लाइव टीवी

बर्कले यूनिवर्सिटी ने वशिष्ठ नारायण सिंह को कहा था 'जीनियसों का जीनियस', पढ़ें खास बातें

News18 Bihar
Updated: November 15, 2019, 12:10 PM IST
बर्कले यूनिवर्सिटी ने वशिष्ठ नारायण सिंह को कहा था 'जीनियसों का जीनियस', पढ़ें खास बातें
वशिष्ठ नारायण सिंह ने 'द पीस ऑफ स्पेस थयोरी' से आइंस्टीन की थ्योरी को चैलेंज किया था. इसी पर पीएचडी मिली. (फाइल फोटो)

दशकों से वशिष्ठ बाबू गुमनामी में जी रहे थे. उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने की बात कही जाती थी. बावजूद इसके वो हर बिहारवासी के हीरो बने रहे. पीएमसीएच में गुरुवार को उन्होंने अंतिम सांस ली तो एकबारगी लगा कि हमने अपना वो धरोहर खो दिया जिनके जीवित रहते हुए हम कद्र न कर सके.

  • News18 Bihar
  • Last Updated: November 15, 2019, 12:10 PM IST
  • Share this:
पटना/आरा. वो न केवल बिहार की बल्कि पूरे देश की थाती थे. बर्कले यूनिवर्सिटी (Berkeley University) ने उन्हें जीनियसों का जीनियस ऐसे ही नहीं कहा था. वशिष्ठ नारायण सिंह (Vashistha Narayan Singh) के बारे में मशहूर है कि उन्होंने वैज्ञानिक आंइस्टीन (Einstein) के मास, लेंथ और टाइम के सिद्धांत को चुनौती दी थी. यह भी मशहूर है कि अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा (NASA) में एक मिशन चल रहा था. अचानक 31 कंप्यूटर फेल हो गए, तो वहां मौजूद वशिष्ठ बाबू ने लिख कर सटीक गणना कर दी थी.

दशकों से वशिष्ठ बाबू गुमनामी में जी रहे थे. उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने की बात कही जाती थी. बावजूद इसके वो हर बिहारवासी के हीरो बने रहे. पीएमसीएच में गुरुवार को उन्होंने अंतिम सांस ली तो एकबारगी लगा कि हमने अपना वो धरोहर खो दिया जिनके जीवित रहते हुए हम कद्र न कर सके.

आज जब वशिष्ठ नारायण सिंह हमारे बीच नहीं हैं तो उनके बारे में कुछ खास जानकारी हमने जुटाए हैं. भोजपुर जिले के बसंतपुर गांव में उनका जन्म दो अप्रैल, 1946 को हुआ था. वर्ष 1958 में नेतरहाट की परीक्षा में उन्होंने सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया. 1963 में हायर सेकेंड्री की परीक्षा में भी अव्वल रहे.

वशिष्ठ नारायण सिंह की फाइल तस्वीर


अपनी विलक्षण प्रतिभा के चलते अमेरिका गए

1964 में वशिष्ठ बाबू के लिए पटना विश्वविद्यालय का कानून बदला और सीधे ऊपर के क्लास में दाखिला  बीएससीआनर्स में मिला. वहां भी इन्होंने नंबर वन का स्थान बरकरार रखा. वशिष्ठ बाबू जब पटना साइंस कॉलेज में थे तो कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जॉन कैली ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और 1965 में वो अमरीका चले गए. 1965 में ही उन्हें बर्कले विश्वविद्यालय से नामांकन पत्र मिला और इसके बाद 1966 में वशिष्ठ बाबू ने नासा जॉइन किया. फिर वर्ष 1967 में वो कोलंबिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैथेमैटिक्स के निदेशक बन गए. 1969 में उन्होंने कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से पीएचडी की. बर्कले यूनिवर्सिटी ने वशिष्ठ नारायण सिंह को 'जीनियसों का जीनियस' कहा.

द पीस ऑफ स्पेस थ्योरी विषय पर आइंस्टीन की थ्योरी को चैलेंज किया. इसी पर पीएचडी मिली. तहलका मचा देने वाला शोध पत्र (पीएचडी) दाखिल करने के बाद वो मशहूर हो गए. इसके बाद वो वॉशिंगटन विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर बन गए. हालांकि अमेरिका में उनका मन नहीं लगा और 1971 में भारत लौट आए. आईआईटी कानपुर में प्राध्यापक बनने के बाद आठ जुलाई, 1973 को छपरा जिले की रहने वाली वंदना रानी सिंह से उनकी शादी हो गई. घरवाले बताते हैं कि यही वो वक्त था जब वशिष्ठ जी के असामान्य व्यवहार के बारे में लोगों को पता चला.
Loading...

कहा जाता है कि छोटी-छोटी बातों पर बहुत गुस्सा हो जाना, कमरा बंद कर दिन-दिन भर पढ़ते रहना, रात भर जागना उनके व्यवहार में शामिल था. इस असामान्य व्यवहार के बाद उनकी पत्नी ने तलाक ले लिया. यह वशिष्ठ बाबू के लिए बड़ा झटका था.

सात फरवरी 1993 को डोरीगंज (छपरा) में एक झोपड़ीनुमा होटल के बाहर प्लेट साफ करते मिले. (फाइल फोटो)


गुमनामी के दौर में होटल के बाहर प्लेट साफ करते मिले

साल 1974 में उन्हें पहला दौरा पड़ा, जिसके बाद उनका इलाज शुरू हुआ लेकिन जब बात नहीं बनी तो 1976 में उन्हें रांची के कांके अस्पताल में भर्ती कराया गया. वर्ष 1987 में वशिष्ठ बाबू अपने गांव लौट आए, लेकिन इसके दो साल बाद यानी 1989 में गढ़वारा (खंडवा) स्टेशन लापता हो गए. सात फरवरी, 1993 में वो बेहद दयनीय हालत में छपरा के डोरीगंज में एक झोपड़ीनुमा होटल के बाहर प्लेट साफ करते हुए मिले.

इसके बाद सरकारी मदद का इंतजार के बीच वशिष्ठ नारायण सिंह सिजोफ्रेनिया नामक बीमारी से ग्रसित हो गए. फिर अक्टूबर 2019 में उन्हें पटना के पीएमसीएच में भर्ती करवाया गया. इलाज के बाद वो ठीक होकर घर लौट आए, लेकिन 14 नवंबर, 2019 को पटना के पीएमसीएच में उनका निधन हो गया.

ये भी पढ़ें-

जब महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा था- अभी तक हमरे बोर्ड लागल बा हियां

गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का राजकीय सम्मान के साथ आज अंतिम संस्कार

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए पटना से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: November 15, 2019, 11:14 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...