कन्हैया को रिकॉर्ड मतों से हराने वाले गिरिराज सिंह को मोदी कैबिनेट में दोबारा मिली जगह

सीट बदले जाने से नाराज गिरिराज सिंह पीएम मोदी के कहने पर बेगूसराय से चुनाव लड़ने को तैयार हो गए और CPI के कन्हैया कुमार के खिलाफ 4 लाख 22 हजार मतों के बड़े अंतर से जीते.

Amrendra Kumar | News18 Bihar
Updated: May 30, 2019, 7:56 PM IST
कन्हैया को रिकॉर्ड मतों से हराने वाले गिरिराज सिंह को मोदी कैबिनेट में दोबारा मिली जगह
गिरिराज सिंह
Amrendra Kumar
Amrendra Kumar | News18 Bihar
Updated: May 30, 2019, 7:56 PM IST
बीजेपी के फायर ब्रांड नेता गिरिराज सिंह की गिनती पीएम मोदी और अमित शाह के करीबी के तौर पर होती है. वे एक ओर जहां हिन्‍दुत्‍व का झंडा बुलंद करते हैं तो दूसरी ओर पीएम मोदी के 'हनुमान' कहे जाते हैं. दरअसल ये नाम इसलिए उन्हें मिला है क्योंकि वे खुद कहते हैं कि पीएम मोदी के हनुमान हैं और वह जो आदेश करेंगे, वही करेंगे. यही कारण है कि पिछली बार जब वह बेगूसराय से चुनाव लड़ना चाहते थे तो उन्हें नवादा का टिकट दे दिया गया. नाराजगी हुई तो पीएम मोदी ने उन्हें नवादा से लड़ने को कह दिया. उन्होंने आदेश माना और जीत दर्ज की. अब गिरिराज सिंह एक बार फिर मोदी मंत्रिमंडल में शामिल हो गए हैं. गुरुवार को उन्होंने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली.

इसी तरह वे इस बार के चुनाव में नवादा से ही लड़ना चाहते थे, लेकिन उनकी सीट बदल दी गई और बेगूसराय भेज दिया गया. वे नाराज हुए जरूर, लेकिन पीएम मोदी के कहने पर बेगूसराय से चुनाव लड़ने को तैयार हो गए और सीपीआई के कन्हैया कुमार के खिलाफ 4  लाख 22 हजार मतों के बड़े अंतर से जीते.



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कौन हैं गिरिराज सिंह

एमएलसी से लेकर मोदी कैबिनेट तक कैसा है गिरिराज सिंह का सियासी सफर ये आपको न्यूज 18 बता रहा है. गिराराज सिंह का जन्म लखीसराय जिले के बड़हिया में भूमिहार ब्राह्मण परिवार में हुआ था. यही कारण है कि इस बार के चुनाव में उन पर बाहरी प्रत्‍याशी होने का आरोप लगा. गिरिराज सिंह की शिक्षा की बात की जाए तो उन्होंने बिहार के ही मगध यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है. गिरिराज सिंह की पत्नी का नाम उमा सिन्हा है और उनकी एकमात्र बेटी है.

सियासी सफर

गिरिराज सिंह वर्ष 2002 में पहली बार बिहार विधानपरिषद के सदस्य यानि एमएलसी चुने गए थे. वह शुरू से ही पीएम नरेंद्र मोदी के मुरीद रहे हैं. वह 2008 से 2010 के बीच नीतीश कुमार की सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे. गिरिराज सिंह नीतीश सरकार में 2010 से 2013 तक पशुपालन और डेयरी मंत्री रहे. साल 2014 में वह केंद्र की राजनीति में आ गए. यह वो समय था जब उनके बयान अखबारों के साथ ही मीडिया में सुर्खियां बनती थीं.
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वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में गिरिराज को बीजेपी ने नवादा सीट से लोकसभा चुनाव में उतारा और उन्होंने राजद के प्रत्याशी को हराकर जीत हासिल की. मोदी सरकार के 2 साल बीतने के बाद गिरिराज को मोदी सरकार में राज्य मंत्री बनाया गया था.

बयान के कारण विवादों से नाता
गिरिराज सिंह का नाम हमेशा से विवादित बयानों से जुड़ता रहा है. चाहे बात किसी को पाकिस्तान परस्त कहने की हो या फिर पाकिस्तान भेजने की, वहां पटाखे जलाने की हर बार ऐसे बयानों से गिरिराज सिंह का नाम जुड़ता रहा है. गिरिराज सिंह कई बार अपने बयानों की वजह से ही पार्टी की नाराजगी का शिकार हो चुके हैं.

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गिरिराज को एनडीए में रहते हुए भी नीतीश कुमार और सुशील मोदी का विरोधी बताया जाता है. यही कारण है कि इस बार उनकी सीट को उनसे बिना चर्चा किए हुए बदल दिया गया था. वर्ष 2013 में उन्होंने नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा था कि वह जलन के चलते नरेंद्र मोदी पर हमला कर रहे हैं.

जीत से बढ़ा कद
बिहार की सबसे हॉट लोकसभा सीट बेगूसराय से जेएनयू के पूर्व अध्यक्ष और सीपीआई के कैंडिडेट कन्हैया कुमार पर बड़ी जीत दर्ज की. अतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियां बने बेगूसराय के मुकाबले को  गिरिराज सिंह ने 4 लाख 22 हजार के बड़े अंतर से जीता. जाहिर है इस जीत से उनका राजनीतिक कद और बढ़ गया.

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