लोकसभा चुनाव: चर्चा में आई चाय की यह दुकान, लालू-नीतीश से है खास कनेक्शन!

बिहार में भी सत्ता के गलियारे में एक चाय की दुकान की चर्चा इन दिनों जोरों पर है. यह चाय की दुकान भले ही मौजूदा राजनीति की धुरी ना हो लेकिन अतीत के सुनहरे पन्ने को अपने में समेटे यह चाय की दुकान आज भी कौतूहल का विषय है.

News18 Bihar
Updated: May 15, 2019, 9:10 PM IST
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लोकसभा चुनाव में देश भर में चाय की चर्चा जोरों पर है. खासकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चाय की चर्चा के केंद्र बिंदु रहे हैं. लेकिन बिहार में भी सत्ता के गलियारे में एक चाय की दुकान की चर्चा इन दिनों जोरों पर है. यह चाय की दुकान भले ही मौजूदा राजनीति की धुरी ना हो लेकिन अतीत के सुनहरे पन्ने को अपने में समेटे यह चाय की दुकान आज भी कौतूहल का विषय है. और भला हो भी क्यों न, जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, लालू प्रसाद यादव, सुशील मोदी से लेकर शिवानंद तिवारी जैसे बिहार की राजनीति के मौजूदा दिग्गज चाय की चुस्कियों के बीच भावी राजनीति की दशा और दिशा तय करने में मशगुल रहा करते थे.

पटना विश्वविद्यालय के दरभंगा हाउस में चाय की यह दुकान भले ही एक नजर में सामान्य और छोटी सी दुकान लगे. लेकिन अगर कोई यहां थोड़ी देर रुक जाए तो यह दुकान बरबस ही उसे अपनी ओर खींचने लगेगी. यह छोटी सी दुकान 1954 से ही अस्तित्व में है.



दुकान मालिक राम नारायण उम्र के नौ दशक पूरा करने के करीब हैं. पटना विश्वविद्यालय के गौरवशाली इतिहास की तरह राम नारायण की दुकान का इतिहास भी स्वर्णिम रहा है. करीब 90 साल के राम नारायण के हाथों का कमाल कहें या फिर कुछ और, उनकी चाय पीकर बिहार की सत्ता में दो नेता मुख्यमंत्री के पद पर काबिज हो गए तो कुछ उपमुख्यमंत्री और मंत्री बन गए.

चाय बनाते दुकान के मालिक राम नारायण


जी हां, बिहार के शासन की बागडोर संभालने वाले सीएम नीतीश कुमार और लालू यादव छात्रसंघ की राजनीति का केन्द्र यही चाय की दुकान हुआ करती थी. टीम में सुशील मोदी से लेकर अश्विन चौबे और शिवानंद तिवारी तक भी शामिल थे. नौकरशाहों के नामों की लंबी फेहरिश्त भी इस दुकान के साथ जुड़ी है.

दुकान मालिक राम नारायण का उस दौर को याद करते हुए बताया हैं, '1973 में पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में छात्र लालू, नीतीश, सुशील मोदी, अश्वनी कुमार चौबे कई लोगों की जमघट दुकान पर लगती थी. ये लोग चाय की चुस्की के साथ चुनाव में जीत के लिए रणनीति बनाते थे. लालू यादव चुनाव जीतने के बाद पटना विवि छात्र संघ के अध्यक्ष तो सुशील कुमार मोदी महासचिव बनाए गए. तब समाजवादी युवजन सभा और विद्यार्थी परिषद ने साझा चुनाव लड़ा था.


पटना विश्वविद्यालय से जुड़े लोग छात्र से आज शिक्षक बन गए लेकिन इस दुकान से एक बार बना रिश्ता आज भी बखूबी निभा रहे हैं. नौ संतानो के पिता राम नारायण की माली हालत आज भी अच्छी नहीं है लेकिन कभी किसी के सामने हाथ नहीं फैलाए. झूठे ग्लास धोना, लोगों को चाय पिलाना और उसी में हंसी खुशी जिंदगी गुजारना रामनारायण की जिंदगी का फलसफा है.(रिपोर्ट- संजय कुमार)

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