सवर्ण आरक्षण: 'चूक' पर RJD नेताओं में ठनी, मनोज झा बोले- मैं पार्टी का मैसेंजर
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सवर्ण आरक्षण: 'चूक' पर RJD नेताओं में ठनी, मनोज झा बोले- मैं पार्टी का मैसेंजर
मनोज झा (फाइल फोटो)

मनोज झा ने दी सफाई दी कि रघुवंश बाबू ने जो कहा वह उनकी राय है, लेकिन मैंने पार्टी की आधिकारिक राय सदन में रखी, जो पार्टी के ट्वीटर हैंडल पर भी है.

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सवर्ण आरक्षण पर आरजेडी के नेताओं में आपस में ही ठन गई है. पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह के बयान पर पलटवार करते हुए आरजेडी के सांसद मनोज झा ने कहा कि पार्टी की आधिकारिक राय होती है और मैं पार्टी का मैसेंजर हूं. उन्होंने कहा कि राज्यसभा में जो मैंने राय रखी इसके लिए मेरे पास पार्टी नेता का मैसेज था. दस्तावेज और अध्ययन के बाद ही पार्टी की राय रखता हूं, इसमें कोई कंफ्यूजन नहीं.

मनोज झा ने दी सफाई दी कि रघुवंश बाबू ने जो कहा वह उनकी राय है, लेकिन मैंने पार्टी की आधिकारिक राय सदन में रखी, जो पार्टी के ट्वीटर हैंडल पर भी है. उन्होंने कहा कि रघुवंश बाबू बहुत उम्दा सोच के बेबाक राय रखने वाले समाजवादी नेता हैं. वो हर चीज पर बेबाक राय रखते हैं, लेकिन पार्टी की एक आधिकारिक राय होती है,मै तो मैसेंजर हूं.

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उन्होंने कहा कि हमारी डेमोक्रेटिक पार्टी में कई मसलों पर हमलोगों की राय एक-दूसरे से अलग होती है, लेकिन आधिकारिक राय सदन के पटल पर रखी जाती है. बीजेपी के नेताओं में भी आरक्षण को लेकर डर है कि गैर-कानूनी और असंवैधानिक काम किया है. सरकार ने बिना किसी दस्तावेज या अध्ययन के संविधान के साथ छेड़छाड़ की है. आरजेडी सांसद ने एक फिर आबादी के अनुसार आरक्षण की वकालत की.
आपको बता दें कि रघुवंश प्रसाद सिंह ने बुधवार को कहा था कि  आरजेडी सवर्ण आरक्षण के विरोध पर पुनर्विचार कर रही है. संसद में पार्टी से इस मसले पर चूक हो गई क्योंकि पार्टी हमेशा से सवर्ण आरक्षण की पक्षधर रही है. आपको बता दें संसद में इस मुद्दे पर बहस के दौरान मनोज झा ने  एक ‘‘झुनझुना’’ दिखाया. झा ने कहा यह झुनझुना फिलहाल सत्तारूढ़ प्रतिष्ठान के पास है. हिलता तो है  लेकिन बजता नहीं है.

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आरजेडी नेता ने कहा था कि संसद में मनोज झा ने जो तर्क दिया उससे पार्टी सहमत नहीं. पार्टी को सवर्ण आरक्षण के मुद्दे पर आइशोलेशन में नहीं जाना चाहिए. इसका विरोध क्यों हुआ, ये तेजस्वी यादव जानें. आरजेडी के मेनिफेस्टो में 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान था और हम वह मेनिफेस्टो खोज रहे हैं.

बहरहाल सवर्ण आरक्षण के मामले में पार्टी में अब भी एक राय नहीं बन पाई है. इतना ही नहीं आरजेडी के नेताओं की ओर से जिस तरह के विरोधाभासी बयान दिए जा रहे हैं इससे  कन्फ्यूजन क्रियेट हो रही है.  जाहिर ये स्थिति आने वाले लोकसभा चुनाव में आरजेडी के लिए नुकसानदेह भी साबित हो सकती है.

इनपुट- दिवाकर 

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