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हाजीपुर लोकसभा सीट: अपनी पारंपरिक सीट से भाई को संसद भेज पाएंगे राम विलास

News18 Bihar
Updated: May 1, 2019, 5:46 PM IST
हाजीपुर लोकसभा सीट: अपनी पारंपरिक सीट से भाई को संसद भेज पाएंगे राम विलास
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2019 का लोकसभा चुनाव हाजीपुर के लिए लोगों के लिए थोड़ा अलग होगा. इसका कारण ये है कि 1977 से इस सीट पर लगातार चुनाव लड़ रहे राम विलास पासवान इस बार नहीं होंगे.

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2019 का लोकसभा चुनाव हाजीपुर के लिए लोगों के लिए थोड़ा अलग होगा. इसका कारण ये है कि 1977 से इस सीट पर लगातार चुनाव लड़ रहे राम विलास पासवान इस बार नहीं होंगे. 42 वर्षों में यहां की जनता ने रामविलास पासवान को 9 बार अपना प्रतिनिधि बनाकर संसद भेजा. राम विलास की यहां से जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण होती थी क्योंकि उनकी जीत का फासला बहुत बड़ा होता था.

इस बार के चुनाव में राम विलास ने अपने भाई पशुपति पारस को यहां से लोकसभा भेजने का फैसला किया है. पशुपति पारस इस सीट पर एनडीए के उम्मीदवार है. वहीं विपक्षी गठबंधन ने शिवचंद्र राम को उम्मीदवार बनाया है. मुख्य मुकाबला इन्हीं दोनों के बीच है.

कौन हैं प्रत्याशी

राम विलास पासवान के भाई पशुपति पारस वर्तमान में बिहार सरकार में पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री हैं. वो लोक जनशक्ति पार्टी के बिहार चीफ भी हैं. वो 1977 से बिहार की अलौली विधानसभा सीट पर लगातार विधायक रहे. 2015 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. लेकिन बाद में जेडीयू और बीजेपी का फिर से गठबंधन हुआ तो उन्हें राज्य सरकार में मंत्री बना दिया गया. आरजेडी ने यहां से शिवचंद्र राम को उम्मीदवार बनाया है जो पूर्व विधायक हैं. इलाके में शिवचंद्र राम की भी मजबूत पकड़ बताई जाती है.

पशुपति नाथ पारस


सीट का इतिहास

1952 में हाजीपुर सीट पर पहली बार चुनाव हुए थे. उस चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार राजेश्वर पटेल जीते थे. राजेश्वर पटेल इस सीट पर लगातार तीन बार सांसद बने. उन्होंने 1952, 1957 और 1962 में इस सीट का प्रतिनिधित्व किया. 1967 के चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस के वाल्मीकि चौधरी चुनाव जीते थे. 1971 में यहां से कांग्रेस के दिग्विजय सिंह जीते थे. 1977 में जब इमरजेंसी के बाद चुनाव हुए राम विलास पासवान यहां से जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीते.
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जय प्रकाश नारायण की चुनावी आंधी में राम विलास ने साढ़े चार लाख से भी ज्यादा वोटों से जीत हासिल की थी. फिर वो 1980 में भी जीते लेकिन 1984 में इंदिरा गांधी की मृत्यु के बाद हुए चुनाव में राम विलास पासवान को कांग्रेस राम रतन राम ने हरा दिया था. फिर 1889 में जनता दल के टिकट पर राम विलास ने यह सीट फिर कब्जा ली. लेकिन 1991 में राम सुंदर दास ने उन्हें हरा दिया. फिर इसके बाद 2014 तक राम विलास 2009 का चुनाव छोड़कर लगातार जीते. 2009 में भी उन्हें राम सुंदर दास ने हराया था.

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री राम सुंदर दास


राम सुंदर ऐसे नेता थे जिन्होंने राम विलास पासवान को दो बार इस सीट पर पटखनी दी. राम सुंदर दास साल 1979 में बिहार के मुख्यमंत्री रहे थे और राज्य की राजनीति में कद्दावर राजनीतिज्ञों में शुमार किए जाते थे. राम सुंदर दास की मृत्यु 2015 में हुई थी.

जातीय और सामाजिक समीकरण

हाजीपुर लोकसभा सीट में 6 विधानसभा सीटें आती हैं जिनमें लालगंज, हाजीपुर, माहनार, महुआ, राजापकड़ और राघोपुर हैं. इस सभी सीटों पर इस वक्त एडीए गठबंधन का ही कब्जा है. 4 सीटों पर जेडीयू और 2 सीटों पर बीजेपी. 2014 में यहां पर राम विलास पासवान ने करीब सवा दो लाख वाटों से जीत दर्ज की थी. कांग्रेस के संजीव प्रसाद टोनी दूसरे नंबर पर आए थे. पिछले चुनाव में यहां पर 52.86 प्रतिशत पुरुष और 47.14 प्रतिशत महिला मतदाताओं ने वोट किया था.

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First published: May 1, 2019, 5:46 PM IST
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