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LJP का स्थापना दिवस: नीतीश को डैमेज करने के चक्कर में अपना हाथ जला बैठे चिराग! अब ये हैं चुनौतियां

बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान नीतीश कुमार और चिराग पासवान के बीच तल्खी काफी बढ़ गई थी (न्यूज़ 18 ग्राफिक्स)
बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान नीतीश कुमार और चिराग पासवान के बीच तल्खी काफी बढ़ गई थी (न्यूज़ 18 ग्राफिक्स)

सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) की जेडीयू (JDU) को डैमेज करने के इरादे से चुनावी मैदान में उतरी लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के अध्यक्ष चिराग पासवान (Chirag Paswan) की अगुवाई में लोजपा ने महज एक सीट पर ही सफलता पाई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 28, 2020, 9:44 AM IST
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पटना. लोक जनशक्ति पार्टी (Lok Janshakti Party) अपनी स्थापना के 21 वर्ष पूरे कर चुकी है. इसकी स्थापना दिवस के कार्यक्रम के सिलसिले में लोजपा प्रमुख चिराग पासवान  (Chirag Paswan) पटना पहुंच चुके हैं. हालांकि हालिया बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) में पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है, बावजूद एलजेपी का महत्व बिहार की राजनीति में बरकरार है. बता दें कि दलित समुदाय के बीच लोकप्रिय नेता के तौर पर उभरे रामविलास पासवान (Ram Vilas Paswan)  ने लोक जनशक्ति पार्टी की स्थापना वर्ष 2000 में की थी. तब से लेकर पार्टी ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं.

पार्टी की स्थापना के बाद रामविलास पासवान ने धीरे-धीरे पार्टी को मुख्यधारा से जोड़ा और पहली बार 2004 के चार के लोकसभा चुनाव में उतारा. पार्टी ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 4 सीटें जीती तब लोजपा कांग्रेस और राजद के साथ यूपीए गठबंधन का हिस्सा थी. यूपीए की चुनाव में जीत के साथ ही पासवान को गठबंधन सरकार में केमिकल एंड फर्टिलाइजर मिनिस्टर बनाया गया था.

इसके बाद फरवरी 2005 में बिहार में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ लड़ते हुए लोजपा ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और 29 सीटों पर कब्जा जमाया. हालांकि इसी साल अक्टूबर में फिर विधानसभा चुनाव हुए और लोजपा महज 10 सीटों पर ही सिमट गई. तब से लेकर अब तक लोजपा राज्य स्तर पर संघर्ष करती ही नजर आई है. 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का साथ छोड़ना उन्हें महंगा पड़ा और रामविलास खुद तो चुनाव हारे ही एक भी सांसद उनका लोकसभा नहीं पहुंच पाया.



हालांकि वर्ष 2010 में लालू यादव का साथ मिलने से राम विलास पासवान राज्य सभा पहुंचे. पर राज्य में वह अपनी स्थिति मजबूत नहीं कर पाई. लोजपा के विधायकों की संख्या घटकर एक दर्जन से भी कम रह गई. लेकिन 2014 में फिर अपने बेटे चिराग के कहने पर रामविलास पासवान ने पाला बदला और एनडीए गठबंधन में नरेन्द्र मोदी के साथ आए और 6 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल की और एक राज्यसभा सीट भी हासिल की.
हालांकि वर्ष 2015 में एनडीए के तहत 42 सीटों पर लोजपा मैदान में उतरी, जिनमें महज दो पर विजय मिली थी. 2020 के विधानसभा चुनाव का प्रदर्शन काफी लचर रहा है. चिराग पासवान के नेतृत्व में पार्टी महज एक सीट पर ही जीत दर्ज कर पाई जबकि अन्य सभी सीटों पर उसे हार नसीब हुई, चौंकाने वाली बात यह है कि रामविलास पासवान के निधन के बाद बिहार में सहानुभूति फैक्टर का चिराग को कोई फायदा नहीं हुआ और पार्टी ने अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन किया.

सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) की जेडीयू (JDU) को डैमेज करने के इरादे से चुनावी मैदान में उतरी लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के अध्यक्ष चिराग पासवान (Chirag Paswan) की अगुवाई में लोजपा ने महज एक सीट पर ही सफलता पाई है. लोजपा के गठन के बाद से अबतक की उसकी सबसे बड़ी हार मानी जा रही है. लोजपा के 135 उम्मीदवार मैदान में थे और उसने सिर्फ एक सीट जीती है.

गौरतलब है कि यह पहली बार है जब चिराग पासवान ने पिता रामविलास पासवान की अनुपस्थिति में चुनाव लड़ा है. इससे पहले चुनाव की कमान हमेशा रामविलास पासवान के हाथ में ही होती थी. इसलिए यह आंकड़े चिराग के लिए काफी बड़ी चुनौती हैं.

लोक जनशक्ति पार्टी का विभिन्न चुनावों में प्रदर्शन 

वर्ष                    लड़ी    वोट प्रतिशत    सीटें मिलीं
2005 (फरवरी) : 178     12.62           29
2005 (अक्टूबर) : 203    11.10          10
2010                 : 75      6.74            03
2015                : 42       4.80            02
2020                : 135     5.66            01
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