Lockdown: बिहार में बिजली की खपत 5500 मेगावॉट हुई, प्रति व्यक्ति भी बढ़ी
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Lockdown: बिहार में बिजली की खपत 5500 मेगावॉट हुई, प्रति व्यक्ति भी बढ़ी
एमपी में बिजली कर्मचारियों की अटेंडेंस सेल्फी के ज़रिए लगायी जाएगी (प्रतीकात्मक तस्वीर)

बिहार में सभी उधोग, धंधे और कृषि का काम पूरी तरह से बंद होने के बावजूद बिजली की खपत (Consumption of Electricity) का आंकड़ा प्रति महीने 5500 मेगावॉट तक पहुंच गया.

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पटना. कोरोना वायरस (Coronavirus) के संक्रमण के चलते लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान बिहार में बिजली विभाग (Electricity Department of Bihar) ने रिकॉर्ड तोड़ा है. राज्य में सभी उधोग, धंधे और कृषि का काम पूरी तरह से बंद होने के बावजूद बिजली की खपत का आंकड़ा प्रति महीने 5500 मेगावॉट तक पहुंच गया. लॉकडाउन खत्म होने के बाद जब एक जून कल करखाने चालू होंगे तो जाहिर सी बात है कि बिजली की खपत और बढ़ जाएगी. इससे बिहार के बिजली विभाग में उत्साह का माहौल है.

राज्य में बढ़ी प्रति व्यक्ति बिजली की खपत

किसी राज्य का आर्थिक विकास तभी सम्भव है जब वहां भरपूर मात्रा में बिजली पैदा होती हो. बिहार बिजली के क्षेत्र में लगातार बेहतर मुकाम हासिल करता जा रहा है. साल 2012-13 में बिहार में प्रति व्यक्ति बिजली खपत मात्र 145 यूनिट थी जो आज की तारीख में बढ़कर 258 यूनिट हो गई है. लॉकडाउन में भी बिजली खपत में बिहार पिछले साल का रिकॉर्ड तोड़ने की मुकाम पर पहुंचने को है.



वर्क फ्रॉम होम के चलते भी बढ़ी है खपत



लॉकडाउन के इस दौर में शुरू के कुछ दिनों में बिजली की खपत बहुत ज्यादा नहीं थी. लॉकडाउन शुरू होने के समय बिजली की खपत 1600 से 1700 मेगावाट थी. भीषण गर्मी के इस मौसम में यह डिमांड 5400—5500 मेगावाट पहुंच गई है. यानी बिहार में अब बिजली की मांग और खपत में तेजी से बढ़ोतरी होने लगी है. बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि घरेलू खपत के अलावा विभिन्न रॉज्यो में काम करनेवाले लोग इनदिनों बिहार आए हुए हैं, जिनमें कि आईटी प्रोफेशनल्स भी हैं. जाहिर सी बात है कि वर्क फ्रॉम होम होने से भी बिजली की खपत बढ़ी है.

बिजली उत्पादन में होगी बढ़ोतरी

हालांकि यह देखने वाली बात है कि बिहार में हर घर बिजली पहुंचने के बाद से ही इसकी मांग में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. एक अनुमान के अनुसार वर्ष 2020-21 में 2697 करोड़ यूनिट तो 2021-22 में 3230 करोड़ यूनिट बिजली खपत होने का अनुमान है. बिजली देने के लिए सरकार ने ना केवल कोयला से बिजली उत्पादन पर काम किया है बल्कि पनबिजली सौर ऊर्जा पर जोर दिया जा रहा है. अगले कुछ सालों में 5733 मेगावॉट बिजली कोयले से उत्पादित होगी जबकि पनबिजली 729 मेगावाट, सौर ऊर्जा 1338 मेगावाट तो पवन ऊर्जा 1558 मेगावाट बिजली होगी.

हर महीने 5900 मेगावॉट तक हो सकती है खपत

लॉकडाउन में अभी उद्योग धंधे ठप है और कृषि कार्य बाधित हैं तब भी बिजली खपत 5400 से 5500 मेगावॉट तक पहुंचना एक बड़ी उपलब्धि है. लेकिन अगर इन दोनों क्षेत्रों में काम शुरू हो जाए तो खपत का यह आंकड़ा 5900 मेगावॉट का रिकॉर्ड टूटना तय है. बिजली विभाग के एमडी संजीवन सिन्हा भी मानते हैं कि अगर रिकॉर्ड टूटता है तो यह कोरोनाबंदी में बड़ी उपलब्धि होगी.

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