बिहार: महागठबंधन में गहराया 'संकट'! इन कारणों से कांग्रेस-RJD में बढ़ी दूरी

कांग्रेस के बिहार प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल ने भी संकेत दिया है कि सैद्धांतिक रूप से कांग्रेस फ्रेंडली फाइट की सोच सकती है.

News18 Bihar
Updated: April 10, 2019, 5:30 PM IST
बिहार: महागठबंधन में गहराया 'संकट'! इन कारणों से कांग्रेस-RJD में बढ़ी दूरी
फाइल फोटो
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Updated: April 10, 2019, 5:30 PM IST
झारखण्ड के बाद अब बिहार गठबंधन में भी दरार सामने आ गई है. काग्रेस के वरिष्ठ नेता शकील अहमद की मधुबनी से चुनाव लड़ सकते हैं. उन्होंने अपने लिए एनआर (नाजिर रसीद) भी कटवा लिया है. इस कांग्रेस के विधायक अमित टुन्ना ने भी शिवहर से फ्रेंडली फाइट करने की मांग पार्टी नेतृत्व से उठाई है.  इससे पहले भी कांग्रेस नेताओं ने कई सीटों पर फ्रेंडली फाइट की बात उठा चुके हैं.

बता दें कि कांग्रेस के बिहार प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल ने भी संकेत दिया है कि सैद्धांतिक रूप से कांग्रेस फ्रेंडली फाइट की सोच सकती है. इस बीच कांग्रेस विधायक भावना झा ने भी फ्रेंडली फाइट का समर्थन करते हुए कहा है कि मधुबनी में वीआईपी का कोई कार्यकर्ता तक नहीं है.

दरअसल जिस तरीके से सीटों का बटवारा हुआ गठबंधन में गांठ वहीं पड़ गई थी. कांग्रेस को 9 सीट देने के बाद कई ऐसी सीटे कांग्रेस के हाथ से चली गई जो पार्टी की परम्परागत सीट मानी जाती है. शायद यही वजह है कि सीट बंटवारे में बैकफुट पर आने के बाद कांग्रेस के नेता अब खुलकर सामने आने लगे हैं.

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दरअसल पहले कांग्रेस की औरंगाबाद सीट छीन ली गई और यहां के कद्दावर नेता और पूर्व सांसद निखिल कुमार सिंह का टिकट काटकर हम के उम्मीदवार उपेन्द्र प्रसाद को दिया गया. वहीं बीजेपी छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए कीर्ति आजाद का दरभंगा से टिकट काट दिया गया और उन्हें धनबाद भेज दिया गया. दरभंगा सीट राजद के खाते में गई. यहां से अब्दुल बारी सिद्दीकी उम्मीदवार बनाए गए.

इसी तरह कांग्रेस का गढ़ कहा जाने वाला मधुबनी सीट भी महागठबंधन के वीआईपी के खाते में गई और यहां से बद्री पूर्वे को उम्मीदवार बनाया गया. इससे शकील अहमद जैसे कद्दावर और कांग्रेस के वफादार भी आहत हो गए. यूं कहें कि पूरे मिथिलांचल से कांग्रेस का सफाया कर दिया गया.

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सुपौल सीट से कांग्रेस की वर्तमान सांसद और प्रत्याशी के खिलाफ आरजेडी का एक कार्यकर्ता खड़ा हो गया. वहीं कांग्रेस के विधायक यदुवंश यादव ने उन्हें सपोर्ट करने की घोषणा भी कर दी. उधर कांग्रेस में शामिल हुई लवली आनंद भी शिवहर सीट की आस लगाए बैठी थीं, लेकिन वहां भी आरजेडी ने अपना उम्मीदवार उतार दिया.

बहरहाल सीट शेयरिंग हो गई, सीटों का चयन भी हो गया, उम्मीदवारों की घोषणा भी हो गई, लेकिन ऐसा लगता है कि दोनों ही पार्टियों ने मन मिलाकर फैसला नहीं किया. अब अगर कांग्रेस कई सीटों पर फ्रेंडली फाइट की बात कर रही है तो सवाल उठता है कि क्या इसे महागठबंधन कैसे कहा जा सकता है?

रिपोर्ट- रवि एस नारायण

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