
चिराग पासवान पांच जुलाई से आशीर्वाद यात्रा हाजीपुर से निकालेंगे. (फाइल फोटो)
LJP Crisis News; पशुपति कुमार पारस ने न्यूज़ 18 से बात करते हुए कहा कि पासवान जी तो इस दुनिया में रहे नहीं. इस यात्रा का नाम श्रद्धांजलि सभा होना चाहिए. लेकिन, हाजीपुर से ही क्यों ?
पटना. लोक जन शक्ति पार्टी (LJP) में चाचा- भतीजे के बीच छिड़ा राजनीतिक विवाद का अंत होता नहीं लग रहा. लोजपा पर वास्तविक दावेदारी की लड़ाई फिलहाल चुनाव आयोग के पास है और यह फैसला अभी लंबित है. लेकिन आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज होता जा रहा है. इसके बीच ही आगामी पांच जुलाई को पार्टी के संस्थापक दिवंगत राम विलास पासवान (Ram vilas paswan) की जयंती मनाने की तैयारी भी दोनों गुटों की ओर से की जा रही है. मिली जानकारी के अनुसार पशुपति कुमार पारस (Pashupati Kumar Paras) जहां पार्टी के प्रदेश कार्यालय में बड़े पैमाने पर जयंती मनाने में लगे हैं तो वहीं चिराग पासवान (Chirag Paswan) उस दिन से पारस के संसदीय क्षेत्र हाजीपुर से आशीर्वाद यात्रा की शुरुआत कर ताकत दिखाएंगे.
पारस गुट के प्रवक्ता श्रवण कुमार अग्रवाल ने बताया कि निधन के बाद राम विलास पासवान की पहली जयंती ऐतिहासिक होगी. इसे पार्टी कार्यालय में ही कोविड नियमों का पालन करते हुए मनाया जाएगा. इसके अलावा राज्यभर में कई जगह पार्टी कार्यकर्ता जयंती कार्यक्रम मनाने में लगे हैं. वहीं दूसरी ओर चिराग पासवान अपने स्वर्गीय पिता राम विलास पासवान की जयंती पर 'आशीर्वाद यात्रा' शुरू करेंगे. यह यात्रा दिवंगत राम विलास पासवान की कर्मभूमि हाजीपुर से शुरू होगी.
हालांकि हाजीपुर चिराग के चाचा पशुपति पारस का संसदीय क्षेत्र भी है. इस सीट से राम विलास कई बार सांसद रह चुके हैं. दावा किया जा रहा है कि यह यात्रा रामविलास पासवान के रिकॉर्ड तोड़ चुनावी आंकड़ों की तरह ऐतिहासिक होगी जो आने वाले समय में बिहार की सियासत को भी एक नई दिशा देगी. वहीं, पशुपति पारस ने चिराग़ पासवान की पांच जुलाई की आशीर्वाद यात्रा पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि आशीर्वाद यात्रा नाम को मैं अस्वीकार करता हूं. किस बात का आशीर्वाद ?
पशुपति कुमार पारस ने न्यूज़ 18 से बात करते हुए कहा कि पासवान जी तो इस दुनिया में रहे नहीं. इस यात्रा का नाम श्रद्धांजलि सभा होना चाहिए. लेकिन, हाजीपुर से ही क्यों? चिराग़ पासवान जमुई से सांसद हैं तो उन्हें जमुई से शुरुआत करनी चाहिए. पारस ने कहा कि चिराग़ हमें क्या चुनौती देंगे? हाजीपुर पासवान जी की कर्मभूमि थी. वहां 42-43 साल से राजनीति में रहे. दो-दो बार गिनीज़ बुक में नाम लिखाए. वे पासवान जी के बेटे हैं इसलिए, उन्हें लगता होगा कि जनता का मोमेंट मेरी तरफ़ आएगा, लेकिन जमीनी सच्चाई कुछ और है.