पिता को गुरुग्राम से साइकिल पर दरभंगा लाई थी ज्योति, अब पढ़ाई का खर्च उठाएगी LJP
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पिता को गुरुग्राम से साइकिल पर दरभंगा लाई थी ज्योति, अब पढ़ाई का खर्च उठाएगी LJP
पिता को साइकिल पर बिठाकर गुड़गांव से दरभंगा लाने वाली ज्योति कुमारी.

लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान ज्योति ने अपनी साइकिल पर पिता को बिठाकर हरियाणा के गुरुग्राम से बिहार के दरभंगा तक 1200 की दूरी सात दिन में तय की.

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पटना. अपने पिता को साइकल पर बिठाकर गुरुग्राम से दरभंगा अपने घर पहुंची 15 साल की ज्योति लगातार सुर्खियों में हैं. दरअसल, लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान ज्योति ने अपनी साइकिल पर पिता को बिठाकर हरियाणा के गुरुग्राम से बिहार के दरभंगा तक 1200 किलोमीटर की दूरी सात दिन में तय की. अब ज्योति की मदद के लिए चारो तरफ से हाथ उठने लगे हैं.

ज्योति की मदद के लिए लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) सामने आई है. पार्टी ने ज्योति की पढ़ाई का खर्च उठाने की घोषणा की है. इससे पहले लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष और सांसद चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने ज्योति को 51 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की थी.





ज्योति को मिला भारतीय साइकिलिंग फेडरेशन का भी ऑफर
ज्योति के इस जज्बे की सराहना भारतीय साइकिलिंग फेडरेशन ने भी की है. दरअसल फेडरेशन ज्योति के इस कारनामे से आश्चर्यचकित है. भारतीय साइकिलिंग फेडरेशन ने ज्योति को अगले महीने ट्रायल के लिए दिल्ली बुलाया है. फेडरेशन के चेयरमैन ओंकार सिंह ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि अगर आठवीं क्लास की छात्रा ज्योति यह ट्रायल पास कर लेती है, तो आईजीआई सपोर्ट कॉम्प्लेक्स में स्थित स्टेट-ऑफ-द-आर्ट नेशनल साइकिलिंग एकेडमी में ट्रेनी के रूप में चयनित हो जाएगी. गौरतलब है कि यह एकेडमी स्पोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अधीन आता है और यह एशिया की सबसे विकसित साइकिल एकेडमी है. यह खेलों के अंतराष्ट्रीय संस्था यूसीआई से भी मान्यता प्राप्त संस्था है.

गुरुग्राम से पिता को साइकल से बिहार ले जाकर ज्योति ने इवांका ट्रंप को बनाया दीवाना
एक ओर ज्योति के इस काम के लिए उसको सोशल मीडिया पर लोगों की तारीफ तो  मिल ही रही है, अब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप ने भी ट्वीट कर ज्योति की तारीफ की है. इवांका ने अपने ट्वीट में लिखा,  15 साल की ज्योति कुमारी ने अपने जख्मी पिता को साइकिल से सात दिनों में 1,200 किमी दूरी तय करके अपने गांव ले गई. सहनशक्ति और प्यार की इस वीरगाथा ने भारतीय लोगों और साइकलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है.


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First published: May 24, 2020, 9:16 PM IST
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