Bihar Lok Sabha Election Result 2019: क्या नेता के रुप में फेल साबित हो गए तेजस्वी?

लोकसभा चुनाव 2019 मेंआरजेडी एक सीट भी नहीं जीत सकी. महागठबंधन उम्मीदवारों को तो दूर, बहन मीसा भारती को भी जीत नहीं दिला सके तेजस्वी यादव.

Deepak Priyadarshi | News18 Bihar
Updated: May 24, 2019, 12:33 AM IST
Bihar Lok Sabha Election Result 2019: क्या नेता के रुप में फेल साबित हो गए तेजस्वी?
तेजस्वी यादव (फाइल फोटो)
Deepak Priyadarshi
Deepak Priyadarshi | News18 Bihar
Updated: May 24, 2019, 12:33 AM IST
2019 के लोकसभा चुनाव का परिणाम हर किसी को सन्न कर गया. जिस तरह से पूरे देश के परिणाम एनडीए के पक्ष में आए, तमाम राजनीतिक विश्लेषक और चिंतक यह सोचते रह गए कि यह मोदी लहर थी, आंधी थी या सुनामी. कुछ ऐसा ही परिणाम बिहार में भी आया. 40 सीटों में 39 सीटें एनडीए को मिली. सिर्फ एक सीट महागठबंधन के खाते में गई, वह किशनगंज की सीट रही. जो कांग्रेस के खाते में गई. महागठबंधन की अगुवाई करने वाली आरजेडी को एक सीट तक मयस्सर नहीं हुई. लालू प्रसाद यादव और उनकी पार्टी आरजेडी की राजनीति में यह पहला मौका बन गया जब आरजेडी का एक भी सांसद लोकसभा में नहीं होगा.

महागठबंदन के सबसे बडे नेता बने तेजस्वी यादव अपनी बडी बहन मीसा भारती को जीत नहीं दिला सके. अब सवाल यह उठना लाजिमी है कि क्या नेता के रुप में तेजस्वी यादव फेल हो गए? बिहार में लोकसभा के जिस तरह परिणाम आए, शायद इसकी इतनी उम्मीद तो खुद बीजेपी और सहयोगी पार्टियों ने भी नहीं की होगी. 40 में से 39 सीट...सिर्फ एक सीट पर कांग्रेस जीत सकी.



लेकिन, जिस आरजेडी उसके नेता तेजस्वी यादव के चेहरे पर महागठबंधन के दलों में चुनाव में नरेन्द्र मोदी को चुनौती दी थी. परिणाम ने शायद इस चुनौती को बुरी तरह नकार दिया. अपने सहयोगियों को जिताना तो दूर खुद तेजस्वी अपने उम्मीदवारों तक को भी नहीं जिता पाए. मीसा भारती जो उनकी बडी बहन हैं और पाटलिपुत्र से उम्मीदवार थी, वह भी रामकृपाल यादव से हार गयी. इस हार के बाद कई तरह के सवाल पार्टी और लालू राबडी परिवार के भीतर उठेंगे कि अपनी बडी बेटी मीसा भारती और बडे बेटे तेजप्रताप यादव के नजरअंदाज कर लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव को अपना उत्तराधिकार सौंपा था, क्या तेजस्वी उस पर खरे नहीं उतर पाए? क्या चुनाव के दौरान तेजस्वी यादव के भीतर अंहकार आ गया और महागठबंधन की सारी रणनीति अपने मुताबिक की? यहां तक कि अपने सहयोगियों को भी नजरअंदाज किया. खुद उनके परिवार में उनपर मनमाना करने के आरोप लगे.

पूरे चुनाव अभियान में तेजस्वी के बडे भाई तेजप्रताप यादव ने कई मोर्चों पर उनका विरोध किया. टिकट बंटवारे से लेकर पार्टी के नेताओं पर भी कई बार सवाल खडे किये. यहां तक कि उन्हें अपने साथ चुनाव प्रचार में साथ ले जाने के लिए गिडगिडाते रहे. लेकिन तेजस्वी ने हर बार अपने बडे भाई को नजरअंदाज किया. ऐसे में जाहिर है कि चुनाव के रिजल्ट में आरजेडी की दुर्दशा पर तेजप्रताप चुप नहीं रहेंगे.

मीसा भारती को हार पचाना मुश्किल
वहीं, आरजेडी के उत्तराधिकार पाने की इच्छा पालने वाली मीसा भारती के लिए भी पार्टी की हार को पचाना मुश्किल होगा. अब तक तो मीसा भारती ने चुप्पी साधी लेकिन यह चुप्पी कब तक रहेगी, कहना मुश्किल है. एक ओर पहले से ही पूरा परिवार मुश्किल में है. ऐसे में इस हार ने पूरे परिवार को और मुश्किलों में डाल दिया है. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि तेजस्वी के लिए बडा नेता बनने के लिए यह एक बडा सुनहरा अलसर था लेकिन तेजस्वी ने इसे गंवा दिया.

रामकृपाल यादव की बात होगी सच?
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आरजेडी की इस हार ने लालू प्रसाद यादव के विरोधियों को और खुलकर हमला करने का मौका दे दिया है. मीसा भारती को हराने वाले रामकृपाल यादव ने तो यहां तक कह दिया कि बहुत जल्द आरजेडी नाम वाली पार्टी खत्म हो जाएगी. अभी आने वाले दिनों में इस तरह के और बयान आएंगे. बिहार में अब अगला लक्ष्य अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव है. इस हार से आरजेडी के कार्यकर्ताओं का मनोबल पर बुरा असर पड़ना लाजिमी है. ऐसे में परिवार और पार्टी को बचाना तेजस्वी के लिए बडी चुनौती होगी.

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