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मोकामा शेल्टर होम फरारी कांड: सच और साजिश के बीच खड़े हो रहे सवाल !

मोकामा शेल्टर होम फरारी कांड: सच और साजिश के बीच खड़े हो रहे सवाल !

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

बताया जा रहा है कि इन सातों में वही एक ऐसी थी जो मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन उत्पीड़न कांड की विटनेस थी. उसने ही यह भी बताया था कि शेल्टर होम में बड़े नेता और अधिकारी आया करते थे.

मोकामा शेल्टर होम से 7 लड़कियों को भगाया गया था. पुलिस की जांच में यही बात सामने आई है. बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ने भी प्रथम दृष्टया ये माना है कि सातों युवतियां भागी नहीं बल्कि भगाई गई थीं. हालांकि इन 7 युवतियों में से 6 को दरभंगा से अगले ही दिन बरामद भी कर लिया गया. इस बात के लिए पुलिस ने शाबासी भी पाई. लेकिन सवाल उस सातवीं लड़की को लेकर उठ रहे हैं जो पश्चिम बंगाल की दिनाजपुर की रहने वाली है और अब तक बरामद नहीं की जा सकी है.

बताया जा रहा है कि इन सातों में वही एक ऐसी थी जो मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन उत्पीड़न कांड की अहम विटनेस थी. उसने ही यह भी बताया था कि शेल्टर होम में बड़े नेता और अधिकारी आया करते थे.

कहा जा रहा है कि उसे मोकामा से किसी युवक के साथ जाते हुए देखा गया था. यह भी बताया जा रहा है कि वह दरभंगा से बरामद 6 लड़कियों के साथ नहीं थी. इस बीच बिहार पुलिस की टीम ने दिनाजपुर में छापेमारी भी की, लेकिन वह अपने घर अब तक नहीं पहुंची है.

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अब अहम सवाल यहीं खड़े होते हैं कि आखिर वह लड़की कहां है?  क्या उसे ही 'गायब' करने के लिए मोकामा शेल्टर होम फरारी कांड का पूरा ड्रामा रचा गया? क्या सफेदपोशों को बचाने के लिए ये साजिश रची गई?

इस मामले में सच्चाई क्या है यह तो सही जांच के बाद ही सामने आएगी. लेकिन इतना तय है कि मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस मामले में बुरी तरह घिरी हुई नीतीश सरकार एक बार फिर कठघरे में खड़ी दिखाई दे रही है. सीबीआई अफसरों के तबादले से लेकर सबूत मिटाने तक प्रयासों के आरोप लगे हैं.

हालांकि इस पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट नजर बनाए हुए है. वह बिहार सरकार की कार्यशैली पर सवाल भी खड़े कर चुका है. इस मामले में सीबीआई को भी कोर्ट के सामने खूब फजीहत झेलनी पड़ी है.

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कोर्ट ने मामले की जांच कर रहे सीबीआई अधिकारी एके शर्मा के ट्रांसफर को लेकर भी नाराजगी जताई थी. बिना अनुमति अफसर का ट्रांसफर करने के आरोप में सीबीआई के अंतरिम निदेश नागेश्वर राव को कोर्ट ने अवमानना का दोषी माना था. कोर्ट उठने तक की सजा के साथ एक लाख का जुर्माना भी लगाया था.

वहीं बीते 7 फरवरी को मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी. इसके बाद कोर्ट ने इस केस को पटना से दिल्ली के साकेत पास्को कोर्ट में ट्रांसफर करने का आदेश दिया था.

वहीं  सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार की कार्यप्रणाली पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि बच्चों के साथ इस तरह का बर्ताव कैसे किया जा सकता है.  अब बहुत हो चुका. सरकार आप चला रहे हैं, हम नहीं, लेकिन सवाल यह उठता है कि आप बिहार में किस तरह से सरकार चला रहे हैं?

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बहरहाल हर बीतते दिन के साथ कुछ न कुछ ऐसा हो रहा है जिसके तार मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस से जरूर जुड़ जाते हैं. मोकामा शेल्टर होम से जुड़ा मामला अब भी सवालों में उस 'गायब' युवती को लेकर तो है ही, जो दिनाजपुर की रहने वाली है, और अब तक नहीं मिली है.

वहीं एक बार फिर बाकी बरामद 6 लड़कियों को उसी आशा किरण शेल्टर होम में फिर से रखने को लेकर  भी सवाल खड़े हो रहे हैं जहां से 4 लड़कियां बीते नवंबर महीने में भाग गई थीं. जाहिर है एक बार फिर सरकार की मंशा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं.

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Tags: Bihar News, Muzaffarpur Shelter Home Rape Case, PATNA NEWS

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