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पटना साहिब लोकसभा: हाईप्रोफाइल सीट पर कायस्थ Vs कायस्थ का मुकाबला

file photo

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पटना साहिब सीट पर इस बार मुकाबला कायस्थ जाति के दो उम्मीदवारों के बीच है. एक केंद्र सरकार में मंत्री हैं तो दूसरे बीजेपी से असंतुष्ट होकर कांग्रेस में शामिल होने वाले बॉलीवुड सुपरस्टार.

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    पटना साहिब सीट पर इस बार मुकाबला कायस्थ जाति के दो उम्मीदवारों के बीच है. एक केंद्र सरकार में मंत्री हैं तो दूसरे बीजेपी से असंतुष्ट होकर कांग्रेस में शामिल होने वाले बॉलीवुड सुपरस्टार. यहां मुकाबला रविशंकर प्रसाद और शत्रुघ्न सिन्हा के बीच है. 2008 में हुए परिसीमन के बाद यह सीट अस्तित्व में आई थी. 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने शत्रुघ्न सिन्हा को इस सीट पर प्रत्याशी बनाकर भेजा था. शत्रुघ्न दोनों ही बार यहां से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे.

    शत्रुघ्न सिन्हा के सामने चुनाव लड़ रहे केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं. इससे पहले वो लगातार तीन बार से राज्यसभा के सांसद हैं. रविशंकर प्रसाद 1995 से बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं. छात्र जीवन से ही एबीवीपी और संघ से जुड़ने वाले रविशंकर प्रसाद पार्टी में कई दशक से सक्रिय हैं. अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार में भी वो मंत्रिपद संभाल चुके हैं.

    shatrughan sinha
    शत्रुघ्न सिन्हा (File Photo)


    जातीय समीकरण

    इस सीट पर जातीय समीकरण के आधार पर कायस्थों का दबदबा है. कायस्थों के बाद यादव और राजपूत मतदाताओं की संख्या अच्छी-खासी है. सामान्य तौर पर यहां के कायस्थ वोटरों का झुकाव भारतीय जनता पार्टी की तरफ ही रहता है. लेकिन इस बार चुनाव मैदान में दोनों ही तरफ बड़े कायस्थ चेहरे खड़े होने की वजह से वोट बंटने के कयास लगाए जा रहे हैं. इस लोकसभा सीट में कुल सात विधानसभाएं हैं-बख्तियारपुर, दीघा, बांकीपुर, कुम्हरार, पटना साहिब, फतुहा.

    ravi shankar prasad
    चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी प्रत्याशी रवि शंकर प्रसाद


    पटना का सियासी समीकरण

    राज्य की राजधानी होने के नाते इस सीट पर हमेशा सबकी निगाहें लगी रहती हैं. इस बार के चुनाव में दो बार के विजेता शत्रुघ्न सिन्हा कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं. ऐसे में गठबंधन की वजह से उन्हें कायस्थ वोटों के अलावा मुस्लिम और यादव समुदाय का वोट मिल सकता है. वहीं रविशंकर प्रसाद भी कायस्थ वोटों का रुख अपनी तरफ मोड़ने की कोशिस करेंगे. साथ ही जेडीयू के साथ होने की वजह से उन्हें कुर्मी और अतिपिछड़ा वोटों का भी लाभ हो सकता है. कहा जाता है लोकसभा का चुनाव पीएम कैंडिडेट के फेस पर भी लड़ा जाता है ऐसे में रविशंकर प्रसाद के पास पीएम मोदी के रूप में एक लोकप्रिय चेहरा है जिसका लाभ उन्हें वोट के तौर पर मिल सकता है.

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