Opinion: तेजस्वी यादव पर मांझी-कुशवाहा के तल्ख तेवर ! 'गोपालगंज कूच पर असहयोग' क्या इशारा कर रहा है ?
Patna News in Hindi

Opinion: तेजस्वी यादव पर मांझी-कुशवाहा के तल्ख तेवर ! 'गोपालगंज कूच पर असहयोग' क्या इशारा कर रहा है ?
तेजस्वी यादव की मंशा पर उनके सहयोगियों ने ही सवाल खड़ा कर दिया. (फाइल फोटो)

गोपालगंज की घटना को जोर-शोर से उठाने और उसको लेकर आंदोलन की राह पर चलने के तेजस्वी यादव की मंशा पर उनके सहयोगियों ने ही सवाल खड़ा कर दिया.

  • Share this:
पटना. बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) की तरफ से गोपालगंज में हुए ट्रिपल मर्डर मामले (Triple Murder Case Gopalganj) में पटना (Patna) से गोपालगंज कूच का आह्वान किया गया था. लेकिन, प्रशासन की तरफ से कोरोना काल में अनुमति नहीं मिल पाई. लेकिन, गोपालगंज की घटना को जोर-शोर से उठाने और उसको लेकर आंदोलन की राह पर चलने के तेजस्वी यादव की मंशा पर उनके सहयोगियों ने ही सवाल खड़ा कर दिया. हम सेक्युलर के अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने सवाल खड़ा किया तो उधर उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के प्रधान महासचिव माधव आनंद ने भी दोहरे मानदंड का मुद्दा उठा दिया.

मांझी ने तेजस्वी को दी नसीहत
जीतनराम मांझी ने भी तेजस्वी यादव को नसीहत देते हुए कहा, ‘अगर उन्हें मार्च करना था तो सब लोग मिलकर मार्च करते. विरोधी दल के नेता अपने आगे किसी को कुछ नहीं समझ रहे हैं. उनको गुरु-मंत्र देने वाले लोग हैं जो लालू जी को जेल भेजवाए हैं.’

आरएलएसपी प्रवक्ता ने भी घेरा



माधव आनंद ने भी इस मुद्दे पर तेजस्वी यादव को घेरते हुए कहा, ‘किसी भी समुदाय की हत्या से जुड़ा मामला हो या फिर किसी भी जिला में हुआ मामला हो, तेजस्वी यादव को इसे उठाना चाहिए.’ उन्होंने कहा, ‘गोपालगंज से लेकर गया, अरवल, जहानाबाद और मुजफ्फरपुर समेत सभी घटना को उठाने की जरूरत है. क्योंकि वे नेता प्रतिपक्ष हैं.’



तेजस्वी की आक्रामकता से सहयोगी दल नहीं हैं सहमत
एक तरफ तेजस्वी यादव की तरफ से लगातार राज्य सरकार पर हमला किया जा रहा है. लालू-राबडी शासन काल के जिस जंगल राज का हवाला देकर नीतीश कुमार सत्ता में आए थे. अब उसी मुद्दे को उठाकर सरकार को घेरा जा रहा है. लेकिन, गोपालगंज में हुई हत्या के मामले में तेजस्वी की आक्रामकता पर उनके अपने सहयोगी ही उनसे सहमत नहीं दिख रहे हैं.

नेतृत्व पर पहले से खड़े किए जा रहें सवाल
महागठबंधन के सहयोगी हम और आरएलएसपी की तरफ से पहले भी तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर सवाल खड़ा किया जाता रहा है. तेजस्वी को मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर आरजेडी के ऐलान के बावजूद मांझी-कुशवाहा और मुकेश सहनी ने अबतक उस पर मुहर नहीं लगाई है. कांग्रेस भी सोनिया गांधी की तरफ से तय करने की बात करती रही है. ऐसे में तेजस्वी के नीतीश सरकार के खिलाफ हल्ला बोल पर सहयोगियों से समर्थन न मिलना कई सवाल खड़ा करने वाला है.

आखिर चाहते क्या है आरजेडी के सहयोगी दल?
सवाल है क्या आरजेडी के सहयोगी विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर दबाव की राजनीति कर रहे हैं ? क्या उनकी तरफ से तेजस्वी यादव के नेतृत्व को नकारा जा रहा है ? क्या सहयोगी किसी और विकल्प की तलाश कर रहे हैं, जिसमें आरजेडी के बगैर एक अलग मोर्चा बनाया जाए ?

सियासी गलियारों में कई बातों की है चर्चा
ये कई सवाल हैं जिनको लेकर सियासी गलियारों में चर्चा है. लेकिन, आरजेडी के नेता सहयोगियों के दबाव में नहीं दिखना चाह रहे हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री और आरजेडी के उपाध्यक्ष रघुवंशप्रसाद सिंह ने मांझी-कुशवाहा पर निशाना साधते हुए कहा है, ‘वे अपनी सीट बढ़ाने के लिए ऐसा बयान दे रहे हैं.’ उन्होंने महागठबंधन में सबको एकजुट रहने की नसीहत दी.

आरजेडी प्रवक्ता ने कही है ये बात
जबकि सहयोगियों के हमले और सवाल पर आरजेडी सांसद मनोज झा का कहना है, ‘नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने हत्या के सभी मुद्दों को उठाया है.’ मनोज झा ने कहा, ‘नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बोला है कि गोपालगंज में ट्रिपल मर्डर के अलावा शंभू मिश्रा, अनिल तिवारी और मुन्ना तिवारी की हत्या की भी जांच कराई जाए.’

गोपालगंज की हत्या का मामला सियासी
उन्होंने सहयोगी दलों की तरफ से उठाए गए सवाल के जवाब में कहा, ‘गोपालगंज में हुई हत्या का मामला सियासी है. क्योंकि इसमें सत्ता धारी दल से जुटा व्यक्ति और विधायक शामिल है. अगर उस विधायक की तरफ से इस तरह के मास मर्डर को अंजाम दिया जाता है तो इसके मायने अलग हैं.’

चुनाव से पहले सरकार को बैकफुट पर ले जाने की कोशिश
इस साल के आखिर में बिहार में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित है. ऐसे में तेजस्वी यादव और आरजेडी की तरफ से कानून-व्यवस्था के मुद्दे को उठाकर सरकार को बैकफुट पर धकेलने की कोशिश की जा रही है. लेकिन, आरजेडी अपने सहयोगी दलों को साथ न रखकर इस पूरी कवायद में अकेले ही आगे बढ़ती दिख रही है. सहयोगी दलों की सबसे बड़ी टीस यही है, जिसे महागठबंधन में संभावित बिखराव की शुरुआत के तौर पर भी देखा जा सकता है.

 

ये भी पढ़ें: 

 नीतीश या तेजस्वी किसके सिर सजेगा बिहार का ताज? क्या कहता है ज्योतिष विज्ञान
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading