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तेजप्रताप को लिए बिना बार-बार क्यों 'उड़' जाते हैं 'अर्जुन'! पढ़िये इनसाइड स्टोरी

तेजप्रताप यादव

तेजप्रताप यादव

हुआ यूं कि तेजस्वी अपने हेलीकॉप्टर से बड़े भाई तेजप्रताप को साथ लिए बगैर ही चुनाव प्रचार के लिए आरा निकल गए. इसके बाद तेजप्रताप ने आरा तक का सफर अपने निजी वाहन से किया और तेजस्वी की सभा में पहुंच गए. फिर...

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आरजेडी प्रमुख लालू यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव के साथ उड़नखटोले पर उड़ने में कामयाब हो गए. वे इसे अपने लिए बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं. इसका अंदाजा तेजप्रताप के उस बयान से भी मिल जाएगा जब उन्होंने रविवार को तेजस्वी के सामने ही मंच पर कहा, 'हमेशा से हम व्याकुल रहे कि तेजस्वी जी के साथ, जो हमारे अर्जुन हैं उनके कार्यक्रम में जाएं, लेकिन ये पहले ही हेलीकॉप्टर से उड़ जाते थे और हम रह जाते थे जमीन पर. जाहिर है तेजप्रताप के इस बयान से साफ है कि अपने छोटे भाई तेजस्वी के साथ हर वक्त साथ होना चाहते थे, लेकिन तेजस्वी ने तेजप्रताप से दूरी बना रखी थी.

सोमवार को एक और वाकया पेश आया जब तेजस्वी के हेलीकॉप्टर पर सवार होने के लिए तेजप्रताप ने पटना से आरा तक की दौड़ लगा दी. दरअसल हुआ यूं कि तेजस्वी अपने हेलीकॉप्टर से बड़े भाई तेजप्रताप को साथ लिए बगैर ही चुनाव प्रचार के लिए आरा निकल गए. इसके बाद तेजप्रताप ने आरा तक का सफर अपने निजी वाहन से किया और तेजस्वी की सभा में पहुंच गए. इसके बाद उन्हें तेजस्वी के हेलीकॉप्टर में जगह मिली और दोनों ने साथ प्रचार किया.

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जाहिर है ये दोनों ही वाकये साबित करते हैं कि तेजप्रताप अपने भाई का साथ तो चाहते हैं, लेकिन तेजस्वी अपने बड़े भाई से 'दूर' ही रहना चाहते हैं. खबरें तो ये भी आ रही हैं कि तेजस्वी ने तेजप्रताप को अपने हेलीकॉप्टर पर इसलिए जगह दी कि पिता लालू प्रसाद यादव का निर्देश था. सूत्रों के अनुसार लालू यादव ने स्पष्ट कहलवा दिया था कि दोनों के अलगाव के कारण चुनाव नतीजों पर भी असर पड़ सकता है.

लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव खुद को अक्सर कृष्ण कहते हैं और छोटे भाई तेजस्वी यादव को अर्जुन. महाभारत के संदर्भों से देखें तो अर्जुन भगवान कृष्ण की हर बात मान लेते थे, भले ही वह तर्क भी करते थे. हालांकि, लालू फैमिली के महाभारत में स्थिति उलट दिख रही है. यहां कृष्ण (तेज प्रताप) उपेक्षित दिख रहे हैं और अर्जुन (तेजस्वी) सिरमौर.

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विरासत के संघर्ष में तेजस्वी अपने बड़े भाई पर तब ही भारी दिखने लगे जब 28 मार्च को तेजप्रताप ने छात्र राजद के संरक्षक पद से भी इस्तीफा दे दिया था. इस्तीफा देने से महज दो घंटे पहले तेज प्रताप यादव ने न्यूज 18 बताया था कि वह सिर्फ तेजस्वी को सुझाव देने की हैसियत रखते हैं न कि कोई निर्णायक भूमिका है.

दरअसल तेजप्रताप को अपने ही कुनबे में बहुत भाव नहीं मिल रहा है. ये तब भी जाहिर हुआ था जब 3 जनवरी को पाटलिपुत्र संसदीय क्षेत्र से बहन मीसा भारती के चुनाव लड़ने की घोषणा की थी, तब तेजस्वी ने उन्हें खुलकर मीडिया के सामने इसका विरोध किया और उन्हें अनुशासन की नसीहत तक दे डाली थी.

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बीते दिसंबर में जब तेज प्रताप यादव 40 लोकसभा क्षेत्रों में बदलाव यात्रा निकालने का ऐलान किया था और इसमें तेजस्वी के साथ रहने का दावा किया था. हालांकि तेजप्रताप 2 फरवरी से जब बदलाव यात्रा पर निकले तो तेजस्वी यादव ने इसमें भाग नहीं लिया और न ही इस पर न कोई बयान आया.

दोनों भाइयों के बीच दूरी तब भी दिखी जब बीते 26 जनवरी को तेज प्रताप आरजेडी कार्यालय जा रहे थे तो मेन गेट में ताला जड़ दिया गया था. हालांकि, तेज प्रताप ने इसके लिए प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे को जिम्मेदार ठहराया था, लेकिन सियासी गलियारों में यही चर्चा थी कि ऐसा तेजस्वी यादव के कहने पर ही किया गया था.

इनपुट- अमित कुमार सिंह

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