





पटना नगर निगम का पार्षद चुने जाने से शुरू हुई उनकी राजनीतिक यात्रा आज इस मुकाम तक पहुंची है. न केवल भारतीय जनता पार्टी बल्कि इसके अनुषांगिक संगठनों के विभिन्न पदों का सफल निर्वहन करते हुए प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष तक पहुंचना उनकी कर्तव्यनिष्ठा और कार्यकर्ताओं के बीच लोकप्रियता का प्रमाण है. वह लगातार छह बार अपने गृह क्षेत्र पूर्वी पटना (बाद में पटना साहिब) विधान सभा क्षेत्र से निर्वाचित हो चुके हैं.
नंद किशोर यादव का जन्म 26 अगस्त 1953 को हुआ. उनके पिता का नाम स्व. पन्ना लाल यादव और मां का नाम स्व. राजकुमारी यादव हैं. उनके परदादा स्व. झालो सरदार, अपने समय के एक प्रसिद्ध जमींदार थे. ऐसा कहा जाता है कि उन्हें शेर पालने का शौक था. उनके दादा स्व. रामदास यादव को पक्षी पालने का शौक था. नंदकिशोर यादव अक्सर यह कहते है कि हम शेर से चिड़ियों पर आ गये.

नंद किशोर का पुश्तैनी घर गोलकपुर (महेन्द्रू) में था जहां आज पटना लॉ कॉलेज का छात्रावास अवस्थित है. नंदकिशोर यादव दसवीं के बाद स्नातक की पढ़ाई शुरू की पर बीच में ही छोड़नी पड़ी. छात्र जीवन से ही वह राजनीति में सक्रिय हुए.
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