लालू विरोध ने सुशील मोदी को सियासत में किया स्थापित! जानें बिहार NDA के कैसे बनें संकट मोचक ?
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लालू विरोध ने सुशील मोदी को सियासत में किया स्थापित! जानें बिहार NDA के कैसे बनें संकट मोचक ?
सुशील मोदी लालू विरोध के साथ-साथ बीजेपी संगठन के लिए भी काम करते रहे. (फाइल फोटो)

सुशील कुमार मोदी (Sushil Kumar Modi) और लालू प्रसाद यादव का पुराना नाता रहा है. दोनों ही नेताओं ने छात्र राजनीति से सियासी सफर शुरू किया था.

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पटना. बिहार में कई ऐसे नेता हैं जिनको लालू यादव (Lalu Yadav) ने खड़ा किया है. उनमें से बिहार के वर्तमान उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी (Sushil Kumar Modi) भी हैं. आपको आश्चर्य जरूर होगा लेकिन ये सच है. सुशील कुमार मोदी ने लालू यादव के साथ तो राजनीति नहीं की, लेकिन लालू विरोध ने उनको अपनी पार्टी में इतना मजबूत बना दिया कि वे बिहार बीजेपी (BJP) के लिए एक स्तंभ बनकर खड़े हैं. यही वजह है कि सुशील कुमार मोदी जब भी लालू यादव के खिलाफ बोलते हैं तो पार्टी में और मजबूत हो जाते हैं.

सुशील कुमार मोदी और लालू प्रसाद यादव का पुराना नाता रहा है. दोनों ही नेताओं ने छात्र राजनीति से सियासी सफर शुरू किया था. 1973 में पटना यूनिवर्सिटी के छात्र संघ चुनाव में सुशील मोदी जनरल सेक्रेट्री चुने गए. उस दौरान छात्र संघ अध्‍यक्ष लालू प्रसाद यादव बने. छात्र जीवन की राजनीति से लेकर बीजेपी के शीर्ष पद तक सुशील कुमार मोदी ने लालू यादव के इर्द-गिर्द ही राजनीति की. तब से लेकर अब तक सुशील मोदी लगातार लालू यादव के साए की तरह विरोध करते रहे. लालू यादव का विरोध ही सुशील कुमार मोदी को बिहार की में राजनीति स्थापित करता रहा है. एक समय ऐसा आया सुशील कुमार मोदी बीजेपी के स्थापित और सशक्त लीडर बन गए.

चारा घोटाले के बाद सुशील मोदी चर्चित
उसके बाद जब लालू यादव बिहार के सत्ता पर स्थापित हुए तो सुशील कुमार मोदी ने लालू यादव के खिलाफ बिगुल फूंक दिया. 90 के दशक में सुशील मोदी ने लालू सरकार की का जमकर विरोध किया. हर मसले पर सुशील मोदी लालू यादव के शासन का विरोध करते रहे. नली- गली से लेकर उस समय के सबसे बड़े घोटाले तक का सुशील मोदी ने मामला उठाया. 1996 में उन्‍होंने पटना हाईकोर्ट में लालू प्रसाद के खिलाफ जनहित याचिका दायर की. बाद में यह मामला चारा घोटाले के रूप में जाना गया. लालू सरकार में हुए चारा घोटाला को लेकर सुशील मोदी काफी चर्चित हो गए. माना जाता है लालू यादव पहली बार सुशील मोदी की उठाए गए चारा घोटाले के मामले को लेकर ही जेल गए थे. लालू राबड़ी के 15 साल के शासन काल में सुशील मोदी ही थे जिन्होंने सरकार के नाक में दम कर रखा था.
लालू विरोध ने सुशील मोदी को स्थापित किया


सुशील मोदी लालू विरोध के साथ-साथ बीजेपी संगठन के लिए भी काम करते रहे. यही वजह रही कि जब एनडीए की सरकार 2005 में बनी तो सुशील मोदी को उपमुख्यमंत्री बनाया गया. उप मुख्यमंत्री रहते सुशील मोदी ने बीजेपी में अपना एक ऐसा कद बना लिया कि बिहार बीजेपी में बिना सुशील मोदी की इजाजत के बगैर पता भी नहीं डोलता है. पिछले 15 सालों में सुशील मोदी के खिलाफ बीजेपी में कई गुट बने लेकिन सभी धाराशायी हो गए उसमें भी वजह लालू यादव ही थे.

सुशील मोदी के पास लालू जैसा अचूक बाण
2013 से लेकर 2017 तक जब बीजेपी बिहार के सत्ता से बाहर रही तो पार्टी में सुशील मोदी विरोधी गुट हावी होने लगा. ऐसा लगने लगा कि सुशील मोदी कमजोर हो गए. लेकिन सुशील मोदी ने अपने पास लालू यादव जैसा अचूक बाण रखा था. जिसे चलाते ही बीजेपी पूरी तरह से सुशील मोदी के गिरफ्त में आ गई. भले नीतीश कुमार बीजेपी के विरोध में चले गए. लेकिन सुशील मोदी ने लालू यादव और लालू परिवार के खिलाफ अपना मुहिम जारी रखा. यहां तक कि सुशील मोदी लालू यादव पर किताब भी लिख दी. सुशील मोदी ने 'लालू-लीला' नाम की किताब लिखी है जिसमें लालू यादव के घोटालों का जिक्र है.

लालू यादव के खिलाफ सम्पति बम
2015 के विधानसभा चुनाव के बाद सुशील मोदी ने लालू यादव और उनके परिवार के खिलाफ संपत्ति बम  फोड़ना शुरू कर दिया. जमीन घोटाला, मॉल घोटाला,आय से अधिक सम्पति मामला और बेनामी सम्पति मामला सहित सुशील मोदी ने लगातार 90 दिनों तक प्रेस कॉन्फेंस करते रहे. इसमें सुशील मोदी ने लालू यादव के किसी भी परिवार को नहीं बख्शा. राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेजप्रताप यादव, मीसा भारती सहित लालू यादव के दामादों के खिलाफ भी अवैध सम्पति के सबूत जुटाए और उसे जग जाहिर किया. इन्हीं आरोपों के दम पर सीबीआई और ईडी ने लालू परिवार पर शिकंजा कसना शुरू किया और 2017 जुलाई में लालू परिवार के खिलाफ केस दर्ज कर उनके कई ठिकानों पर छापा मारा. यहीं से नीतीश और आरजेडी में दूरी बढ़ती चली गई.

2017 में हीरो बनकर उभरे सुशील मोदी
2013 के बाद 2017 में फिर से बिहार में 4 साल बाद जदयू और भाजपा के गठबंधन की सरकार बनी. बिहार में सत्ता पलट करने और इस गठबंधन को दोबारा बनाने वाले असली हीरो सुशील कुमार मोदी माने जाते हैं. उन्हाेंने ही लालू परिवार पर भ्रष्टाचार के मामलों का खुलासा कर राजद और जदयू के बीच दरार की कहानी शुरू की,  महागठबंधन टूटकर बिखर गया.

संकटमोचन की भूमिका में रहे सुशील मोदी
 2005 से लेकर 2013 तक सुशील मोदी बिहार सरकार में उपमुख्यमंत्री थे और नीतीश के सबसे भरोसेमंद माने जाते थे. इसलिए नीतीश का भरोसा दोबारा जीतकर वह 2017 में दूसरी बार डिप्टी सीएम बन गए. आज भी यदि बिहार के एनडीए सरकार पर कोई संकट आता है तो सुशील मोदी संकट मोचन की भूमिका में आ जाते है.
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