बिहार: CPI-ML के विधायकों में JNU का पूर्व छात्र तो 3 लाख की संपत्ति वाला दलित नेता भी

प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

बिहार चुनाव (Bihar Election 2020) में जीते महबूब आलम (Mehboob Alam) की 'सादगी' के चर्चे पूरे देश में हो रहे हैं. दरअसल आलम की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी, जिसमें वह अपने भतीजी के साथ अपने कमरे में बैठे हुए दिखाई देते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 16, 2020, 9:17 PM IST
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नई दिल्ली. बिहार विधानसभा चुनाव 2020 (Bihar Election 2020) में लेफ्ट पार्टियों (Left Parties) का प्रदर्शन बेहतरीन रहा है. खासतौर से CPI-ML का जिन्हें 12 सीटों पर जीत मिली है. लेफ्ट के विजयी उम्मीदवारों को बड़े अंतर से जीत मिली है, लेकिन उनकी माली हालत कमजोर है. लेफ्ट के नेताओं की ये परिपाटी रही है. हालांकि बिहार में सीपीआई-एमएल के पास युवा नेताओं और काडर की फौज है, जो उसकी बड़ी पूंजी बन सकती है.

महबूब आलम - बलरामपुर विधानसभा
बिहार की बलरामपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला शिवनंदपुर सीपीआई एमएल के नव निर्वाचित विधायक महबूब आलम (Mehboob Alam) का गांव है. संकरी गलियों में एक मंजिला कच्ची छत वाला मकान है. कमरों में मिट्टी के फर्श और बिना प्लस्तर दीवारों के साथ एस्बेस्टस की छत पर टंगा डीटीएच एंटीना. ये महबूब आलम का घर है, जिन्होंने हालिया संपन्न बिहार चुनाव में सबसे बड़ी जीत हासिल की है.


आलम के नजदीकी प्रतिद्वंद्वी थे विकासशील इंसान पार्टी के बरुण कुमार झा, जिन्हें आलम के हाथों 50 हजार से ज्यादा वोटों से हार का सामना करना पड़ा. कटिहार जिले की बलरामपुर सीट से आलम की जीत के बाद लोगों का आना-जाना लगा है. घर के बाहर प्लास्टिक की कुर्सियां पड़ी हैं. महबूब आलम की 'सादगी' के चर्चे पूरे देश में हो रहे हैं. दरअसल महबूब आलम की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी, जिसमें वह अपनी भतीजी के साथ अपने कमरे में बैठे हुए दिखाई देते हैं.



64 वर्षीय आलम ने अपने चुनावी हलफनामे में घोषणा की है कि उनके बैंक अकाउंट में तीस हजार रुपये हैं. 9 लाख रुपये की कीमत का एक प्लाट के साथ एक स्कॉर्पियो भी है, जो एक दुर्घटना के बाद इस्तेमाल नहीं की जाती. उनके दो बच्चे हैं, जिनमें से एक की उम्र 4 साल और एक की उम्र 9 साल है. दोनों सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं. चार बार विधायक रह चुके महबूब आलम, पिछली बार 2015 में भी चुनाव जीते थे.

इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में आलम ने अपनी जीत का श्रेय पार्टी के साथियों को दिया. जैसा कि दूसरे लेफ्ट कॉडर की तरह बतौर विधायक आलम को भी मिलने वाली सैलरी और भत्ते का 80 हजार रुपया पार्टी फंड में चला जाता है. आलम के हलफनामे में दस आपराधिक मामलों का जिक्र है, जिनमें हत्या, दंगा और खतरनाक हथियारों के उपयोग की बात है. आलम ने कहा, 'ये सारे मामले 'फ्रेम' किए गए हैं. हमारी लड़ाई लोगों की जमीन बचाने की है. अगर कोई अन्याय करेगा तो संविधान हमें आत्मरक्षा का अधिकार देता है.'

संदीप सौरव - पालीगंज विधानसभा
सीपीआई-एमएल के युवा नेता संदीप सौरव (Sandeep Saurav) जवाहर लाल यूनिवर्सिटी (JNU) के छात्र नेता रहे हैं और अब पहली बार विधायक चुने गए हैं. सीपीआई एमएल की स्टूडेंट विंग शाखा आइसा के राष्ट्रीय महासचिव संदीप सौरव को पालीगंज विधानसभा सीट से जीत मिली है. संदीप को अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी जेडीयू उम्मीदवार जय वर्धन यादव के मुकाबले लगभग दोगुने 67,917 वोट मिले.

जेएनयू से पीएचडी करने वाले संदीप ने फुलटाइम राजनीति करने से पहले असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर बिहार के एक कॉलेज में अपनी सेवाएं दी हैं. पालीगंज में संदीप ने बेरोजगारी, दिहाड़ी मजदूरों को उचित भुगतान और उच्च शिक्षा के निजीकरण के खिलाफ धरना प्रदर्शन करके अपनी पहचान बनाई है.

सौरव ने कहा, 'मोदी सरकार आने के बाद नौकरी बड़ा मुद्दा है. हमारा मुख्य लक्ष्य हाशिये के लोगों और गरीबों के लिए काम करना है.' बता दें कि सीपीआई एमएल ने जिन 19 उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारा था, उनमें से 6 की उम्र 35 साल से कम है.

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मनोज मंजिल - अगियांव विधानसभा
संदीप की तरह ही मनोज मंजिल (Manoj Manzil) भी सीपीआई एमएल के नव-निर्वाचित युवा विधायक हैं. मनोज ने भोजपुर की अगियांव सीटसे जीत हासिल की है और उन्हें जेडीयू के प्रभुनाथ प्रसाद के मुकाबले 61 प्रतिशत वोट मिले. इस इलाके में मनोज की पहचान सीपीआई-एमएल नेता के तौर पर रही है. दलित नेता और पहली बार विधायक बने मनोज मंजिल मौजूदा विधानसभा में सबसे कम संपत्ति वाले नेताओं में होंगे. एडीआर के मुताबिक मनोज मंजिल के पास सिर्फ 3 लाख रुपये की संपत्ति है.

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सीपीआई एमएल की रेवोल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज मंजिल के खिलाफ 10 मामले दर्ज हैं. आलम की तरह मंजिल ने कहा कि ये मामले जमीन और गरीबों के हक की लड़ाई लड़ने के चलते दर्ज हैं. वीर कुंवर सिंह यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट मनोज मंजिल ने 2015 का विधानसभा चुनाव भी लड़ा, लेकिन अगियांव सीट पर उन्हें 31 हजार से ज्यादा वोटों के साथ तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा.

अजीत कुमार सिंह कुशवाहा - डुमरांव विधानसभा
रेवोल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन के राज्य अध्यक्ष और आइसा बिहार के पूर्व सेक्रेटरी 32 वर्षीय अजीत कुमार सिंह कुशवाहा (Ajit Kumar Singh Kushwaha) ने दक्षिण बिहार के डुमरांव सीट से जीत हासिल की है. अजीत ने जेडीयू की अंजुम आरा को 14 प्रतिशत वोटों के अंतर से मात दी. कोविड लॉकडाउन के समय मनोज मंजिल ने लोगों की मदद के लिए अभियान चलाया था.

गोपाल रविदास - फुलवारीशरीफ विधानसभा
सीपीआई एमएल के एक और युवा नवनिर्वाचित विधायक गोपाल रविदास (Gopal Ravidas) के चुनावी घोषणा पत्र के मुताबिक उनके पास 1 लाख से कुछ ज्यादा की संपत्ति है. गोपाल को फुलवारीशरीफ विधानसभा सीट पर जेडीयू उम्मीदवार के मुकाबले 14 हजार से ज्यादा वोट मिले. सीट बंटवारे के तहत आरजेडी ने इस सीट को सीपीआई एमएल को दे दिया था. फुलवारीशरीफ जेडीयू के पूर्व नेता और मंत्री श्याम रजक की सीट रही है, जो यहां से 6 बार विधायक रह चुके हैं.
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