पाटलिपुत्र: रामकृपाल को मोदी नाम का सहारा तो मीसा को पिता लालू के नाम पर आस

पाटलिपुत्र की यह सीट यादव बहुल सीट मानी जाती है, क्योंकि इस सीट पर 24 प्रतिशत यादव वोटर हैं. इस यादव वोट बैंक में सेंघ लगाने के लिए दोनों ही गठबंधनों की ओर से उम्मीदवार यादव हैं.

Deepak Priyadarshi | News18 Bihar
Updated: May 15, 2019, 9:55 PM IST
पाटलिपुत्र: रामकृपाल को मोदी नाम का सहारा तो मीसा को पिता लालू के नाम पर आस
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Deepak Priyadarshi
Deepak Priyadarshi | News18 Bihar
Updated: May 15, 2019, 9:55 PM IST
19 मई को लोकसभा चरण के सातवें और अंतिम चरण में बिहार की जिन आठ सीटों पर चुनाव होंगे, उसमें एक बेहद दिलचस्प लड़ाई पाटलिपुत्र सीट पर है. यहां मुकाबला एक जमाने में चाचा-भतीजी रहे रामकृपाल यादव और मीसा भारती के बीच है. 2014 के चुनाव में भी दोनों चाचा भतीजी आमने सामने थे, जिसमें चाचा रामकृपाल यादव जीते थे. इस बार फिर दोनों एक दूसरे के सामने हैं.

एक ओर रामकृपाल यादव इस बार अपने काम से अधिक मोदी नाम के भरोसे हैं, तो वहीं मीसा भारती पिता लालू प्रसाद यादव के नाम पर वोटरों के सामने झोली फैलाकर वोट मांग रही हैं, क्योंकि दोनों भाई तेजस्वी तेजप्रताप और मां राबड़ी देवी के अलावा कोई बड़ा नाम प्रचार के लिए नहीं आया. लेकिन रामकृपाल यादव के पक्ष में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चुनावी सभाओं ने पाटलिपुत्र का समीकरण बदलने की कोशिश की है.



19 तारीख को पटना की दोनों ही सीटें हाईप्रोफाइल हैं. पटना साहिब की सीट तो हाईप्रोफाइल है ही. पाटलिपुत्र की सीट भी कम हॉट और हाईप्रोफाइल नहीं है. बीजेपी ने रामकृपाल यादव पर फिर से भरोसा जताया है तो आरजेडी ने भी लालू राबड़ी की सबसे बड़ी संतान मीसा भारती पर भी फिर से भरोसा किया है.

चुनाव से पहले पाटलिपुत्र की सीट इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि आरजेडी की ओर से इस सीट पर मीसा भारती को उम्मीदवार बनाने को लेकर आरजेडी में हाईवोल्टेज ड्रामा हुआ था. भाई तेजप्रताप यादव ने तो उस वक्त अपनी ओर से मीसा भारती की उम्मीदवारी पाटलिपुत्र से घोषित कर दी थी, जब टिकट बंटवारे की प्रक्रिया शुरू भी नहीं हुई थी. पारिवारिक दबाव में भाई वीरेन्द्र की उम्मीदवारी को दरकिनार करते हुए आरजेडी ने मीसा भारती को अपना उम्मीदवार बना दिया.

पाटलिपुत्र की सीट पर अभी तक लालू परिवार का ही कोई सदस्य लड़ता रहा है. लेकिन अभी तक यह सीट लालू परिवार के लिए अनलकी ही साबित हुई है. 2008 के परिसीमन के बाद से इस सीट पर अबतक दो चुनाव हुए. आरजेडी दोनों ही चुनाव हारी. 2009 में खुद लालू प्रसाद यादव अपने पुराने सहयोगी और जेडीयू से उम्मीदवार रंजन यादव से हार गए तो 2014 में कभी लालू प्रसाद यादव के बेहद खास रहे चाचा रामकृपाल यादव से भतीजी मीसा भारती को भी हार का सामना करना पड़ा. लालू परिवार के लिए यह सीट फिलहाल तीसरा प्रयास है. आरजेडी से अलग होने के बाद बीजेपी में आए रामकृपाल यादव 2014 के बाद दूसरी बार इस सीट पर अपनी जीत दोहराना चाहते हैं.


पाटलिपुत्र की यह सीट यादव बहुल सीट मानी जाती है, क्योंकि इस सीट पर 24 प्रतिशत यादव वोटर हैं. इस यादव वोट बैंक में सेंघ लगाने के लिए दोनों ही गठबंधनों की ओर से उम्मीदवार यादव हैं. इसके अलावा मुस्लिम 8 प्रतिशत, भूमिहार 10 प्रतिशत, कुर्मी 7 प्रतिशत और बाकी अन्य जातियों को वोटर 23 प्रतिशत के आसपास हैं. ऐसे में इन वोट बैंक को अपने पक्ष में करने के लिए दोनों पत्र अपने अपने तरीकों से वोटरों को लुभाने में लगे हैं.

रामकृपाल यादव को पिछले पांच वर्षों में अपने काम से अधिक मोदी नाम पर भरोसा है. अमित शाह और पीएम मोदी का इस लोकसभा क्षेत्र में चुनावी सभा होने से रामकृपाल यादव का उत्साह चरम पर है. वहीं मीसा भारती के लिए फिलहाल कोई बड़ा नाम या चेहरा वोट मांगने नहीं आया. अलबत्ता इस बार दो छोर पर खड़े दोनों भाई तेजप्रताप और तेजस्वी अपनी बहन के लिए एक साथ जरूर आए. मां राबड़ी देवी भी इमोशनल तरीके से बेटी के लिए वोट मांग रही हैं. वहीं खुद मीसा भारती भी अपने पिता लालू प्रसाद यादव के नाम पर वोट मांग रही हैं.दोनों ही गठबंधनों के लिए यह सीट प्रतिष्ठा का प्रश्न है क्योंकि पिछली बार की तरह इस बार भी इस सीट को जीतकर बीजेपी इसे अपनी परंपरागत सीट में तब्दील करना चाहेगी तो आरजेडी के लिए यह सीट जीतना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि इसके परिणाम चाहे जीत में हो या हार में पार्टी के साथ साथ पूरे परिवार के साथ भी जोड़ी जाएगी.

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