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बिहार: मोदी-नीतीश को लेकर मतदाताओं ने किया बड़ा इशारा

फाइल फोटो

फाइल फोटो

यह जनादेश नीतीश कुमार की एनडीए में वापसी पर भी मुहर मानी जा रही है. जाहिर है जनता का मिजाज लालू-नीतीश की बजाय नरेन्द्र मोदी-नीतीश कुमार के स्वाभाविक गठजोड़ की तस्दीक करती है.

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बिहार में इसबार एनडीए ने 40 लोकसभा सीटों में 39 पर जीत दर्ज की है. एनडीए को प्रदेश में इतना बड़ा समर्थन मिलेगा इसकी सीधी वजह समझने में बीजेपी और जेडीयू के रणनीतिकार भले ही माथापच्ची कर रहे हों, लेकिन जनता ने अपना स्पष्ट मत देकर यह बता दिया कि वह बिहार में नरेन्द्र मोदी और नीतीश कुमार की जोड़ी को ही पसंद करती है. यह जनादेश उस बात का जवाब भी माना जा रहा है जिसमें तेजस्वी यादव अक्सर नीतीश कुमार पर जनादेश चोरी करने का इलजाम लगाते थे.

वर्ष 2014 लोकसभा चुनाव के बाद जब नीतीश कुमार और लालू यादव ने एक साथ गोलबंदी की और 2015 के विधानसभा चुनाव में जब बीजेपी को मात दी तो लगा कि यह बेहद कारगर जोड़ी है. हालांकि वक्त बीतने के साथ ही इस गठबंधन की गांठें भी नजर आने लगीं और नीतीश ने वह गांठ एक झटके में खोल दिया.

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2017 में फिर से एनडीए में लौटने के अपने फैसले का बचाव करते हुए नीतीश ने बार-बार यही दलील दी कि जेडीयू 17 सालों तक बीजेपी के साथ रही है. इस बार के चुनाव में  नीतीश कुमार ने यह बात बार-बार कही कि अब घर-घर में बिजली है इसलिए लालटेन की जरूरत नहीं है.

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पूरे चुनाव प्रचार के दौरान सीएम नीतीश कुमार ने जिस अंदाज में लालू-राबड़ी शासन के दौर पर कटाक्ष किया वह कुछ-कुछ 2005 से पहले वाला अंदाज था. इस दौर में लालू-राबड़ी शासन से बिहार की जनता त्रस्त थी और पटना हाईकोर्ट ने भी इसे जंगलराज कहा था.

इस बार के पूरे चुनाव में जिस तरीके से नीतीश कुमार ने पीएम मोदी के नाम के सहारे वोट मांगे इससे भी यह बात साबित हुई कि नीतीश कुमार बीजेपी और पीएम मोदी के साथ अधिक सहज हैं. पीएम मोदी भी जब नीतीश कुमार का नाम लेते हैं तो सम्मान के साथ उन्हें हमेशा अपना मित्र कहकर बुलाते हैं.

जबकि दूसरी तरफ लालू यादव और उनके परिवार ने  2015 के नवंबर में नीतीश के सीएम बनने के बाद बार-बार यही कहा कि उन्होंने नीतीश को सीएम बनाया है. जाहिर है सीएम नीतीश इस अपमान को बर्दास्त नहीं कर पा रहे थे. जबकि बीजेपी में उन्हें ऐसी बातों के जरिये कभी भी तंज नहीं कसा गया.

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इतना ही नहीं बीजेपी ने नीतीश कुमार का सम्मान करते हुए अपनी पांच सिटिंग लोकसभा सीट भी जेडीयू को दे दी और दोनों पार्टियां 17-17 सीटों की बराबरी पर लड़ीं. ऐसे में नीतीश कुमार ने भी बढ़-चढ़कर बीजेपी के प्रत्याशियों के लिए कई सभाएं कीं.

सीएम नीतीश बीजेपी के साथ कितने सहज हैं इसका पता इस बात से भी लगता है कि उन्होंने बेगूसराय में गिरिराज सिंह के लिए स्वयं चार सभाएं कीं. उनके साथ होने का परिणाम ही है कि गिरिराज सिंह ने अपने प्रतिद्वंद्वी को चार लाख 22 हजार मतों से मात दे दी.

बीजेपी-जेडीयू के स्वाभाविक गठजोड़ की पुष्टि इस बात से भी होती है कि एनडीए के प्रत्याशियों के जीत का औसत अंतर निकालें तो यह 2.19 लाख वोटों का होता है. यही नहीं 34 प्रत्याशियों ने तो एक लाख से अधिक मतों से जीत हासिल की है.

यह जनादेश नीतीश कुमार की एनडीए में वापसी पर भी मुहर मानी जा रही है. जाहिर है जनता का मिजाज लालू-नीतीश की बजाय नरेन्द्र मोदी-नीतीश कुमार के स्वाभाविक गठजोड़ की तस्दीक करती है.

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