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बंधक बनी सड़ रही हैं मैथिली अकादमी की 40 हजार किताबें, वजह है हैरान करने वाली

News18 Bihar
Updated: April 6, 2018, 8:27 PM IST
बंधक बनी सड़ रही हैं मैथिली अकादमी की 40 हजार किताबें, वजह है हैरान करने वाली
मैथिली अकादमी को अपना मकान किराए पर देने वाली राजकुमारी सिंह भी कम परेशान नहीं हैं. इनका दर्द ये है कि न तो इन्हें किराया मिला और अब सड़ चुकी किताबें मकान को भी सड़ा रहीं हैं.

मैथिली अकादमी को अपना मकान किराए पर देने वाली राजकुमारी सिंह भी कम परेशान नहीं हैं. इनका दर्द ये है कि न तो इन्हें किराया मिला और अब सड़ चुकी किताबें मकान को भी सड़ा रहीं हैं.

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बिहार मैथिली अकादमी की चालीस हजार पुस्तकें एक किराए के मकान में आठ सालों से बंधक है. दरअसल ये किताबें अकादमी द्वारा मकान का किराया न चुकाने की वजह से बंधक हैं. अकादमी 2010 से पहले एक किराए के मकान में चल रही थी. जब ये सरकारी भवन में आई तो किराया बकाया होने के कारण 40 हजार किताबों को मकान में ही छोड़ना पड़ा जिन्हें अबतक नहीं छुड़ाया गया है. अब जहां एक तरफ किताबें बंधक पड़ी सड़ रही हैं वहीं दूसरी तरफ मकान का किराया बढ़ता जा रहा है.

बिहार मैथिली अकादमी की दर्जनों पुस्तकें यूपीएससी से लेकर बीपीएससी तक के सिलेबस में चलती हैं. सिलेबस की किताबों के लिए छात्र भटक रहे हैं और इधर चालीस हजार पुस्तकें किराये के मकान में पिछले आठ सालों से बंधक बनी हुई हैं. अकादमी पिछले आठ साल से उन किताबों को नहीं छाप रही है जो उसके स्टॉक में पहले से मौजूद हैं. जो नई पुस्तकें छपती हैं उनसे अकादमी को लगभग 6 लाख रुपये सालाना कमाई होती है जबकि इससे कम राशि के लिए पुस्तकें आठ साल से बंधक हैं.

मैथिली अकादमी को अपना मकान किराए पर देने वाली राजकुमारी सिंह भी कम परेशान नहीं हैं. इनका दर्द ये है कि न तो इन्हें किराया मिला और अब सड़ चुकी किताबें मकान को भी सड़ा रहीं हैं. राजकुमारी सिंह ने किराए के लिए कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है लेकिन वहां से न्याय कब मिलेगा इसका भी कोई पता नहीं.

बिहार मैथिली अकादमी आज भले ही रसातल में पहुंच गई हो लेकिन 1989 के पहले इसके पास 213 पब्लिकेशन हुआ करता था. इसके दर्जनों पुस्तकों को सहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा जा चुका है.

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First published: April 6, 2018, 8:20 PM IST
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