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'बिहार के आइंस्‍टीन' को अस्पताल से मिली छुट्टी, सिजोफ्रेनिया से ग्रसित PMCH में थे भर्ती

News18 Bihar
Updated: October 10, 2019, 5:15 PM IST
'बिहार के आइंस्‍टीन' को अस्पताल से मिली छुट्टी, सिजोफ्रेनिया से ग्रसित PMCH में थे भर्ती
बीमारी की स्थिति में सुधार के बाद गणतिज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह को PMCH से छुट्टी दे दी गई है.

डॉक्टरों ने बताया कि वशिष्‍ठ नारायण सिंह (Vashistha Narayan Singh) के शरीर में सोडियम की मात्रा घटकर 120 तक पहुंच चुकी थी. अब यह स्‍तर बढ़ गया है.

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पटना. अपने फॉर्मूले से दुनिया में लोहा मनवा चुके महान गणितज्ञ (Mathematician) वशिष्ठ नारायण सिंह (Vashistha Narayan Singh) को अस्पताल से डॉक्टरों ने छुट्टी दे दी है. सिजोफ्रेनिया (Schizophrenia) बीमारी से ग्रसित होने के बाद उनकी हालत बिगड़ने पर चार दिन पहले परिजनों ने पीएमसीएच (PMCH) में भर्ती कराया था. जहां डॉक्टरों की टीम ने बेहतर ढंग से इलाज कर उनकी जान बचा ली.बता दें कि उन्‍हें बिहार के आइंस्‍टीन के नाम से भी जाना जाता है.

डॉक्टरों के अनुसार, इनके शरीर में सोडियम की मात्रा घटकर 120 तक पहुंच चुकी थी. सोडियम चढ़ाए जाने के बाद इसका स्‍तर 135 तक पहुंच चुका है. वशिष्ठ नारायण सिंह अब बातचीत भी करने लगे हैं.

स्मरण शक्ति के कायल हुए डॉक्टर
पटना मेडिकल कॉलेज एंड हस्पिटल यानि PMCH में इमरजेंसी वार्ड के प्रभारी डॉ अभिजीत ने वशिष्‍ठ नारायण सिंह की मेमोरी को कम्प्यूटर की संज्ञा देते हुए कहा कि 76 साल की उम्र में भी इनकी स्मरणशक्ति युवाओं से कम नहीं है.

सरकारी उपेक्षा से आहत
बता दें कि पटना साइंस कॉलेज से लेकर आईआईटी और नासा तक का सफर तय करने वाले इस गणितज्ञ ने एक से बढ़कर एक गणित के फॉर्मूले से न सिर्फ बिहार का मान बढ़ाया, बल्कि देश का नाम भी रोशन किया. बावजूद इसके वर्षों तक बिहार की इस धरोहर को सरकारी उपेक्षा झेलनी पड़ी और गुमनामी की जिंदगी व्यतीत करनी पड़ी.


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बिहार सरकार से नाराजगी
अद्भुत प्रतिभा के धनी वशिष्ठ नारायण सिंह को आज भी बिहार के सीएम नीतीश कुमार से नाराजगी है. इनका कहना है कि सरकार की ओर से उनका हाल भी लेने की जहमत नहीं उठाई गई. वह जब पीएमसीएच के ICU में भर्ती थे, तब भी इन्होंने न्यूज 18 को न सिर्फ अपने फॉर्मूले सुनाए, बल्कि सीएम पर नाराजगी भी बयां की.

देश-विदेश में इनके फॉर्मूले की चर्चा
गौरतलब है कि वशिष्ठ नारायण सिंह ने अल्बर्ट आइंस्टीन के सिद्धांत को भी चुनौती दी थी, जिसके बाद विदेशों में भी इनके दिए गए फॉर्मूले का लोहा माना गया था. इंसान रूपी इस कम्प्यूटर ने न जाने कितने गणित के फॉर्मूले दिए होंगे जिसे अमेरिका से लेकर रसिया, जापान से लेकर फ्रांस तक ने लोहा माना है. इसके बाद इन पर कई रिसर्च भी हुए.

वशिष्ठ नारायण सिंह के छोटे भाई उनकी देखभाल कर रहे हैं और वे अपने भाई के लिए भारत रत्न की चाहत रखते हैं.


छोटे भाई कर रहे देखभाल
भोजपुर के निवासी इस गणितज्ञ के लिए सहारा इनके छोटे भाई अयोध्या सिंह बने हैं. फौज से सेवानिवृत होने के बाद वे पिछले 10 साल से पटना स्थित आवास पर इनकी सेवा करने के साथ इलाज भी करवा रहे हैं. परिजनों की आखिरी ख्वाहिश है कि अब इन्हें आर्थिक मदद करने की नहीं, बल्कि भारत रत्न दिया जाए.

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First published: October 10, 2019, 9:19 AM IST
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