पिछले साल की तरह इस बार भारी बारिश में भी नहीं डूबेगा पटना! जानें कैसी है सरकार और निगम की तैयारी
Patna News in Hindi

पिछले साल की तरह इस बार भारी बारिश में भी नहीं डूबेगा पटना! जानें कैसी है सरकार और निगम की तैयारी
कुछ दिन पहले सीएम नीतीश कुमार ने खुद संप हाउस का जायजा लिया था

सरकारी दावों के मुताबिक पटना (Patna) शहर के सभी 40 संप हाउसों में अभी कुल 135 पंप और मोटर्स लगे हुए हैं, जो सही तरीके से काम कर रहे हैं. इसलिए भारी बारिश (Heavy Rain) में भी इस बार पटना नहीं डूबेगी

  • Share this:
पटना. पिछले साल बिहार की राजधानी पटना (Patna) में भारी बारिश (Heavy Rain) की वजह से जो जलजमाव (Water Logging) हुआ या फिर यह कह लीजिए कि पूरा पटना ही डूब गया, उस भयानक मंजर को आज कोई याद तक नहीं करना चाहता. लेकिन हर पटनावासी ये जरूर जानना चाहता है कि उस त्रासदी का असली गुनहगार कौन है या फिर किनकी नाकामियों की वजह से पटना के लोगों को नरक जैसी जिंदगी जीने को मजबूर होना पड़ा था. जाहिर है हर तरफ से सरकार और उसके सिस्टम पर ही सवाल उठाए गए. लेकिन इसके पीछे की एक कहानी और ये है कि पटना के 40 संप हाउसों (Sump Houses) की वजह से ही सरकार की फजीहत हुई और पटना के लोगों को मजबूरन डूबना पड़ा. और आज उन्हीं संप हाउसों के दम पर सरकार और नगर निगम ये दावा कर रहे हैं कि इस साल पटना किसी कीमत पर नहीं डूबेगा. अब सवाल यह है कि जब पिछले साल इन्हीं संप हाउसों को जलजमाव का गुनहगार बताया गया था, तो आखिर एक साल में सरकार ने ऐसा क्या जादू कर दिया कि नगर निगम, बुडको, जिला प्रशासन से लेकर पूरी सरकार अब ताल ठोकने लगी है. न्यूज 18 ने पटना के तीन सबसे बड़े और पिछले साल के सबसे प्रभावित इलाकों को चिन्हित करके उन संप हाउसों की पड़ताल की.

न्यूज-18 की टीम ने की तैयारियां की पड़ताल 

न्यूज-18 की टीम सबसे पहले पहुंची जोगीपुर संप हाउस, जहां का पिछले हफ्ते खुद सीएम नीतीश कुमार ने भी मुआयना किया था. पिछले साल यह संप हाउस जलजमाव की वजह से पूरी तरह से डूब चुका था. जिसकी वजह से कंकड़बाग कॉलोनी का पूरा इलाका जलमग्न हो गया था. आज जब न्यूज 18 जोगीपुर संप हाउस पहुंचा तो पिछले साल के मुकाबले इस बार बहुत सारे बदलाव दिखे. मसलन संप हाउस में लगे सभी 8 पंप और 8 मोटर्स सही तरीके से काम कर रहे थे. इसके अलावा एक अतिरिक्त डीजल चलित पंप को भी लगाया गया है. साथ में बिजली की व्यवस्था को बहुत ज्यादा चुस्त दुरुस्त किया गया है. सभी नए बिजली के ट्रांसफार्मर लगाए गए हैं. कई मोहल्लों से संप हाउस तक बारिश या नाले का पानी पहुंच रहा था और जोगीपुर संप हाउस में जमा हो रहा पानी आगे पहाड़ी संप हाउस आसानी से डिस्चार्ज भी हो रहा था. जबकि पिछले साल आधे से अधिक पंप-मोटर खराब थे और नालों -संप में गाद की वजह से पानी संप हाउस तक पहुंच भी नहीं पा रहा था. लेकिन इस बार नगर निगम ने नाले की उड़ाही भी बहुत हद तक करवा ली है जिसके चलते संप हाउस प्रॉपर तरीके से काम कर रहा है.



इसके बाद न्यूज 18 की टीम पहुंची सैदपुर संप हाउस, जहां पिछले साल सबसे ज्यादा तबाही मची थी. वह इलाका जहां बिहार के डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी और स्वर कोकिला शारदा सिन्हा के भी घर हैं. बुडको और पटना नगर निगम ने सबसे ज्यादा मेहनत इसी संप हाउस पर की है, क्योंकि यह इलाका सबसे वीवीआइपी भी है और राजेंद्र नगर में जलजमाव की वजह से सरकार की जबरदस्त फजीहत भी हुई थी. सैदपुर संप हाउस में अभी कुल 6 पंप और 6 मोटर्स लगे हैं. जलजमाव के बाद अधिकांश पंप-मोटर नए लगाए हैं. साथ ही सभी को जमीन से 2 से ढाई फीट की ऊंचाई पर लगाया गया है. कुछ इसी तरह से बिजली के ट्रांसफार्मर भी जमीन से 3 फीट की ऊंचाई पर लगाया गया है. ताकि भीषण बारिश के बावजूद भी संप हाउस में पानी लगने के बाद भी पंप-मोटर ना डूब सके. साथ ही अलग से डीजल चालित मोटर-पंप को 4 फिट की ऊंचाई पर दूसरे जगह पर लगाया गया है. इसके अलावे सभी संप हाउसों में ग्रीटिंग ( लोहे का जाल) की भी व्यवस्था की गई है. ताकि ग्रीटिंग के जरिये कचड़े को पानी से अलग किया जा सके. पिछले साल ग्रीटिंग ना होने की वजह से कचड़ों की वजह से कई पंप और मोटर्स खराब हो गए थे.
सैदपुर संप हाउस के बाद हमारी टीम पहुंची पहाड़ी संप हाउस जिसे सभी सँपों का फादर या पटना शहर का हार्ट भी कहा जाता है क्योंकि पहाड़ी संप हाउस में सबसे ज्यादा 11 पंप और 11 मोटर लगे हैं जिनकी डिस्चार्ज क्षमता भी बाकी संप हाउस में लगे मोटरों से कही ज्यादा है ..पहाड़ी संप हाउस पर सैदपुर और योगीपुर संप हाउस का पूरा दवाब होता है पिछले साल ये भी संप हाउस सही तरीके से काम नहीं कर पाया. इसके पीछे मोटर-पंप की मरम्मती के अलावे एक सबसे बड़ा कारण संप में सील्ट और नाले की उड़ाही ना होना बड़ा कारण था. लेकिन इस बार बुडको और पटना नगर निगम ने साथ मिलकर संप के सील्ट और बाईपास के साथ जुड़े सभी नालों की उड़ाही कर दी. पहाड़ी संप हाउस के जरिये पटना शहर के अधिकांश पानी पुनपुन नदी में बहाया जाता है अगर यहां कुछ भी गड़बड़ी हुई तो पटना को डूबने से कोई नहीं बचा सकता.

नगर निगम का ये है दावा

पटना नगर निगम के आयुक्त हिमांशु शर्मा और बुडको के एसडीओ कमल राणा के मुताबिक इस बार किसी भी कीमत पर पटना नहीं डूबेगा. कमिश्नर के मुताबिक योगीपुर, सैदपुर और पहाड़ी संप हाउस पर बारिश के पानी का सबसे ज्यादा दवाब रहता है क्योंकि ये इलाका बहुत नीचा भी है यही कारण है कि पिछले साल इन इलाकों में सबसे ज्यादा हाहाकार मचा हुआ था.

40 संप हाउस तैयार

सरकारी दावों के मुताबिक पटना शहर के सभी 40 संप हाउसों में अभी कुल 135 पंप और मोटर्स लगे हुए हैं जो सही तरीके से अभी काम कर रहे हैं. इसके अलावे पटना के 28 जगहों पर अस्थायी DPS ( ड्रेनेज पंपिंग स्टेशन) बनाकर ट्राली मॉन्टेड चालित पंप भी तैयार किए गए हैं. ताकि अगर किसी मोहल्ले में नाले या बारिश का पानी अचानक जमा हो जाए, तो इस अस्थायी DPS को ट्रैक्टर के जरिये उस जगह पर लाया जाए ताकि जलजमाव हटाया जा सके. पटना नगर निगम, बुडको और सरकार की तैयारी इस बार वाकई अच्छी है, लेकिन इनकी असली परीक्षा तब होगी जब पटना में भारी बारिश होती है. वैसे अधिकारियों का दावा है कि अगर पिछले साल की तरह भी इस बार बारिश हुई तो उसे महज 24 घंटे के भीतर निकाल दिया जाएगा.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading