29 मई तक का इंतजार कीजिए, दिखेंगे आरजेडी की करारी हार के साइड इफेक्ट्स

लोकसभा चुनाव 2019 में बिहार की जनता ने पहली बार एनडीए को उम्मीद से कहीं ज्यादा सीटें देकर मालामाल कर दिया. वहीं 1997 में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के गठन के बाद पहली बार ऐसा हुआ जब पार्टी की इतनी दुर्दशा हुई.

Ravishankar Singh | News18Hindi
Updated: May 25, 2019, 9:45 PM IST
29 मई तक का इंतजार कीजिए, दिखेंगे आरजेडी की करारी हार के साइड इफेक्ट्स
लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की फाइल फोटो[
Ravishankar Singh
Ravishankar Singh | News18Hindi
Updated: May 25, 2019, 9:45 PM IST
लोकसभा चुनाव 2019 में बिहार की जनता ने पहली बार एनडीए को उम्मीद से कहीं ज्यादा सीटें देकर मालामाल कर दिया. 1997 में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के गठन के बाद पहली बार ऐसा हुआ जब पार्टी की इतनी दुर्दशा हुई. पार्टी को इससे बड़ा झटका पहले कभी नहीं लगा था. साल 2014 में मोदी लहर में भी पार्टी ने 4 सीटें जीतने में कामयाबी हासिल की थी, लेकिन इस बार तो पार्टी की सूपड़ा ही साफ हो गया.

आरजेडी के लिए यह चुनाव बुरे सपने की तरह रहा. बिहार में आरजेडी ने जिस जातिगत समीकरण को साधने के लिए महागठबंधन बनाया था, उस महागठबंधन की बिहार में एक न चली. पूरे बिहार में मोदी लहर में महागठबंधन के जो उद्देश्य थे वो बिखर गए. बिहार की 40 सीटों में से 39 सीटें जीत कर एनडीए ने अब तक की सबसे बड़ी जीत हासिल की. कांग्रेस ने किशनगंज सीट जीत कर महागठबंधन को सूपड़ा साफ होने से बचा लिया.




बता दें कि बिहार में 15 सालों तक राज करने वाली आरजेडी इस लोकसभा चुनाव में एक सीट के लिए तरस गई. बिहार में एनडीए की ऐसी आंधी चली कि महागठबंधन का पूरा कुनबा ही उड़ गया. 1997 में आरजेडी का गठन हुआ था, जब जनता दल से अलग होकर राष्ट्रीय जनता दल बना था. लालू प्रसाद यादव ने इस पार्टी को 15 सालों तक बिहार की सत्ता के शीर्ष पर रखा, लेकिन अपने गठन के बाद पहली बार आरजेडी अपने सबसे खराब दौर से गुजर रही है. पार्टी के गठन के बाद पहली बार ऐसा समय आया है, जब आरजेडी लोकसभा की एक भी सीट नहीं जीत पाई.

आरजेडी को करीब से जानने वाले एक पत्रकार न्यूज 18 हिंदी से बातचीत में कहते हैं, 'आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव चारा घोटाले में रांची जेल में बंद हैं. यह पहला लोकसभा चुनाव है जो लालू प्रसाद यादव की अनुपस्थिति में लड़ा गया. ऐसे में लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे तेजस्वी यादव पर बड़ी जिम्मेदारी थी कि वह पार्टी को आगे लेकर जाएं, लेकिन मिसमैनेजमेंट और गलत उम्मीदवारों के चयन के कारण तेजस्वी ने पार्टी की लुटिया डुबो दी. तेजस्वी यादव अपनी जिम्मेदारी पर खरे नहीं उतरे. ऐसे में एक बार फिर से लालू प्रसाद यादव के परिवार में उत्तराधिकारी को लेकर घमासान छिड़ सकता है. इस लोकसभा चुनाव में तेजस्वी यादव का बड़बोलापन और गलत लोगों के मार्गदर्शन ने पार्टी का बेड़ा गर्क कर दिया.'

फाइल फोटो


आरजेडी के एक बड़े नेता, जो इस बार लोकसभा चुनाव में टिकट के दावेदार थे, न्यूज-18 हिंदी के साथ बातचीत में कहते हैं, 'देखिए हम लोग लालू प्रसाद यादव के सिपाही हैं और रहेंगे. लेकिन, जुम्मा-जुम्मा चार दिन जिसको पार्टी में आए हुए हुआ है वह व्यक्ति पार्टी को लेकर बड़ा फैसला ले रहा है. जिस पार्टी की औकात एक सीट नहीं देने की थी उसको चार-चार सीट दे दी गई. सालों से पार्टी के लिए खून-पसीना बहाने वाले हमारे जैसे सैकड़ों कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर हेलीकॉप्टर से उम्मीदवार उतार दिया. पार्टी के कई सीनियर्स नेताओं की राय को भी दरकिनार कर दिया गया. अब समय आ गया है कि हमारे जैसे कई लोग लालू जी से मिलकर उस नेता के बारे में शिकायत करेंगे.'
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बता दें कि आरजेडी की बड़ी हार पर सीनियर नेता मंथन करने जा रहे हैं. ऐसी भी संभावना व्यक्त की जा रही है कि इस बैठक में महागठबंधन के घटक दल के नेताओं की उपस्थिति भी रहेगी. वहीं 29 मई को राजद विधानमंडल दल के सदस्यों की बैठक होगी.

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