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सियासी चूड़ा-दही से दूर है इस बार बिहार की मकर संक्रांति, कभी लालू ने नीतीश को लगाया था दही का टीका

मकर संंक्रांति के मौके पर नीतीश कुमार को दही का टीका लगाते लालू प्रसाद (फाइल फोटो)
मकर संंक्रांति के मौके पर नीतीश कुमार को दही का टीका लगाते लालू प्रसाद (फाइल फोटो)

Bihar Makar Sankranti: बिहार में इस साल की मकर संक्राति राजनीति से दूर है. पटना में कुछ नेताओं ने अपने आवास पर दही-चूड़ा भोज का आयोजन जरूर किया है लेकिन इन आयोजनों में लालू दरबार वाली झलक गायब है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 14, 2021, 12:47 PM IST
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पटना. बिहार में किसी भी पर्व का सीधा कनेक्शन राजनीति से जोड़ने की कोशिश होती है. बात अगर मकर संक्रांति (Makar Sankranti) के दिन की हो तो इस दिन बिहार में नई सियासी खिचड़ी का पकना लाजमी माना जाता था लेकिन हर साल दही-चूड़ा भोज के बहाने लगने वाला सियासी मेला इस बार मकर संक्रांति के मौके पर भी कोसों दूर है. कारण जो भी हो लेकिन कभी मकर संक्रांति के दिन सजने वाला लालू का (Lalu Prasad Yadav) दरबार हो या जेडीयू के विशिष्ट नारायण सिंह का आवास हर जगह इस बार 2021 की संक्रांति के मौके पर सन्नाटा पसरा है.

मकर संक्रांति के दिन बिहार में चूड़ा दही भोज के बहाने हमेशा सियासत होती रही है. मकर संक्रांति के दिन राजनीतिक दलों और नेताओं के यहां राजनीति की नई कहानी लिखने की पुरानी परंपरा रही है. मकर संक्रांति के दिन से खरमास खत्म माना जाता है जिसके बाद लोग शुभ काम शुरू करते है, यही कारण है कि चूड़ा दही भोज के बहाने दूसरे दलों के नेताओ को भी आमंत्रण दिया जाता रहा है जो बाद में नई कहानी के रूप में सामने आते रहे हैं.

लालू दरबार और वशिष्ठ नारायण आवास पर होता रहा है सियासी भोज



मकर संक्रांति के दिन चूड़ा दही भोज के लिए लालू प्रसाद यादव और जेडीयू नेता वशिष्ठ नारायण सिंह फेमस रहे हैं. लालू आवास पर हर साल मकर संक्रांति के दिन बड़े पैमाने पर भोज दिया जाता रहा है जहां हजारों लोग शामिल होते थे. हर दल के नेताओं को आमंत्रण दिया जाता था. लालू प्रसाद यादव के जेल में रहने और तबियत खराब रहने के कारण सामूहिक भोज इस बार रद्द है. जेडीयू नेता वशिष्ठ नारायण सिंह के आवास पर भी हर साल बड़े भोज का आयोजन किया जाता रहा है, जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ सभी मंत्री और कार्यकर्ता शामिल होते थे लेकिन इस बार यहां भी भोज का आयोजन नहीं किया गया.
भोज के बहाने बदलती रही है सियासत

मकर संक्रांति के दिन भोज के बहाने सियासत की बड़ी पटकथा लिखी जाती रही है. अशोक चौधरी ने कांग्रेस में रहते जदयू नेता वशिष्ठ नारायण सिंह के चूड़ा दही के भोज में शामिल होकर सबको चौंका दिया था, हालांकि पहले इसे सामान्य बताया गया पर कुछ दिनों बाद अशोक चौधरी जेडीयू में शामिल हो गए. जीतन राम मांझी के आवास पर हुए चूड़ा दही भोज में सीएम नीतीश कुमार ने पहुंचकर सबको चौंका दिया था, बाद में मांझी एनडीए का हिस्सा हो गए.

लालू ने कभी नीतीश को लगाया था दही का टीका

एनडीए से नाता टूटने के बाद नीतीश कुमार ने 2015 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी के साथ मिलकर महागठबंधन का निर्माण किया था और बड़े बहुमत के साथ एकबार फिर से मुख्यमंत्री बने थे. 2016 में लालू आवास पर हुए चूड़ा दही भोज में उस वक्त लोग चौंक गए थे जब लालू प्रसाद यादव ने नीतीश कुमार को दही का टीका लगाया था. लालू ने टीका लगाकर कहा था कि यह बीजेपी के ग्रह गोचर से बचाएगा और गठबंधन की सरकार 20 साल तक चलेगी. नीतीश कुमार ने भी कहा था कि यह बड़े भाई का आशीर्वाद है, हालांकि अगले दो साल के भीतर ही गठबन्धन से नाता टूट गया और एनडीए के साथ एकबार फिर सरकार बनी.
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