सीट शेयरिंग में देरी पर महागठबंधन में खटपट, उपेंद्र कुशवाहा ने जीतन राम मांझी पर दिया बड़ा बयान
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सीट शेयरिंग में देरी पर महागठबंधन में खटपट, उपेंद्र कुशवाहा ने जीतन राम मांझी पर दिया बड़ा बयान
पूर्व केन्द्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा

लालू यादव (Lalu Yadav) ने सीट शेयरिंग का जो फॉर्मूला तैयार किया है, उसके हिसाब से कांग्रेस (Congress) के खाते में 83 से 93 सीटें आ सकती हैं, लेकिन कांग्रेस को रालोसपा (RLSP) और भाकपा-माकपा को अपने हिस्से से सीटें देनी होंगी.

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  • Last Updated: August 26, 2020, 2:29 PM IST
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पटना. पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के महागठबंधन से अलग होने के फैसले के बाद माना जा रहा था कि अब सीट बंटवारा आसान हो जाएगा और कहीं कोई दिक्कत नहीं आएगी. खबर यह भी आई की आरजेडी चीफ लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) ने एक फॉर्मूला भी सेट कर दिया, जिसमें आरजेडी के लिए 150 सीटें तय कर दीं और शेष अन्य घटक दलों के लिए छोड़ दिया गया. लेकिन, लगता है कि सीट शेयरिंग का मसला अभी हल नहीं हुआ है. राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) की नाराजगी सामने आने के बाद यह मामला और भी उलझता नजर आ रहा है.

दरअसल पटना में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी की कार्यकारिणी की बैठक पटना में हुई. इसमें उपेंद्र कुशवहा ने कहा कि सीट बंटवारे में गठबंधन में देर हो रही है और कई बातों में अब भी अस्पष्टता है और नेताओं-कार्यकर्ताओं में उलझन है. उन्होंने कहा कि सीटों का बंटवारा देरी से होने पर गठबंधन को नुकसान होगा. इसलिए सभी दलों को मिलकर जल्दी फैसला लेना होगा. कुशवहा ने कहा कि इसके लिए गठबंधन के अन्य दलों को भी तत्परता दिखानी चाहिए.

उपेन्द्र कुशवाहा ने जीतन राम मांझी के गठबंधन से अलग होने के फैसले पर कहा कि मांझी का जाना गठबंधन के लिए दुखद है और हमें नुकसान हुआ है. गठबंधन का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए और इसमें अब वामदलों को भी शामिल करना चाहिए. बता दें कि उपेन्द्र कुशवाहा की मौजूदगी में चल रही बैठक में पार्टी के प्रदेश पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए और राज्य में चुनावी हालात पर चर्चा की. इस दौरान पार्टी की रणनीति क्या होगी, इसको लेकर भी विमर्श किया गया.



इस बीच सूत्रों से खबर है कि कांग्रेस भी यह मानती है कि परसेप्शन के लिहाज़ से मांझी का जाना ठीक नहीं हुआ. वहीं यह खबर भी आ रही है कि महागठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर अभी तक औपचारिक बातचीत शुरू भी नहीं हो सकी है. कहा जा रहा है कि सबसे पहले कौन पहल करे, सभी घटक दल इसके इंतजार में हैं. यह भी खबर सामने आ रही है कि आरजेडी और कांग्रेस के बीच भी कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है.
दरअसल, सूत्र बताते हैं कि मुख्य बंटवारा राजद और कांग्रेस के बीच ही होना है. लेकिन, पेंच इस बात पर फंसा है कि इस बार कांग्रेस पिछली बार की तुलना में दोगुनी सीट चाह रही है. बता दें कि 2015 में कांग्रेस ने 41 सीटों पर चुनाव लड़ा था, ऐसे में कांग्रेस की दावेदारी 80 से अधिक सीटों पर है. वहीं, माना जा रहा है कि जब शीर्ष स्तर पर आरजेडी-कांग्रेस में सीट बंटवारे पर परस्पर सहमति बन जाएगी तो दोनों के हिस्से की संख्या तय हो जाएगी.

इसके बाद बारी आएगी घटक दलों की तो बाद में दोनों दलों के करीबी सहयोगियों को भी उनकी हैसियत के हिसाब से सीटें दे दी जाएंगी. लालू के फॉर्मूले के मुताबिक राजद के हिस्से से माले और विकासशील इंसान पार्टी को सीटें मिलनी हैं, जबकि कांग्रेस के हिस्से से उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा और भाकपा-माकपा को सीटें दी जानी हैं.
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