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सासाराम लोकसभा सीट: मीरा कुमार के सामने पिता की 'विरासत वाली' सीट फिर पाने की चुनौती

सासाराम लोकसभा सीट: मीरा कुमार के सामने पिता की 'विरासत वाली' सीट फिर पाने की चुनौती

बाबू जगजीवन राम ने इस सीट का लंबे समय तक प्रतिनिधित्व किया.

बाबू जगजीवन राम ने इस सीट का लंबे समय तक प्रतिनिधित्व किया.

पूर्वी बिहार की बेहद महत्वपूर्ण लोकसभा सीट सासाराम को गेट वे ऑफ 'बिहार' भी कहा जाता है.

    पूर्वी बिहार की बेहद महत्वपूर्ण लोकसभा सीट सासाराम को गेट वे ऑफ 'बिहार' भी कहा जाता है. दरअसल ऐतिहासिक तथ्य के मुताबिक यहां महात्मा बुद्ध इसी रास्ते से होते हुए नालंदा और गया पहुंचे थे. गया में उन्हें 'बुधत्व' की प्राप्ति हुई. अफगान शासक शेरशाह सूरी का मकबरा यहीं है तो हिंदुओं की आस्था का केंद्र देवी चंडी का एक भव्य मंदिर भी यहीं हैं. देशभर में धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल के रूप में मशहूर इस जिले की अपनी अलग सियासी पहचान है. अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित इस लोकसभा सीट में कांग्रेस का दबदबा रहा है. वरिष्ठ कांग्रेसी नेता बाबू जगजीवन राम 1952 से 1984 तक आठ बार सांसद रहे. लोग आज भी बाबूजगजीवन राम को शिद्दत के साथ याद करते हैं. इनकी राजनैतिक विरासत इनकी बेटी मीरा कुमार ने संभाली. मीरा कुमार यहां से कांग्रेस के टिकट पर दो बार सांसद रह चुकी हैं.

    कौन हैं प्रत्याशी

    भाजपा ने एक बार फिर छेदी पासवान को तो कांग्रेस ने भी दोबारा मीरा कुमार ही दांव लगाया है. 2014 में छेदी पासवान 3,66,087 (43.19 फीसदी) वोटों के साथ विजयी रहे थे तो मीरा कुमार 3,02,760 ( वोटों के साथ दूसरे नंबर पर हीं थीं. 1989 में छेदी पासवान पहली बार जनता दल के टिकट पर यहां से जीते थे. 1991 में यहां फिर लोकसभा चुनाव हुए इस बार भी छेदी पासवान ही विजयी रहे. सांसद से पहले छेदी पासवान इस जिले की विधानसभा सीट चेनारी से पहली बार 1985 में लोकदल के टिकट पर चुनाव जीते.

    छेदी पासवान


    1996 में भाजपा उम्मीदवार मुनि लाल के हाथों चुनाव में परास्त हुए छेदी पासवान को 2014 में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े और जीते. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बाबू जगजीवन राम की बेटी मीरा कुमार उस वक्त चर्चा में आईं जब उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर उत्तर प्रदेश की बिजनौर सीट से चुनाव लड़ा और रामविलास पासवान और मायावती जैसे दिग्गज दलित नेताओं को परास्त किया. मीरा कुमार पांच बार सांसद रहीं. अपनी पुश्तैनी सीट सासाराम से वे दो बार सांसद रहीं. हालांकि अब 2014 की मोदी लहर में छेदी पासवान के सामने उन्हें शिकस्त का मुंह देखना पड़ा. पहली महिला लोकसबा स्पीकर होने का सम्मान भी मीरा कुमार को मिला.

    सीट का इतिहास

    1952 में पहली बार हुए चुनाव में बाबूजगजीवन राम कांग्रेस के टिकट पर लड़े और भारी मतों से जीत दर्ज की. 1984 तक हुए हर लोकसभा चुनाव में उन्होंने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदी को शिकस्त दी. बाबू जगजीवन राम इस बीच दो बार 1977 और 1980 में जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े. 1984 में फिर एक बार वे कांग्रेस के टिकट पर लड़े और जीते. लेकिन 1989 में छेदी पासवान ने इस सीट पर पहली बार जनता दल के टिकट पर जीत दर्ज की. 1996 से 1999 तक भाजपा के मुन्नी लाल यहां सांसद रहे. 2004 और 2009 में लगातार दो बार मीरा कुमार यहां से सांसद रहीं. 2014 में भाजपा के टिकट पर छेदी पासवान जीते.

    मीरा कुमार


    विधानसभा सीटों पर सियासी दबदबा और आबादी का तानाबाना

    सासाराम लोकसभा सीट में 6 विधानसभा सीटें मोहनिया, भभुआ, चैनपुर, चेनारी, सासाराम, करगहार शामिल हैं. 2015 में हुए विधानसभा चुनाव में तीन सीटों में भाजपा, एक सीट पर आरएलएसपी जबकि सासाराम सीट पर राजद और करगहार सीट पर जेडीयू के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी. इस सीट में 70 फीसदी से ज्यादा हिंदू आबादी है और 25.58 फीसदी मुस्लिम आबादी है. बाकी आबादी में सिख, जैन, इसाई और बुद्ध शामिल हैं.

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    Tags: Bihar Lok Sabha Constituencies Profile, Lok Sabha Election 2019, Meira kumar, Sasaram S04p34

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