लोजपा MLA ने चिराग को दिखाया ठेंगा, विधानसभा उपाध्यक्ष के लिए JDU उम्मीदवार को दिया वोट

लोजपा विधायक के साथ चिराग पासवान की फाइल फोटो

लोजपा विधायक के साथ चिराग पासवान की फाइल फोटो

Bihar Politics: बिहार में बुधवार को विधानसभा के डिप्टी स्पीकर के लिए चुनाव हुए थे. इस चुनाव में जेडीयू के महेश्वर हजारी विजयी हुए हैं.

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पटना. बिहार में एनडीए (NDA) से अलग चल रहे लोजपा के विधायक ने जेडीयू (JDU) उम्मीदवार के लिए वोट कर दिया है जिसके बाद से बिहार की सियासत फिर से गरमा गई है. दरअसल जदयू के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री महेश्वर हजारी (Maheshwar Hajari) विधानसभा के उपाध्यक्ष चुने गये हैं. विधानसभा में बुधवार को हुई वोटिंग में उनके पक्ष में 124 सदस्यों ने वोट किया. महेश्वर हज़ारी को भाजपा जदयू, हम और वीआईपी के विधायकों के साथ साथ मटिहानी जीत कर आए लोजपा के एकलौते विधायक राजकुमार सिंह ने भी वोट किया जो चौंकाने वाला था.

जदयू और नीतीश कुमार के धुर विरोधी चिराग पासवान की पार्टी लोजपा के विधायक का जेडीयू के लिए वोट करना कई संकेत दे गया, हालांकि इसके बाद आनन फानन में लोजपा ने अपने विधायक से कारण भी पूछा है. पार्टी के प्रधान महासचिव अब्दुल खालिक ने राजकुमार सिंह को पार्टी से बिना परामर्श किये जदयू उम्मीदवार को वोट करने पर जल्द जवाब देने को कहा है.

कुछ दिन पहले लोजपा विधायक राजकुमार सिंह ने बिहार सरकार के मंत्री और सूबे के भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी से मुलाक़ात की थी और उस दौरान मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने नीतीश कुमार की खूब तारिफ़ की थी जिसके बाद से उनके जदयू के साथ नज़दीकियों के क़यास लगाए जा रहे थे और अब जब उन्होंने पार्टी लाईन से हटकर सदन में उपाध्यक्ष पद के जेडीयू उम्मीदवार महेश्वर हज़ारी को वोट किया है तो ये साफ़ हो गया है की अब लोजपा विधायक का अगला कदम क्या होगा.

विधानसभा उपाध्यक्ष के निर्वाचन में सत्ता पक्ष के तीन सदस्यों ने भाग नहीं लिया. इनमें श्रेयसी सिंह, सहकारिता मंत्री सुभाष सिंह और एक अन्य शामिल हैं. इधर विधानसभा उपाध्यक्ष के लिए मतदान शुरू होते ही सदन से छह मंत्री स्वत: बाहर चले गये. इनमें भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी, खान एवं भूतत्व मंत्री जनक राम, पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री मुकेश सहनी, पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी, जल संसाधन मंत्री संजय झा और लघु जल संसाधन व एससी-एसटी मंत्री संतोष कुमार सुमन शामिल थे. ये सभी मंत्री विधान परिषद के सदस्य होने के कारण विधानसभा उपाध्यक्ष के निर्वाचन में भाग नहीं ले सकते थे.
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