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...तो लालू परिवार में 'अंदरखाने लगी आग' सतह पर भी दिखेगी ?

फाइल फोटो

फाइल फोटो

राजनीतिक जानकारों की मानें तो यह साफ है कि तेजस्वी यादव ने पूरे लोकसभा चुनाव कैम्पेन को सेल्फ सेंटर्ड कर लिया था. इससे उनके परिवार में भी काफी खींचतान दिखी.

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बिहार में महागठबंधन का नेतृत्व आरजेडी नेता तेजस्वी यादव कर रहे थे, लेकिन वह अपनी पार्टी के एक भी कैंडिडेट को चुनाव नहीं जितवा पाए. जाहिर है वह जितना दावा करते थे नतीजे इसके उलट आ गए. इन नतीजों ने न सिर्फ उनके नेतृत्व क्षमता पर सवाल खड़े किए हैं बल्कि लालू परिवार के बीच जारी खींचतान के बीच विरासत के लिए घमासान की नौबत ला दी है.

राजनीतिक जानकारों की मानें तो यह साफ है कि तेजस्वी यादव ने पूरे लोकसभा चुनाव कैम्पेन को सेल्फ सेंटर्ड कर लिया था. इससे उनके परिवार में भी काफी खींचतान दिखी. हालांकि कुछ समय के लिए यह थम जरूर गया था, लेकिन आने वाले समय में अंदरखाने लगी आग सतह पर भी दिख सकती है.

बता दें कि इससे पहले लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव   ने शिवहर और जहानाबाद सीट पर भी अपने उम्मीदवार अंगेश कुमार और चंद्रप्रकाश को टिकट दिलाने के लिए तेजस्वी यादव को कहा तो वह नहीं माने. अब नतीजा सबके सामने है और इन दोनों ही सीटोंं पर आरजेडी के प्रत्याशियों की हार हो गई है.

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वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय कहते हैं, परिवार में अंदरुनी कलह तो टिकट बंटवारे के समय ही दिख गई थी. बड़े भाई तेजप्रताप यादव से तेजस्वी यादव की दूरी समय-समय पर दिखती भी रही है.

इसकी तस्दीक इस बात से भी होती है कि बीते 13 मई को तेजस्वी के सामने ही तेजप्रताप ने मंच पर कहा, 'हमेशा से हम व्याकुल रहे कि तेजस्वी जी के साथ, जो हमारे अर्जुन हैं उनके कार्यक्रम में जाएं, लेकिन ये पहले ही हेलीकॉप्टर से उड़ जाते थे और हम रह जाते थे जमीन पर.

एक महीने पहले तेजप्रताप यादव ने 28 मार्च को न्यूज 18 से बात करते हुए अपनी मजबूरी गिनाते हुए कहा था कि वह सिर्फ तेजस्वी को सुझाव देने की हैसियत रखते हैं न कि कोई निर्णायक भूमिका की.

रवि उपाध्याय कहते है,  तेजस्वी यादव ने चुनावी कैम्पेन को अपने तक ही सीमित रखा. मीसा भारती पाटलिपुत्र संसदीय क्षेत्र के अलावा कहीं चुनाव प्रचार में भी नहीं  गईं. राबड़ी देवी ने भी मुश्किल से छह मीटिंग भी नहीं की.

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वहीं वरिष्ठ पत्रकार फैजान अहमद कहते हैं कि आने वाले समय में लालू परिवार में विरासत की एक लड़ाई छिड़ सकती है. वे कहते हैं कि लालू परिवार के बीच विरासत की जंग वर्ष 2016 की शुरुआत में काफी विस्तार पा चुका था. इसके बीच-बचाव के लिए लालू यादव ने सीम नीतीश और प्रशांत किशोर ने पहल की थी.

बकौल फैजान अहमद, तेजस्वी को कमान सौंपने के बाद मीसा भारती राजद की राजनीति में दखल देने लगी थीं. इससे परेशान लालू प्रसाद ने मीसा भारती को राज्यसभा में भेज दिया गया था. तब यह कहा गया था कि वह दिल्ली और लोकसभा चुनाव से जुड़ी बातें देखेंगी.

वहीं तेजस्वी यादव को तेजप्रताप के साथ बिहार की कमान सौंपी गई थी. हालांकि तेजप्रताप यादव इससे संतुष्ट नहीं थे. दरअसल वह बड़ा बेटा होने के नाते खुद को लालू यादव का उत्तराधिकारी मानते हैं. वे अक्सर अपने आपको दूसरा लालू भी कहते हैं.

फैजान अहमद कहते हैं, अब पार्टी पर तेजस्वी की पकड़ इतनी हो गई है कि मीसा भारती और तेजप्रताप यादव को पाटलिपुत्र सीट के लिए बागी तेवर दिखाने पड़े, तभी मीसा को टिकट मयस्सर हो पाया. अब जब लोकसभा चुनाव में तेजस्वी फेल साबित हुए हैं तो हो सकता है कि आने वाले दिनों में तेजप्रताप यादव यह बात कहने लगें कि अब वही पार्टी देखेंगे.

हालांकि फैजान अहमद कहते हैं कि इसके बावजूद लालू परिवार में स्पष्ट फूट नहीं होगी क्योंकि अब भी लालू यादव स्वयं इसको संभाल रहे हैं. फिलहाल ऐसी हैसियत किसी की नहीं है जो लालू यादव की बातों का विरोध कर पाएं. ऐसे में मामला लालू यादव के पास जाएगा जरूर, लेकिन वह सुलझा भी लिया जा सकता है.

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