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लालू यादव नहीं चाहते थे RJD संगठन में हो बड़ा बदलाव! पढ़ें इनसाइड स्टोरी 
Patna News in Hindi

News18 Bihar
Updated: February 8, 2020, 12:59 PM IST
लालू यादव नहीं चाहते थे RJD संगठन में हो बड़ा बदलाव! पढ़ें इनसाइड स्टोरी 
आरजेडी में संगठनात्मक स्तर पर बड़े बदलाव के पक्ष में लालू यादव नहीं थे. (फाइल फोटो)

तेजस्वी यादव ने मिशन 2020 के लिए जो नई टीम बनाई है उसको लेकर पार्टी के भीतर दो राय है तो पार्टी के ट्रस्टेड यादव समाज में भी इसको लेकर बहुत

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पटना. बिहार विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव (RJD leader Tejashwi Yadav) ने मिशन 2020 के लिए अपनी नई टीम का एलान कर दिया है. तेजस्वी के इस सुपर 50 में 90 फीसदी नए चेहरे हैं क्योंकि उन्होंने पुराने चेहरों को अपनी टीम से बाहर कर दिया है. ये वो लोग हैं जो आरजेडी चीफ लालू प्रसाद यादव (RJD Chief Lalu Prasad Yadav) के सबसे पुराने साथी रहे हैं और पार्टी के अच्छे और बुरे दिनों में भी हमेशा साथ रहे. राजनीतिक जानकार बताते हैं कि इनलोगों पर लालू यादव  विश्वास भी करते रहे हैं, लेकिन पाटलिपुत्र की जीत के लिए तेजस्वी ने इस बार सारे पिलर उखाड़ दिए हैं.

लालू ने रिजेक्ट कर दिया था प्रोपोजल
न्यूज 18 के पास यह एक्सक्लुसिव जानकारी है कि लालू प्रसाद इस बड़े बदलाव और संगठन में इस बड़े स्तर पर उलटफेर के पक्ष में नहीं थे. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जब लालू यादव के पास यह प्रस्ताव गया तो पहले उन्होंने इसे रिजेक्ट कर दिया था.

लालू ने तेजस्वी के सामने रख दी ये शर्त

दरअसल उनको लगता था कि अगर यह उलटफेर हुआ तो आरजेडी के मूल वोटर उनसे नाराज हो सकते हैं, बावजूद इसके तेजस्वी और जगदानंद सिंह के मनाने पर वे मान गए. हालांकि लालू ने शर्त रख दी कि जो पुराने जिलाध्यक्ष हैं उन्हें संगठन से हटाया न जाए बल्कि उन्हें सम्मान के साथ संगठन में प्रोन्नति दी जाए.

लालू यादव ने तेजस्वी यादव और जगदानंद सिंह के सामने रखी अपनी शर्त (फाइल फोटो)


बताया जा रहा है कि लालू के इसी मास्टरप्लान के तहत पुराने ज़िलाध्यक्षों को अब प्रदेश कमिटी और राष्ट्रीय कमिटी में शामिल किए जाने की तैयारी है.चुनावी साल में ये उलटफेर हो सकता है आत्मघाती!
लालू के सबसे पुराने सहयोगियों की मानें तो तेजस्वी यादव का यह नया फार्मूला चुनावी साल में पार्टी के लिए आत्मघाती भी साबित हो सकता है. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता की मानें तो जिन ज़िलाध्यक्षों को तेजस्वी ने अपनी नई टीम से आउट किया है इनलोगों की जिलों में न सिर्फ जमीनी पकड़ है बल्कि अपने-अपने समाज में ये नेता काफी लोकप्रिय भी हैं.

यही नहीं पिछले 2 से 3 दशकों में इन पुराने ज़िलाध्यक्षों को पार्टी के हर बूथ और विधानसभा क्षेत्र के हर जातीय समीकरण का की पूरी जानकारी भी है. चूंकि इनमें अधिकतर ज़िलाध्यक्ष यादव जाति से हैं, जो आरजेडी के ट्रस्टेड वोटर्स भी हैं, इस बड़े उलटफेर के बाद यादव समाज में एक गलत मैसेज भी गया है.

नए प्रयोग करने का वक्त नहीं
वरिष्ठ नेता कहते हैं कि तेजस्वी की इस नई सोच को हम बिल्कुल गलत नहीं मानते, लेकिन चुनावी साल में यह प्रयोग पार्टी के लिए घातक साबित हो सकता है. वैसे भी जो नए जिलाध्यक्ष चुनावी तैयारियों में जुटेंगे उन्हें बूथ स्तर और क्षेत्रीय जातीय समीकरण को समझने में महीनों लग जाएंगे और तब तक चुनाव आ जाएगा. इसलिए ऐसे प्रयोग साल भर पहले ही करने चाहिए थे.

तेजस्वी यादव और जगदानंद सिंह ने मिलकर आरजेडी की नई टीम बनाई.


आरजेडी नेता ने न्यूज 18 को ये भी बताया कि नई टीम की घोषणा के बाद से पार्टी के बड़े नेताओं को पुराने ज़िलाध्यक्षों के लगातार फोन आ रहे हैं. सभी एक ही बात करते हैं कि आखिर हम सभी में क्या कमी थी जो तेजस्वी यादव ने हम पर विश्वास नहीं किया. खबर ये भी है कि अब  अधिकांश जिलाध्यक्ष रांची में लालू से मिलने की तैयारी में हैं. सभी कहते हैं अब तो लालू जी पर ही भरोसा है.

विधायकों को तेजस्वी लेंगे विश्वास में
तेजस्वी को भी इस बात का एहसास है कि इस बड़े उलटफेर को लेकर पार्टी के विधायकों के भीतर भी नाराजगी है क्योंकि ग्राउंड जीरो में इस नई टीम के साथ सबसे पहले इन्हें ही मैदान में उतरना है. जानकारी के अनुसार इनमें सुपौल के विधायक यदुवंशी यादव का नाम सबसे ऊपर है क्योंकि इनपर तेजस्वी ने गाज गिराई है.

यदुवंशी यादव सुपौल के पुराने जिलाध्यक्ष रहे हैं इस बार उन्हें हटाकर अतिपिछड़े समाज के जिलाध्यक्ष को जिला की कमान दी गई है.

बहरहाल आरजेडी में इन राजनीतिक बदलावों के बीच ये सवाल जरूर है कि क्या तेजस्वी अपनी इस नई टीम के साथ सफल होंगे?

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First published: February 8, 2020, 12:56 PM IST
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