राज्यसभा में बिहार के सवर्ण नेताओं का है दबदबा, जानें किस जाति से हैं कितने सांसद
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राज्यसभा में बिहार के सवर्ण नेताओं का है दबदबा, जानें किस जाति से हैं कितने सांसद
पटना में राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करते राजद के नेता

बिहार (Bihar) से कुल 15 राज्यसभा सदस्य (Rajya Sabha MP) हैं जिसमें आधे से ज़्यादा सवर्ण समुदाय से आते हैं. इसके अलावा अन्य छह में अन्य जातियों के नेता शामिल हैं.

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पटना. बिहार की राजनीति हमेशा से जाति के ईर्द गिर्द घूमती रही है. बात चाहे निकाय चुनाव (Election) की हो या फिर विधानसभा, लोकसभा या राज्यसभा की. अगर आप राज्यसभा (Rajya Sabha) में सदस्यों (बिहार से आने वाले) पर नजर डालेंगे को पाएंगे कि अपर हाउस में अपर कास्ट ने अपना वर्चस्व बना लिया है वो भी तब जब बिहार के सियासत में पिछड़ा (Backward), अति पिछड़ा और दलितों की राजनीति के इर्द गिर्द सियासत घूम रही है. ऐसे में सवाल है कि आख़िर वो कौन सी वजह है जिसने बिहार के तमाम सियासी पार्टियों को सवर्ण नेताओं पर दांव लगाने को मजबूर कर दिया है खास कर उपरी सदन के लिए.

बिहार से राज्यसभा जाने वाले सवर्ण नेता

सवर्ण नेताओं को अपर हाउस भेजने में कोई एक पार्टी ही नहीं है बल्कि तमाम पार्टियां शामिल हैं जो उपरी सदन के लिए सवर्ण नेताओं पर ही भरोसा जताती है. एक नज़र डालते हैं राज्यसभा में बिहार से आने वाले सवर्ण नेताओं की लिस्ट पर.



1–हरिवंश सिंह — जेडीयू — राजपूत
2- अखिलेश सिंह — कांग्रेस — भूमिहार
3-सी पी ठाकुर — बीजेपी अब उनकी जगह विवेक ठाकुर — भूमिहार
4- गोपाल नारायण सिंह — बीजेपी — राजपूत
5- वशिष्ठ नारायण सिंह —जेडीयू — राजपूत
6- मनोज झा — राजद — ब्राह्मण
7- किंग महेंद्र — जेडीयू — भूमिहार
8. सतीश चंद्र दुबे — बीजेपी — ब्राह्मण

9. अमरेन्द्रधारी सिंह- राजद- भूमिहार

बिहार से कुल 15 राज्यसभा सदस्य हैं जिसमें आधे से ज़्यादा सवर्ण समुदाय से आते हैं. कुल 9 सदस्य सवर्ण समुदाय से, दो मुस्लिम जिसमें एक कहकंशा परवीन का टर्म ख़त्म होने वाला है. एक यादव मीसा भारती हैं तो एक दलित नेता रामविलास पासवान. एक नेता पिछड़ी जाति से हैं जो जेडीयू के आरसीपी सिंह हैं जेडीयू से ही एक अति पिछड़ा समुदाय के नेता रामनाथ ठाकुर उपरी सदन के सदस्य हैं. ऐसे में साफ़ है कि तमाम पार्टियों ने अपर हाउस में अपर कास्ट को प्राथमिकता दी है

जातियों को लुभाने की कोशिश

जाने माने पत्रकार रवि उपाध्याय कहते हैं कि सियासी पार्टियां ये अच्छे से जानती हैं कि बिहार के तमाम दलों के बड़े नेता ग़ैर सवर्ण जाति से आते हैं और पिछड़ा, अति पिछड़ा और दलित वोटरों को अपने पाले में करने की कोशिश भी तेज़ होती है. ऐसे में बिहार के सियासत में सवर्ण वोटर की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है. ऐसे में सवर्ण नेताओ को राज्यसभा या विधान परिषद में ज़्यादा से ज़्यादा भेज सवर्ण वोटरों को लुभाने की कोशिश तमाम पार्टियां करती हैं.

जेडीयू बोली

जेडीयू प्रवक्ता राजीव रंजन इस मामले पर अपनी राय देते हुए कहते हैं कि हर पार्टी अपर हाउस में पार्टी के स्टैंड को बेहतर तरीक़े से रखा जाए इसके लिए एक ऐसे चेहरे की तलाश करती है. किसी ख़ास जाति या समुदाय को इसमें प्राथमिकता नहीं मिलती लेकिन अगर ऐसे में सवर्ण नेता ही अपर हाउस में जाते हैं तो ये महज़ संयोग हो सकता है.

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