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Bihar: बीमार पिता को खाट पर उठाया, फिर 22 नदियां पार कर पहुंचाया अस्पताल

बिहार: बीमार पिता को खाट पर लेकर 22 बार पार की नदियां, फिर पहुंचे अस्पताल.

बिहार: बीमार पिता को खाट पर लेकर 22 बार पार की नदियां, फिर पहुंचे अस्पताल.

Bihar News: बिहार के बगहा में श्रवण कुमार जैसे बेटे दिखे हैं. वह अपने बीमार पिता को पांच घंटे तक खाट की पालकी पर लिटाकर ढोते रहे. उन्होंने दुर्गम रास्तों से 25 किलोमीटर सफर तय कर 22 बार नदियों को पार किया. ये आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने अपने बीमार पिता को अस्पताल तक पहुंचा दिया.

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बगहा. बगहा (Bagaha) के दोन इलाके से श्रवण कुमार (Shravan Kumar) जैसे बेटों की तस्वीर सामने आई है. वह अपने पिता को पांच घंटे तक खाट की पालकी पर लिटाकर ढोते रहे. इस दौरान उन्होंने दुर्गम रास्तों से 25 किलोमीटर सफर तय कर 22 बार नदियों को पार किया. ये आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने पिता को आखिरकार अस्पताल तक पहुंचा दिया.

श्रवण कुमार की कहानी तो अमर है, लेकिन बगहा के इन बेटों ने जो कुछ किया उससे इस दौर में भी पिता के लिए श्रवण कुमार जैसा समर्पण सामने आ गया. ये कहानी बगहा के रामनगर प्रखंड के दोन इलाके की है. पहाडी नदियों के कहर के बीच रास्ते धवस्त हो गये हैं. पुल पुलिया सब कुछ बर्बाद हैं. वहां पहुंचने के साधन भी नहीं हैं. बाढ़ की विभीषिका में अपने आशियाने को बचाने के दौरान गर्दी दोन गांव के भुतही महतो बुरी तरह घायल हो गये. इलाज के लिए इलाके में कोई साधन नहीं था, लिहाजा इंतजार कर गांव से दूर हरनाटांड में इलाज कराने की बेटों ने ठान ली.

पिता को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए बेटे चन्द्रकिशोर ने खाट को पालकी बना दिया. वह परिवार के अन्य सदस्यों के साथ जंगली रास्ते पर पैदल ही निकल पड़े.

22 बार पहाड़ी नदियों को पार कर 25 किलोमीटर का सफर

बगहा के रामनगर प्रखंड के नौरंगिया और बनकटवा के 26 गांव पहाडियों से घिरे हैं. जिसे दोन का इलाका कहा जाता है. यहां पहुंचने के लिए सडकें नहीं हैं. कहीं सड़क हैं तो उसे पहाडी नदी बहा ले गई है. पैदल सफर करना लोगों की मजबूरी. इस इलाके में जाने के लिए पहाड़ी नदी को 22 बार पार करना पडता है. रास्ते में दलदल तो कही जंगल या फिर पहाड़ हैं. ऐसे में बरसात के दिनों में बगहा का यह इलाका टापू बन जाता है.

बेटे चन्द्रकिशोर को मिला परिवार का साथ

22 नदियों को पार कर अस्पताल लाने में बेटे चन्द्रकिशोर महतो के साथ परिवार के सदस्य प्रेम महतो, होमलाल महतो और हरिलाल पटवारी का साथ भी मिला. घर में रखे खाट को एम्बुलेंस की बजाय पालकी बनाई और फिर कंधों के सहारे कठिन सफर को तय कर लिया. बेटे चन्द्रकिशोर के मुताबिक उनके पास पिता को बचाने के लिए इसके अलावा कोई रास्ता नहीं था. बीमार पिता भी अपने बेटे को श्रवण कुमार की तरह देखकर भावुक होते दिखे.

न्यूज 18 की खबर पर दौड़ा प्रशासन

न्यूज़ 18 पर खबर चलने के बाद प्रशासन ने आनन फानन में एक टीम का गठन किया है. रामनगर के अंचलाधिकारी के नेतृत्व में प्रशासन की टीम दोन की दो पंचायतों के 26 गांवों का निरीक्षण करेगी. वहां हुए नुकसान का आंकलन कर राहत देगी. न्यूज़ 18 ने खबर दिखाई थी कि दोन के लोगों को मरीजों को खाट पर लेकर पैदल आना पड़ रहा है. पैदल ही 25 किमी का सफर तय करना पड़ रहा है. खबर चलने के बाद प्रशासन ने सुधि ली है.

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