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मांझी ने सुरा को संजीवनी बताया, जेडीयू-बीजेपी कर रही वार, क्या बिहार में शराबबंदी बनेगा चुनावी मुद्दा?
Patna News in Hindi

Neel kamal | News18Hindi
Updated: February 14, 2020, 4:15 PM IST
मांझी ने सुरा को संजीवनी बताया, जेडीयू-बीजेपी कर रही वार, क्या बिहार में शराबबंदी बनेगा चुनावी मुद्दा?
पूर्व सीएम मांझी के दिए शराबबंदी पर बयान पर बिहार की सियासत में जोरदार चर्चा जारी है. (फाइल फोटो)

पूर्व सीएम जीतन राम मांझी (Jeetan Ram Manjhi) ने एक रैली के दौरान कहा कि गरीब अगर थोड़ी शराब पीता है तो क्या खराबी है. मांझी के इस जवाब पर बीजेपी-जेडीयू ने हमला बोला है. अब देखते हैं कि बिहार के आगामी विधानसभा चुनाव में शराबबंदी चुनावी मुद्दा बन पाता है या नहीं.

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  • Last Updated: February 14, 2020, 4:15 PM IST
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पटना. एक तरफ जहां बिहार के सीएम नीतीश कुमार (Nitish Kumar) प्रदेश में शराबबंदी (Ban on Liquor) को लेकर लगातार अभियान चला रहे हैं. वहीं पूर्व सीएम और हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) ने पूर्णिया के धमदाहा में आयोजित एक रैली के दौरान कहा कि गरीब अगर थोड़ी शराब पीता है तो क्या खराबी है. इस दौरान मांझी ने शराब की तुलना मृत संजीवनी से भी की. संविधान बचाओ शंखनाद रैली के मंच से अपने संबोधन में और इसके बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार में मंत्री, नेता और बड़े पदाधिकारी भी शराब पीते हैं. ऐसे में अगर गरीब शराब पी रहे है तो क्या गुनाह कर रहे हैं.

'थोड़ी सी शराब का सेवन दवा के बराबर'
उन्होंने कहा कि लोग रात में खाने के बाद सोने के वक्त शराब पी सकते हैं. उन्होंने कहा कि थोड़ी सी शराब का सेवन करना दवा के बराबर होता है.

'कांग्रेस ने किया मांझी के बयान का समर्थन'

पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने बिहार में गरीबों को शराबबंदी में थोड़ी सी पीने देने की छूट की मांग का समर्थन कांग्रेस ने भी किया है. कांग्रेस के एमएलसी प्रेमचंद्र मिश्रा ने कहा कि शराबबंदी के बावजूद बिहार में जब घर-घर शराब पहुंचाई जा रही है. ऐसे में नीतीश कुमार को शराबबंदी पर एक बार समीक्षा जरूर करनी चाहिए.

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बिहार में लंबे समय से शराबबंदी लागू है. (फाइल फोटो)


'सीएम सब के लिए उपबल्ध करा दें शराब'कांग्रेस नेता मिश्रा ने कहा कि जब घर घर शराब पहुंच रही है और बड़े लोग नेता हो या ऑफिसर हो वह लोग शराब का सेवन कर रहे हैं तो नीतीश कुमार को इसकी समीक्षा करनी चाहिए. एमएलसी मिश्रा का मानना है कि सीएम नीतीश कुमार को शराब सभी के उपलब्ध करा देना चाहिए.

'शराब आसानी से उपलब्ध, लेकिन गरीब खा रहे जेल की हवा'
उन्होंने कहा कि जीतन राम मांझी ने इसलिए शराब पीने की बात की है कि बिहार में शराब बंदी के बाद भी आसानी से शराब उपलब्ध करायी जा रही है. और शराबबंदी के दौरान शराब पीकर पकड़े जाने वाले बड़े लोग तो पैसे देकर छूट जा रहे है. लेकिन गरीबों को जेल में डाला जा रहा है.

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बीजेपी नेताओं का कहना है कि शराबबंदी का विरोध कर रहे नेता गरीबों का विकास नहीं चाहते. (प्रतीकात्मक फोटो)'


'बीजेपी ने कहा मांझी दलित विरोधी'
जहां एक तरफ पूर्व सीएम जीतन राम मांझी गरीबों को शराब पीने की छूट देने की मांग कर रहे हैं. वहीं बीजेपी उन्हें दलित विरोधी बताने से नहीं चुक रही है. बीजेपी नेताओं का कहना है कि इससे पूर्व सीएम जीतन राम मांझी की मानसिकता का पता चलता है कि कैसे वे गरीबो को गरीब बनाए रखना चाहते है. बीजेपी नेताओं का आरोप है कि मांझी गरीबों को फिर से शराब की लत लगाकर उनका राजनीतिक इस्तेमाल करना चाहते है.

'शराबबंदी का विरोध कर रहे नेता नहीं चाहते उत्थान'

बीजेपी नेता अजीत कुमार चौधरी ने कहा कि कांग्रेस, राजद और जीतनराम मांझी जैसे नेताओं की वजह से ही आजादी के बाद से अब तक गरीबों का उत्थान नहीं हो सका. अब जब एनडीए की सरकार गरीबों को उपर उठाने के लिए शराब जैसी बुराई से बचा रही है तो मांझी जैसे नेता शराबबंदी का विरोध कर रहे है. इससे पता चलता है कि उन्हें दलितों पिछड़ों, अति पिछड़ों और गरीबों की कितनी चिंता है.

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मुख्यंत्री नीतीश कुमार व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी. (फाइल फोटो)


चला रहे हैं केवल राजनीति
बीजेपी नेता चौधरी ने कहा कि नीतीश कुमार की सरकार ने गरीबों की भलाई के लिए ही शराबबंदी को लागू किया है. उन्होंने मांझी पर कहा कि वे गरीबों को और ज्यादा गरीब बनाने के लिए काम करना चाहते हैं. जिससे उनकी राजनीति चलती रहे.

'आरजेडी ने भी इशारो में किया समर्थन'
गरीबों को शराबबंदी से छूट देने के जीतन राम मांझी के बयान पर आरजेडी नेता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि यह जीतन राम मांझी का निजी बयान है. लेकिन राजद मानती है कि जिस बिहार में शराबबंदी हो रखी है, तो यहां डोर टू डोर शराब कैसे पहुंचाई जा रही है और जो लोग पैसे वाले हैं वह तो पैसे देकर छूट जा रहे हैं. लेकिन इसका सबसे ज्यादा खामियाजा गरीब लोग ही भोग रहे हैं. आरजेडी ने इसकी समीक्षा की मांग की है.

'राजधानी पटना समेत हर जिले में शराब उपलब्ध'
आरजेडी नेता तिवारी ने कहा कि उनकी पार्टी ने भी नीतीश कुमार के शराबबंदी कानून का समर्थन किया था. लेकिन बिहार में शराबबंदी केवल कागज पर है. जबकि बिहार के सभी जिलों के साथ राजधानी पटना में भी विदेशी और देशी शराब उपलब्ध है.

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इससे गरीब परिवारों के भविष्य को सुरक्षित करने की बात की जा रही है. (प्रतीकात्मक फोटो)


'शराबबंदी के बाद बढ़ी है तस्करी, युवा पीढ़ी हो रही बर्बाद'
आरजेडी नेता का आरोप है कि शराबबंदी की वजह से बिहार में कम उम्र के बच्चे शराब की तस्करी की घटनाओं में शामिल हो रहे हैं. जिसकी वजह से उनका भविष्य भी बर्बाद हो रहा है.

'जेडीयू ने मांझी और कांग्रेस पर किया हमला'
शराब पर पूर्व सीएम जीतन राम मांझी के बयान के बाद जेडीयू ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कहा कि जीतन राम मांझी ऐसी मांग पहले भी कर चुके हैं. उनके बयान का कोई मायने नही है. खुद उन गरीब घर की महिलाएं भी राममांझी के इस बयान के खिलाफ खड़ी हो जाएंगी. जेडीयू नेताओं का मानना है कि शराबबंदी का सबसे ज्यादा फायदा महिलाओं को ही हुआ है.

'गरीबों के जीवन स्तर में हुआ बदलाव'
जेडीयू नेताओं का कहना है कि शराबबंदी की वजह से शराब में पैसे खर्च करने के बजाये अब शराब पीने वाले उन पैसों को बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरतों को पूरा करने में लगा रहे है. जिससे गरीबों का भी जीवन स्तर ऊपर उठने लगा है.

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नीतीश सरकार द्वारा लागू शराबबंदी पर विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं. सांकेतिक फोटो.


'शराबबंदी के बाद की गई है वैकल्पिक व्यवस्था'
जेडीयू के नेताओं का यह भी मानना है कि सीएम नीतीश की सरकार ने शराबबंदी करने के बाद शराब का कारोबार करने वालों के लिए भी वैकल्पिक व्यवस्था की है. शराब की वजह से कितने घर तबाह हुए ये जीतन राम मांझी और कांग्रेस को नही दिखता. कांग्रेस का मांझी के बयान का समर्थन करने का आश्चर्य इसलिए भी नही है. क्योकिं कांग्रेस ने कभी भी गरीबों की भलाइ के लिए कुछ किया ही नही.

क्या चुनावी मुद्दा बनेगा शराबबंदी?
बहरहाल अब देखना है कि शराबबंदी पर राजनीतिक दलों का यह रूख आगे क्या रंग लाता है. क्योंकि महागठबंधन के ज्यादातर दलों का यह मानना है कि बिहार में जब शराब आसानी से उपलब्ध है तो शराबबंदी की वजह से सिर्फ गरीबों को क्यों तकलीफ उठानी पड़ रही है. तो क्या यह माना जाए कि बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में महागठबंधन अपने घोषणा पत्र में बिहार से शराबबंदी खत्म करने या इसमें फेरबदल करने की बात कहेगी? क्या आने वाले बिहार चुनाव में शराबबंदी भी एक बड़ा मुद्दा होगा? थोड़ा इंतजार किजिए, जीतन मांझी के आज के इस बयान पर अभी और राजनीति बिहार में बाकी है.

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First published: February 14, 2020, 4:02 PM IST
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