होम टाउन की पिच पर हिट विकेट हुए कीर्ति, अब धनबाद से हैं 'बॉरो प्लेयर'

क्रिकेट की पिच पर चौके-छक्के जमाने और अपनी ऑफ स्पिन की फिरकी से विरोधी खिलाड़ियों को फंसाने वाले कीर्ति आजाद बिहार से अपनी सांसदी का चौका लगाना चाहते थे, लेकिन वे हिट विकेट होकर बिहार से ही आउट हो गए

Deepak Priyadarshi | News18 Bihar
Updated: April 17, 2019, 8:35 PM IST
होम टाउन की पिच पर हिट विकेट हुए कीर्ति, अब धनबाद से हैं 'बॉरो प्लेयर'
धनबाद में चुनाव प्रचार के दौरान कीर्ति आजाद
Deepak Priyadarshi
Deepak Priyadarshi | News18 Bihar
Updated: April 17, 2019, 8:35 PM IST
1983 में जब भारत ने क्रिकेट का विश्व कप उठाया था तो कीर्ति आजाद भी उस टीम के मेंबर थे. उस अविश्वसनीय जीत में टीम के सभी लोगों को हीरो बना दिया था, उसमें कीर्ति आजाद भी थे. क्रिकेट के उसी स्टारडम के सहारे बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री भागवत झा आजाद के बेटे कीर्ति आजाद ने 1993 में दिल्ली के गोलमार्केट क्षेत्र के चुनाव से राजनीति की मैदान में कदम रखा. क्रिकेट की पिच पर कीर्ति आजाद का अंतरराष्ट्रीय कैरियर बहुत लंबा नहीं रहा. बतौर ऑलराउंडर तकरीबन 6 वर्ष के कैरियर में महज सात टेस्ट और 25 वन डे उन्होंने खेले. लेकिन राजनीति की पिच में 1993 से लेकर अब तक वे नॉट आउट हैं तो इस बार चुनावी मैच में उनकी टीम और पिच दोनों ही बदल गई है.

कीर्ति आजाद दरभंगा से 1999, 2004 और 2014 में सांसद रहे. इस बार भी वे बीजेपी के उम्मीदवार होते लेकिन दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ में वित्तीय अमियमितताओं को लेकर अरुण जेटली पर आरोप लगाने के बाद बीजेपी ने उनसे साफ किनारा कर लिया और पार्टी से सस्पेंड कर दिया. लगातार पार्टी विरोधी बयानों ने उन्होंने बीजेपी को असहज कर दिया था, नतीजा यह हुआ बीजेपी ने उन्हें सस्पेंड कर छुटकारा पा लिया. कीर्ति आजाद हर हाल में दरभंगा कीर्ति आजाद का ससुराल है और वे इसी सीट पर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते थे. कीर्ति आजाद कांग्रेस ज्वाइन करेंगे, इसकी चर्चा को काफी लंबे समय से थी, लेकिन दरभंगा की सीट पर अपनी दावेदारी सुनिश्चित करके ही वे पार्टी में शामिल होना चाहते थे.

शायद वे बीजेपी को यह जबाव देना चाहते थे कि दरभंगा सीट पर उनके अलावा कोई और विकल्प नहीं है. कांग्रेस भी उन्हें दरभंगा से अपना उम्मीदवार बनाना चाहती थी लेकिन महागठबंधन में आरजेडी भी इस सीट पर दावा कर रही थी. लेकिन कांग्रेस आलाकमान के भरोसे पर उन्होंने 18 फरवरी को कांग्रेस ज्वाइन कर ली. लेकिन दरभंगा की सीट पर आरजेडी हर हाल में अब्दुलबारी सिद्दीकी को लड़ाने के लिए बेताब दिखी. आखिरकार कांग्रेस को झुकना पड़ा और दरभंगा की सीट से कांग्रेस के साथ कीर्ति आजाद भी दर बदर हो गए. उसके बाद तो ऑफ स्पिनर अपनी ही फिरकी में फंसकर इधर से उधर घूमने लगे. दरभंगा हाथ से निकलने के बाद कांग्रेस ने उन्हें मधुबनी, वाल्मिकीनगर दिल्ली और धनबाद तक घुमाया और आखिरकार कांग्रेस की झारखंड टीम से वे धनबाद के लिए चुने गए.



कीर्ति आजाद के लिए धनबाद का रास्ता भी बहुत आसान नहीं है. एक तो उनकी टक्कर उस इलाके के दिग्गज नेता और वर्तमान में धनबाद से सांसद बीजेपी के उम्मीदवार पीएन सिंह से होगी. धनबाद से कीर्ति आजाद की उम्मीदवारी का जमकर विरोध भी हुआ. विरोध इतना था कि रांची के प्रदेश कांग्रेस के पार्टी दफ्तर की मीटिंग के घुसकर कार्यकर्ताओं ने अपना विरोध किया. झारखंड में कांग्रेस से कई उम्मीदवार दावेदार थे, लेकिन चन्द्रशेखर दूबे, ददई दूबे, राजेन्द्र सिंह, मन्नान मलिक और मयंक शेखर झा जैसे नेताओं को दरकिनार कर कीर्ति आजाद को उम्मीदवार बनाया गया. धनबाद की सीट फॉरवर्ड की सीट मानी जाती है. इसमें ददई दूबे तो तृणमूल कांग्रेस से उम्मीदवार भी हैं. 1971 से अबतक इस सीट से इस सीट पर फॉरवर्ड उम्मीदवरा ही जीतते आए हैं.

धनबाद की सीट पर अबतक हुए 16 चुनाव में से 6 बार कांग्रेस ने जीत हासिल की है. लेकिन 2004 से इस सीट से कांग्रेस को जीत हासिल नहीं हो पाई है. इसकी वजह यह भी मानी जा रही है कि कांग्रेस ने हर बार यहां के उम्मीदवार बदल दिए. कीर्ति आजाद की उम्मीदवारी के बाद दावेदार झारखंड के कांग्रेसी अभी तक तो शांत हैं लेकिन ऐन चुनाव के समय ये सभी शांत बने रहेंगे, कहना मुश्किल है.

कुल मिलाकर क्रिकेट की पिच पर चौके-छक्के जमाने और अपनी ऑफ स्पिन की फिरकी से विरोधी खिलाड़ियों को फंसाने वाले कीर्ति आजाद बिहार से अपनी सांसदी का चौका लगाना चाहते थे, लेकिन वे हिट विकेट होकर बिहार से ही आउट हो गए.
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