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बिहार : तेजस्वी यादव गेहूं के खेतों में क्यों करते हैं अपनी चुनावी सभा?

तेजस्वी यादव (फाइल फोटो)

तेजस्वी यादव (फाइल फोटो)

तेजस्वी यादव के राजनीतिक सलाहकार संजय यादव कहते हैं कि आरजेडी के समर्थकों का बड़ा हिस्सा छोटे-छोटे पॉकेट्स में भी है, ऐसे में उनके जितने करीब जाया जाए उसका उतना ज्‍यादा असर होता है.

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    बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव मंगलवार तक 211 चुनावी सभाओं को संबोधित कर चुके थे. इस दौरान अक्सर देखा गया है कि तेजस्वी किसी मैदान, स्टेडियम या स्कूल के मैदान में नहीं, बल्कि ऐसी जगहों पर सभाएं करते हैं जहां गेहूं की फसल कटने के बाद खेत खाली होते हैं. दरअसल, इसके पीछे एक सोची समझी रणनीति है.

    दरअसल, तेजस्वी यादव की राजनीति लालू यादव की लीक पर ही चल रही है. वह जहां आरक्षण, पिछड़ा वर्ग और सवर्ण विरोध की रणनीति उजागर कर चुके हैं. वहीं, अपने पिता की तरह ही ठेठ देहाती अंदाज अपनाते भी दिख रहे हैं. फसल कटने के बाद गेहूं के खाली खेतों में सभाएं करते हैं.

    कोर समर्थकों से सीधा जुड़ने का प्रयास

    तेजस्वी यादव के राजनीतिक सलाहकार संजय यादव बताते हैं कि अपने कोर समर्थकों से सीधा जुड़ने के लिए ऐसा किया जाता है. संजय कहते हैं कि आरजेडी के समर्थकों का बड़ा हिस्सा छोटे-छोटे पॉकेट्स में भी है. ऐसे में उनके जितने करीब जाया जाए, उसका असर होता है.

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    बकौल संजय यादव, तेजस्वी यादव भी अपने पिता लालू यादव की तरह ही जमीनी नेता के तौर पर पहचान बना रहे हैं. लोगों से सीधा संवाद करने की कोशिश करते हैं और उनके बीच उपस्थित होकर अपना बना लेने की कोशिश करते हैं.

    जनता के बीच जाते थे लालू

    दरअसल, बिहार की राजनीति में वर्ष 1990 के बाद का एक दौर ऐसा था जो पूरे देश में अलग थी. उस दौरान लालू की ठेठ गंवई और बिहारी शैली से लोग हर दिन रूबरू होते थे. लालू का अपना स्टाइल था और वह जनता के बीच जाते, हंसी ठिठोली करते और सामाजिक संदेश भी दे जाते थे.

    साल 1992-93 में कई बार वह पटना की सड़कों पर निकले और गरीबों की बस्ती में जाकर बच्चों के बाल तक मुड़वाए और साफ-सफाई का संदेश दिया. देसी शैली, भदेस अंदाज और माटी से जुड़े होने का अहसास दिलाने का लालू अंदाज लोगों के जेहन में आज भी जिंदा है.

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    कोशिश है कि लोग लालू यादव को न भूलें 

    गौरतलब है कि हाल में ही मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, नालंदा, वैशाली, बक्सर, हाजीपुर जैसी जगहों पर तेजस्वी यादव ने कई सभाएं गेहूं की फसल काटने के बाद खाली पड़े खेतों में ही की है. हालांकि, यह भी सच है कि कई बार उन्होंने स्कूल के मैदानों, प्रांगणों में भी सभाएं की हैं, लेकिन जमीन से जुड़े होने का लालू अंदाज को वह हर जगह फॉलो करते हैं.

    यद्यपि तेजस्वी यादव की कोशिश यही है कि लोग न तो लालू यादव को भूलें और न ही लालू स्टाइल को. सीएम नीतीश कुमार को पलटू चाचा कहना हो या पीएम मोदी को गड़बड़ मोदी कहना हो, ये सभी लालू स्टाइल की कॉपी ही लगते हैं. ऐसे ही आरक्षण, आगड़ा-पिछड़ा और सवर्ण विरोध की राजनीति भी लालू राजनीति का हिस्सा है.

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