लोकसभा चुनाव 2019: बिहार की इस सीट पर हिंदू हैं अल्पसंख्यक, 1952 से सिर्फ एक बार मिली चुनाव में जीत

किशनगंज देश की उन चुनिंदा सीटों में से है जहां हिंदू अल्पसंख्यक हैं और साल 1952 से यहां सिर्फ एक बार ही कोई हिंदू उम्मीदवार चुनाव जीत सका है.

News18Hindi
Updated: April 17, 2019, 7:46 AM IST
लोकसभा चुनाव 2019: बिहार की इस सीट पर हिंदू हैं अल्पसंख्यक, 1952 से सिर्फ एक बार मिली चुनाव में जीत
प्रतीकात्मक फोटो (फ़ाइल फोटो)
News18Hindi
Updated: April 17, 2019, 7:46 AM IST
लोकसभा चुनाव 2019 के दूसरे चरण में बिहार की 5 सीटों किशनगंज, भागलपुर, कटिहार, पूर्णिया और बांका में मतदान होना है. ये सभी सीटें सीमांचल इलाके में आती हैं और 2014 में मोदी लहर के बावजूद यहां कमल नहीं खिल पाया था. सिर्फ एक पूर्णिया सीट से ही जेडीयू उम्मीदवार जीता था, हालांकि तब जेडीयू गठबंधन का हिस्सा नहीं थी. इन सभी सीटों में किशनगंज देश की उन चुनिंदा सीटों में से है जहां हिंदू अल्पसंख्यक हैं और साल 1952 से यहां सिर्फ एक बार ही कोई हिंदू उम्मीदवार चुनाव जीत सका है.

ये भी पढ़ें: देश की वो लोकसभा सीटें, जहां हिंदू आबादी अल्पसंख्यक

किशनगंज लोकसभा
किशनगंज सीट की करीब 68% आबादी मुस्लिम है जिसके चलते यहां कौन जीतेगा ये मुसलमान ही तय करते हैं. इस सीट पर हिंदुओं की आबादी 31% के आस-पास है. पूर्वोत्तर राज्यों का गेटवे कहे जाने वाले किशनगंज को बिहार का चेरापूंजी भी कहा जाता है. इतिहास पर नज़र डालें तो सूर्यवंशियों का शासन होने के कारण इस इलाके को सुरजापुर भी कहा जाता है. पश्चिम बंगाल से सटा होने के कारण किशनगंज काफी हरा-भरा इलाका है और बिहार के अन्य इलाकों के मुकाबले प्राकृतिक तौर पर खूबसूरत भी माना जाता है.

ये भी पढ़ें- लालू के समधी ने सारण सीट से किया नामांकन, बोले- तेजप्रताप यादव ने आपलोगों को मूर्ख बनाया

सिर्फ एक बार जीता हिंदू उम्मीदवार
किशनगंज के चुनावी इतिहास पर नज़र डालें तो ये सीट 1957 में अस्तित्व में आई और सिर्फ एक बार 1967 के लोकसभा चुनावों में यहां से प्रजा सोशलिस्ट पार्टी (PSP)के हिंदू कैंडिडेट एलएल कपूर ने जीत दर्ज की थी. इसके अलावा यहां हर चुनाव में किसी मुस्लिम कैंडिडेट को ही जीत हासिल होती है. ये सीट हमेशा से कांग्रेस या फिर समाजवादियों की ही रही है. सिर्फ एक बार साल 1999 में यहां से बीजेपी के टिकट पर शाहनवाज़ हुसैन ने जीत दर्ज की है.
Loading...

ये भी पढ़ें- 30 साल के हुए तेजप्रताप यादव, बर्थ डे विश कर चुनाव प्रचार के लिए रवाना हुए तेजस्वी

किशनगंज लोकसभा सीट पर 1952 से 16 बार हुए चुनाव में कांग्रेस ही एकमात्र ऐसी पार्टी रही जिसने दो बार हैट्रिक लगाई. इसमें साल 1957, 1962 , 1980 और 1984, 1989 में कांग्रेस को हैट्रिक लगाने का मौका मिला. वहीं साल 1991, 1996 में लगातार दो बार जनता दल को जीत का मौका मिला. इस सीट पर कांग्रेस के जमीलुर रहमान, सीमांचल के गांधी मो. तस्लीमुद्दीन को तीन बार सांसद बनने का मौका मिला था. तस्लीमुद्दीन को दो बार राजद और एक बार जनता दल से जीत मिली. वे 1996 में जनता दल और 1998 व 2004 में राजद से सांसद बने थे.

ये भी पढ़ें- तेजप्रताप के मुद्दे पर बोलीं राबड़ी देवी, 'घर में कोई मतभेद नहीं, हमसब साथ हैं'

जेडीयू के लिए प्रतिष्ठा का सवाल
यहां इस बार कांग्रेस को जहां सीट बचाने की चुनौती है तो वहीं जदयू काफी मजबूती से मुकाबले में है. इन दोनों के अलावा एमआईएम भी मजबूती से मैदान में है. पिछले चुनाव में इस चुनाव के एमआईएम उम्मीदवार अख्तरुल ईमान ने जदयू के टिकट पर चुनाव लड़ा था हालांकि लेकिन सिंबल मिलने के बाद वे बीच में ही चुनाव मैदान छोड़ कर हट गए थे. फिर भी उन्हें 55822 वोट मिले थे.



लोकसभा चुनाव 2019 के दंगल में किशनगंज सीट से कुल 14 प्रत्याशी मैदान में है. जानकारों के मुताबिक यहां त्रिकोणीय मुकाबले के आसार हैं. जदयू से सैयद महमूद अशरफ, कांग्रेस प्रत्याशी डा. मो. जावेद और एमआईएम प्रत्याशी अख्तरुल ईमान के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होगा. जदयू प्रत्याशी सैयद महमूद अशरफ दूसरी बार लोकसभा चुनाव में किस्मत आजमा रहे हैं. पहली बार उन्होंने 2009 में जदयू से चुनाव लड़ा था. कांग्रेस प्रत्याशी डा. मो. जावेद पहली बार लोकसभा चुनाव में भाग्य आजमा रहे हैं. हालांकि इससे पहले वे चार बार विधायक भी रह चुके हैं. जबकि एमआईएम प्रत्याशी अख्तरुल ईमान दूसरी बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं.

ये भी पढ़ें: राजद का प्रचार करने पर बदमाशों ने मारी गोली, जेडीयू प्रत्याशी के भाई पर लगा आरोप

जानकारों का मानना है कि इस लोकसभा सीट की जनता का मिजाज अन्य से बिल्कुल अलग है. यहां चुनाव से एक दिन पहले मुस्लिम वोटों की गोलबंदी होती है. जिस तरफ इनका झुकाव हुआ उस प्रत्याशी की जीत होती है. हालांकि इस लोकसभा क्षेत्र में पूर्व में हुए अधिकांश चुनाव में दिल्ली की सत्ता से उलट ही प्रत्याशी को जीत मिली है.

2019 में किशनगंज सीट से प्रत्याशी:
1. सैयद महमूद अशरफ: जदयू
2. डॉ. मो. जावेद: कांग्रेस
3. अख्तरुल ईमान: एमआईएम
4. इंद्रदेव पासवान: बसपा
5. जावेद अख्तर: तृणमूल कांग्रेस
6. अलीमुद्दीन अंसारी: आम आदमी पार्टी
7. प्रदीप कुमार सिंह: शिव सेना
8. राजेन्द्र पासवान: बहुजन मुक्ति पार्टी
9. शुकल मुर्मू: झामुमो
10.राजेश दूबे: निर्दलीय
11. अजीमुद्दीन: निर्दलीय
12. असद आलम: निर्दलीय
13. छोटेलाल महतो: निर्दलीय
14. हसेरुल: निर्दलीय

ओवैसी की जनसभा में पहुंची भारी भीड़
एमआईएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने 14 अप्रैल को यहां जनसभा की थी जिसमें भारी भीड़ पहुंची थी. ओवैसी ने यहां कांग्रेस और जेडीयू दोनों को ही निशाने पर लिया था. ओवैसी ने कहा कि सीमांचल के लोगों को हर बार विकास के नाम पर या जात पात के नाम पर ठगा गया. पिछले विधान सभा चुनाव के समय ही कहा था कि नीतीश कुमार महागठबंधन के नाम पर वोट लेकर मोदी सरकार से मिल जाएंगे और वही हुआ. उन्होंने कांग्रेस को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जब तलाक बिल पर बहस होने जा रहा था तो इस सीमांचल के एकमात्र कांग्रेसी नेता दिवंगत मौलाना असरारुल हक कासमी को कांग्रेस वालों ने बोलने नहीं दिया.

एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएंगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsApp अपडेट्स
Loading...

और भी देखें

पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...

वोट करने के लिए संकल्प लें

बेहतर कल के लिए#AajSawaroApnaKal
  • मैं News18 से ई-मेल पाने के लिए सहमति देता हूं

  • मैं इस साल के चुनाव में मतदान करने का वचन देता हूं, चाहे जो भी हो

    Please check above checkbox.

  • SUBMIT

संकल्प लेने के लिए धन्यवाद

काम अभी पूरा नहीं हुआ इस साल योग्य उम्मीदवार के लिए वोट करें

ज्यादा जानकारी के लिए अपना अपना ईमेल चेक करें

Disclaimer:

Issued in public interest by HDFC Life. HDFC Life Insurance Company Limited (Formerly HDFC Standard Life Insurance Company Limited) (“HDFC Life”). CIN: L65110MH2000PLC128245, IRDAI Reg. No. 101 . The name/letters "HDFC" in the name/logo of the company belongs to Housing Development Finance Corporation Limited ("HDFC Limited") and is used by HDFC Life under an agreement entered into with HDFC Limited. ARN EU/04/19/13618
T&C Apply. ARN EU/04/19/13626