रविशंकर प्रसाद ने 'शत्रु' को किया 'खामोश', कायस्थ वोटरों ने बिहारी बाबू से किया किनारा

बिहारी बाबू पहले बीजेपी में ही थे, लेकिन वे लगातार पीएम मोदी की आलोचना कर रहे थे. यहां तक कि उन्होंने विरोध में बीजेपी छोड़ कांग्रेस ज्वाइन कर लिया था.

Vijay jha | News18 Bihar
Updated: May 23, 2019, 9:54 PM IST
रविशंकर प्रसाद ने 'शत्रु' को किया 'खामोश', कायस्थ वोटरों ने बिहारी बाबू से किया किनारा
फाइल फोटो
Vijay jha | News18 Bihar
Updated: May 23, 2019, 9:54 PM IST
बिहार की हाईप्रोफाइल सीट में पटना साहिब भी है. यहां बीजेपी के रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस के शत्रुघ्न सिन्हा उर्फ बिहारी बाबू पर निर्णायक बढ़त बना ली है और वे जीत की दहलीज पर खड़े हैं. अंतिम सूचना मिलने तक वे करीब दो लाख 84 हजार वोटों से आगे चल रहे हैं.

बता दें कि  पटना साहिब सीट पर 19 मई को आखिरी चरण में वोट डाले गए थे. यहां कुल 43.10 फीसदी वोटिंग दर्ज हुई थी. इस बार यहां 18 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे. बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद को टिकट दिया था, तो कांग्रेस ने शत्रुघ्न सिन्हा को.



बता दें कि बिहारी बाबू पहले बीजेपी में ही थे, लेकिन वे लगातार पीएम मोदी की आलोचना कर रहे थे. यहां तक कि उन्होंने विरोध में बीजेपी छोड़ कांग्रेस ज्वाइन कर लिया था.

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दरअसल वे लगातार बीजेपी की सीट पर दो बार जीते थे और उन्हें भरोसा था कि कायस्थ बहुल इस सीट पर उन्हें उनके स्वजातीय वोट मिलेंगे. लेकिन उन्हीं की जाति के रविशंकर प्रसाद ने उन्हें पीछे छोड़ दिया.

बता दें कि 2008 तक पटना में एक ही संसदीय सीट हुआ करती थी लेकिन उसी साल परिसीमन के बाद यहां पटना साहिब और पाटलिपुत्र दो सीटें बनाई गईं. पटना साहिब को इसलिए खास सीट माना जाता है क्योंकि बॉलीवुड अभिनेता से नेता बने शत्रुघ्न सिन्हा यहीं से सांसद बने थे.

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बहरहाल  कायस्थ बहुल पटना साहिब की सीट परंपरागत रुप से बीजेपी मानी जाती है. जिसके भरोसे रविशंकर प्रसाद को अपनी जीत का भरोसा था. हालांकि तो शत्रुघ्न सिन्हा को अपने स्टारडम और महागठबंधन के वोट बैंक के अलावा भरोसा था. लेकिन पटना साहिब की जनता ने पीएम मोदी के नाम पर भरोसा बरकरार रखा.

वहीं पीएम मोदी के नाम पर ही सवर्ण, अन्य पिछड़े और महादलितों का साथ सीधे तौर पर बीजेपी कैंडिडेट को मिला जबकि यादवों के वोट में सेंध लगी और काफी संख्या में यादव मतदाताओं ने भी पीएम मोदी का साथ दिया. वहीं वीआईपी ने अपना कैंडिडेट उतारकर यह बता दिया कि महागठबंधन में एकता नहीं है. इसका सीधा सा मैसेज मतदाआों को गया और एकमुश्त वोटिंग बीजेपी के पक्ष में हुई.

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