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तो क्‍या रामविलास पासवान की राजनीतिक विरासत का फैसला अब बाहुबलियों के दम पर होगा?

विरासत पर कब्जा को लेकर तेज हुई कवायद, आशीर्वाद यात्रा और जंयती के बहाने दिखायेंगे चाचा- भतीजा अपनी ताकत

Legacy in LJP: पटना के राजनीतिक गलियारे में अंदरखाने चर्चा शुरू हो गई है कि चिराग पासवान (Chirag Paswan) गुट भीड़ जुटाने और अपना दमखम दिखाने के लिए पप्पू यादव (Pappu Yadav) की मदद ले रहा है, ताकि पशुपति पारस (Pashupati Paras) गुट के कर्ताधर्ता पूर्व सांसद सूरजभान (Suraj Bhan Singh) के असर को कम किया जा सके.

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पटना. मौसम विभाग ने बिहार में अगले चार-पांच दिनों तक भारी बारिश और आकाशीय बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया है. दूसरी तरफ, बिहार में राजनीतिक तापमान (Political Temperature in Bihar) में जबरदस्त तेजी आने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता. बिहार में अगले कुछ दिनों तक एलजेपी (LJP) के अंदर वर्चस्व की लड़ाई को लेकर राजनीतिक पारा उफान पर रहेगा तो दूसरी तरफ आरजेडी (RJD) स्थापना दिवस के बहाने सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) को घेरने का कोई भी मौका हाथ से नहीं जाने देगा.

एलजेपी के संस्थापक अध्यक्ष और दिवंगत रामविलास पासवान (Ram Vilas Paswan) की जयंती के बहाने सोमवार को पटना में पशुपति कुमार पारस और चिराग पासवान (Pashupati Paras & Chirag Paswan) गुट आमने-सामने होंगे. पटना के एलजेपी कार्यालय में पहले से ही पारस गुट का कब्जा है. इसलिए पटना में दोनों गुट में टकराव के भी आसार हैं. पटना के राजनीतिक गलियारे में अंदरखाने चर्चा शुरू हो गई है कि चिराग गुट भीड़ जुटाने और दमखम दिखाने के लिए पप्पू यादव (Pappu Yadav) की मदद ले रहे हैं, ताकि पारस गुट के कर्ताधर्ता पूर्व सांसद सूरजभान सिंह (Suraj Bhan Singh) के असर को कम किया जा सके.

एलजेपी की वजह से बिहार का राजनीतिक तापमान बढ़ा
पशुपति कुमार पारस और चिराग पासवान गुट में 5 जुलाई से बिहार की राजधानी पटना में जोर-आजमाइश का दौर शुरू होने जा रहा है. पिछले कई दिनों से पटना के चौक-चौराहों पर पारस और रामविलास पासवान के पोस्टर लगे हुए हैं. पारस गुट ने ऐसा करते हुए इस बात का पूरा ख्याल रखा है कि पोस्टर-होर्डिंग के लिए चिराग पासवान के लिए कोई जगह न बचे. पटना के एलजेपी कार्यालय में पहले से ही पारस गुट का कब्जा है.

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बिहार की राजनीति में रामविलास पासवान का लंबे समय तक सिक्का चला है.


आशीर्वाद यात्रा के लिए हाजीपुर का चयन क्‍यों?
सोमवार सुबह से ही चिराग पासवान के समर्थकों का पटना में जुटना शुरू हो गया. चिराग अपने समर्थकों को संदेश भेज कर बड़ी तादाद में एयरपोर्ट पहुंचने का निर्देश दे चुके हैं. चिराग के नेतृत्व वाला खेमा पशुपति कुमार पारस के नेतृत्व वाले गुट से दो-दो हाथ करने के लिए तैयार है. चिराग हाजीपुर से आशीर्वाद यात्रा शुरू करने से पहले कह चुके हैं कि यह महत्वपूर्ण फैसला इसलिए लिया गया है, क्योंकि रामविलास पासवान कई बार यहां से लोकसभा के लिए चुने गए थे. फिलहाल इस सीट का प्रतिनिधित्व पशुपति कुमार पारस कर रहे हैं. ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि चिराग 2024 लोकसभा चुनाव से ठीक पहले इस सीट पर अपनी दावेदारी का भी ऐलान करेंगे. आशीवार्द यात्रा के बहाने ही यह भी साफ हो जाएगा कि चिराग पासवान अगला लोकसभा चुनाव हाजीपुर सीट से ही लड़ने वाले हैं.

पारस गुट और चिराग गुट में कौन किस पर भारी
दूसरी तरफ पारस गुट भी पटना के प्रदेश कार्यालय में रामविलास पासवान की जयंती मना रहा है. पटना और बिहार के अलग-अलग हिस्सों में एलजेपी के दोनों गुट अपने-अपने तरीके से पार्टी पर दावा ठोकेंगे. ऐसे में इस बात का भी अंदेशा है कि दोनों गुटों में संघर्ष भी हो सकता है.

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पारस गुट को नेतृत्व बाहुबली पूर्व सांसद सुरजभान कर रहे हैं. (फाइल फोटो)


सूरजभान और पप्पू यादव के बीच जोर-आजमाइश?
पारस गुट का नेतृत्व पूर्व बाहुबली सांसद सूरजभान कर रहे हैं. माना जा रहा है कि सूरजभान की वजह से ही चिराग पासवान परेशान हैं. पिछले बिहार विधानसभा चुनाव के वक्त पटना में चिराग पासवान और जनाधिकार पार्टी के सर्वेसर्वा पप्पू यादव के बीच घंटों बंद कमरे में मुलाकात हुई थी. पप्पू यादव और चिराग पासवान में निकटता भी किसी से छुपी नहीं है. यही वजह है कि पप्पू यादव के समर्थक चिराग पासवान के समर्थन में खुलकर सामने आ सकते हैं. हालांकि, पप्पू यादव फिलहाल जेल में हैं. इसके बावजूद उनके समर्थकों का चिराग पासवान को समर्थन मिल सकता है.

ये भी पढ़ें: Bihar Politics: LJP में वर्चस्व की लड़ाई का क्या होगा अंजाम, क्या चिराग पासवान को मिलेगी विरासत?

क्या कहते हैं जानकार
बिहार की राजनीति को करीब से समझने वाले सुरेंद्र किशोर कहते हैं, 'बिहार की राजनीति में इसे विडंबना कहें या सच्चाई कि हमेशा से ही पंथ, जाति और वंशवाद हावी रहा है. एलजेपी में जो लड़ाई चल रही है, वह भी वंशवाद के ही कारण है. देखा जाए तो एलजेपी के ज्यादातर स्थानीय नेता और जिला इकाई चिराग पासवान के समर्थन में हैं. इसका कारण है कि पशुपति पारस आज तक अपने भाई की परछाई से बाहर नहीं निकल पाए. बिहार के कई जिला जैसे वैशाली, खगड़िया, बेगूसराय, समस्तीपुर और जमूई में पासवान जाति की संख्या अच्छी है और रामविलास पासवान की इन जिलों में अच्छी पकड़ रही है. पारस दिवंगत रामविलास पासवान के नाम पर ही राजनीति करते आए हैं. ऐसे में यह कैसे संभव होगा कि चिराग को छोड़ कर पासवान वोटर्स पारस के पाले में आ जाएंगे.'

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