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उपेन्द्र कुशवाहा की JDU-BJP को नसीहत, 'छात्रों के वैचारिक द्वंद्व को आपराधिक रंग देना ठीक नहीं'

News18 Bihar
Updated: December 4, 2018, 1:18 PM IST
उपेन्द्र कुशवाहा की JDU-BJP को नसीहत, 'छात्रों के वैचारिक द्वंद्व को आपराधिक रंग देना ठीक नहीं'
उपेन्द्र कुशवाहा (फाइल फोटो)

उपेन्द्र कुशवाहा ने ट्वीट किया, 'छात्र संघ चुनाव में सत्ता व सत्ताधारी दल की ताकत का महादुरुपयोग व्यक्ति के अहंकार की पराकाष्ठा है. ऐसा अहंकार तो इतिहास में हमेशा ही सर्वनाश का कारण साबित हुआ है.

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पटना यूनिवर्सिटी के छात्र संघ चुनाव में जेडीयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर की 'अतिसक्रियता' से बवाल मचा हुआ है. पीयू प्रशासन से मिलीभगत के आरोपों के बीच छात्र संगठनों द्वारा राज्यपाल से भी शिकायत की गई है. इससे पहले सोमवार देर रात को एबीवीपी के कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया गया था. विरोध में बीजेपी के कई विधायक उनकी रिहाई के लिए थाने में धरने पर बैठे हैं, वहीं भाकपा माले ने प्रशांत किशोर पर छात्र राजनीति को खत्म कर देने की साजिश का आरोप लगाया है. इस बीच केन्द्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा ने ट्वीट कर छात्रों को गुमराह करने और पटना विश्वविद्यालय की गरिमा को धूमिल करने का आरोप लगाया है.

राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा ने ट्वीट किया, 'छात्र संघ चुनाव में सत्ता व सत्ताधारी दल की ताकत का महादुरुपयोग व्यक्ति के अहंकार की पराकाष्ठा है. ऐसा अहंकार तो इतिहास में हमेशा ही सर्वनाश का कारण साबित हुआ है.



उन्होंने इस मसले को लेकर दो और ट्वीट किए हैं. जिसमें लिखा, 'पटना यूनिवर्सिटी के छात्रों को राजनीतिक स्वार्थ में गुमराह किया जा रहा है. छात्रों के वैचारिक द्वंद्व को आपराधिक रंग देना ठीक नहीं है.'
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इसी तरह एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा, 'गौरवशाली पटना विश्वविद्यालय का पूर्व छात्र हूं. विश्वविद्यालय की गरिमा व छात्रों की छवि धूमिल होते देखना दुखद है.'



कुशवाहा ने कहा कि लिंगदोह रिपोर्ट की धज्जिया उड़ाने का भी आरोप लगाया है. बहरहाल पीयू छात्र संघ चुनाव पूरी तरह सियासी मुद्दा बन गया है. रात में गिरफ्तार किए गए ABVP कार्यकर्ताओं की रिहाई के लिए बीजेपी के विधायक अरुण सिन्हा, संजीव चौरसिया और नीतिन नवीन धरने पर बैठे हुए हैं.

वहीं भाकपा माले के राज्य सचिव कुणाल ने आरोप लगाया है कि बीजेपी और पटना दोनों मिलकर विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है. उन्होंने इसे विश्वविद्यालय की स्वायत्तता पर हमला बताते हुए कहा कि चुनाव के समय जेडीयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर से पटना विश्वविद्यालय के कुलपति की मुलाकात न केवल चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है
बल्कि छात्र राजनीति की स्वायत्तता को खत्म कर देने की साजिश है.

इनपुट- नीलकमल

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First published: December 4, 2018, 1:16 PM IST
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