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11वीं बार RJD अध्यक्ष बने लालू यादव, क्यों तेजस्वी पर दांव लगाने से पीछे हटी आरजेडी?

Amitesh | News18Hindi
Updated: December 3, 2019, 10:33 PM IST
11वीं बार RJD अध्यक्ष बने लालू यादव, क्यों तेजस्वी पर दांव लगाने से पीछे हटी आरजेडी?
लालू यादव चारा घोटाले के मामले में सजायाफ्ता हैं, लेकिन, जेल में रहने के बावजूद उनसे सलाह-मशविरा कर ही तेजस्वी यादव और आरजेडी के दूसरे नेता काम करते हैं.

आरजेडी (RJD) की तरफ से लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) की अध्यक्षता में आगे बढ़ने और फिर से परचम लहराने का दावा किया जा रहा है. लेकिन, दूसरी तरफ, पार्टी के इस फैसले को राजनीतिक विरोधी (Political Opponent) विकल्पहीनता के साथ-साथ परिवारवाद से जोड़ कर देख रहे हैं.

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  • Last Updated: December 3, 2019, 10:33 PM IST
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पटना. लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) की फिर से ताजपोशी हुई है. लालू यादव निर्विरोध आरजेडी अध्यक्ष (RJD President) बने हैं. आरजेडी की तरफ से लालू यादव की अध्यक्षता में आगे बढ़ने और फिर से परचम लहराने का दावा किया जा रहा है. लेकिन, दूसरी तरफ, पार्टी के इस फैसले को राजनीतिक विरोधी (Political Opponent) विकल्पहीनता के साथ-साथ परिवारवाद से जोड़ कर देख रहे हैं. लालू यादव चारा घोटाले के मामले में सजायाफ्ता हैं, लेकिन, जेल में रहने के बावजूद उनसे सलाह-मशविरा कर ही तेजस्वी यादव और आरजेडी के दूसरे नेता काम करते हैं. लालू यादव 11वीं बार आरजेडी के अध्‍यक्ष चुने गए हैं.

ये बात अलग है कि लालू यादव ने जेल जाने से पहले ही अपने छोटे बेटे तेजस्वी यादव को पार्टी में अपना उत्तराधिकारी बना दिया था. चाहे डिप्टी सीएम बनाने की बात हो या फिर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का जिम्मा दोनों ही मौकों पर पार्टी और परिवार में सबके बीच यह संदेश साफ-साफ दे दिया गया कि लालू यादव के राजनीतिक वारिस तेजस्वी यादव ही हैं.लेकिन, लोकसभा चुनाव के वक्त तेजस्वी के नेतृत्व में पार्टी के अबतक के सबसे खराब प्रदर्शन के बाद कई सवाल खड़े हो रहे थे.

लालू यादव ने जेल जाने से पहले ही अपने छोटे बेटे तेजस्वी यादव को पार्टी में अपना उत्तराधिकारी बना दिया था.


तेजस्वी यादव पार्टी में पूरी तरह से अपनी पकड़ चाहते हैं...

लोकसभा चुनाव के बाद राजनीतिक रूप से तेजस्वी यादव का सक्रिय नहीं रहना. यहां तक कि विधानसभा की कार्यवाही में भी बतौर नेता प्रतिपक्ष एक सत्र तक अपने-आप को सक्रिय नहीं रखना कई सवालों को जन्म दे गया था. कयास लग रहे थे कि तेजस्वी यादव पार्टी में पूरी तरह से अपनी पकड़ चाहते हैं. यहां तक कि वे अपने बड़े भाई तेजप्रताप यादव और बड़ी बहन मीसा भारती की दखलंदाजी नहीं चाहते हैं.

लेकिन, पार्टी की तरफ से तेजस्वी के ही नेतृत्व में अगला विधानसभा चुनाव लड़ने और तेजस्वी के ही मुख्यमंत्री पद के दावेदार के तौर पर सामने आने का रास्ता साफ हो गया. इसके बाद धीरे-धीरे तेजस्वी यादव भी सक्रिय हो गए हैं. लेकिन, पार्टी की तरफ से संगठन चुनाव को लेकर यह कयास बार-बार लग रहे थे कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर शायद तेजस्वी यादव की ताजपोशी हो जाए.लेकिन, अभी भी लालू प्रसाद यादव जेल में रहने के बावजूद कमान तेजस्वी को नहीं सौंपना चाह रहे थे.

लालू यादव की सबको साधे रखने की कोशिश राजनीति के मंझे खिलाड़ी लालू यादव को लगता है अगर वे खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष रहेंगे तो पार्टी और परिवार को एकजुट करने में परेशानी नहीं आएगी. यही वजह है कि लालू यादव खुद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाले रखना चाहते हैं. लेकिन, अपने सबसे भरोसेमंद जगदानंद सिंह को बिहार प्रदेश की कमान सौंपकर लालू यादव की कोशिश सबको साधे रखने की है.

पार्टी की तरफ से तेजस्वी के ही नेतृत्व में अगला विधानसभा चुनाव लड़ने और तेजस्वी के ही मुख्यमंत्री पद के दावेदार के तौर पर सामने आने का रास्ता साफ हो गया.


लालू यादव केवल आरजेडी तक सीमित नहीं
आरजेडी के मुख्य प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद का कहना है कि लालू यादव केवल आरजेडी तक सीमित नहीं हैं. लेकिन, विरोधियों की तरफ से तेजस्वी की काबिलियत पर सवाल खड़ा करने पर वे कहते हैं कि तेजस्वी यादव और लालू यादव दोनों की धारा एक ही है. आरजेडी की सहयोगी आरएलएसपी ने भी लालू यादव को अध्यक्ष बनने पर बधाई देते हुए कहा है कि गरीबों और शोषितों के नेता हैं लालू यादव. उनके नेतृत्व में आरजेडी का कुनबा और बड़ा होगा.

सजायाफ्ता लालू यादव के अध्यक्ष बनने पर सवाल 
दूसरी तरफ, विरोधी पार्टी सजायाफ्ता लालू यादव के अध्यक्ष बनने पर सवाल खड़े कर रहे हैं. जेडीयू के प्रधान महासचिव के सी त्यागी कहते हैं, आरजेडी एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बन गई है. तेजस्वी यादव के अध्यक्ष नहीं बनने के सवाल पर के सी त्यागी ने तंज कसते हुए कहा कि शायद पार्टी और परिवार के भीतर गहराते हुए संकट के चलते ऐसा नहीं हुआ हो.

बीजेपी के बिहार अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल कहते हैं कि आरजेडी की पुरानी परंपरा रही है कि जेल में जो रहते हैं उन्हीं के सहारे वे राजनीति करते हैं. फिलहाल आरजेडी की तरफ से लालू यादव के नाम पर मुहर लग जाने के बाद अब फिर से बिहार की सियासत गरमा गई है.

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First published: December 3, 2019, 9:38 PM IST
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