क्वारेंटाइन होम के मजदूरों की फरमाइश से आफत में संगीत शिक्षक, कोई मुजरा तो कोई 'लॉलीपॉप लागेलु' की कर रहा डिमांड
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क्वारेंटाइन होम के मजदूरों की फरमाइश से आफत में संगीत शिक्षक, कोई मुजरा तो कोई 'लॉलीपॉप लागेलु' की कर रहा डिमांड
बिहार के एक क्वारेंटाइन सेंटर के बाहर आराम करते मजदूर (फाइल फोटो)

प्रवासी बिहारियों के बिहार पहुंचने के बाद सरकार ने जहां क्वाइरेंटाइन सेंटरों पर योगा शिक्षकों को योग सिखाने की ड्यूटी लगाई है वहीं आवासित लोगों के मनोरंजन के लिए महिला और पुरुष संगीत शिक्षकों की भी ड्यूटी लगा दी गई है लेकिन अब ये ड्यूटी ना सिर्फ शिक्षकों के लिए गले की हड्डी बन गयी है बल्कि शिक्षक संघ को भी नागवार गुजर रहा है.

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पटना. बिहार में शिक्षक भी इन दिनों कोरोना वॉरियर्स (Corona Warriors) बनकर जगह-जगह ड्यूटी में तैनात हैं, वहीं इस दौरान उनकी फजीहत भी हो रही है. दरअसल बिहार के क्वारेंटाइन सेंटर्स (Quarantine Center) में शिक्षकों का ड्यूटी लगाई गई है. इन शिक्षकों में संगीत शिक्षक भी हैं जिनसे आवासित प्रवासी श्रमिक (Migrant Labors) अजीबोगरीब फरामइश कर रहे हैं. किसी शिक्षक से फिल्मी मुजरा गाने की फरमाइश की जा रही है तो किसी को सोहर और लॉलीपॉप लागेलु गाने को भी बोला जा रहा है.

क्वारेंटाइन सेंटर्स पर लगाई गई है शिक्षकों की ड्यूटी

लाखों प्रवासी बिहारियों के बिहार पहुंचने के बाद सरकार ने जहां क्वारेन्टीन सेंटरों पर योगा शिक्षकों को योग सिखाने की ड्यूटी लगाई है वहीं आवासित लोगों के मनोरंजन के लिए महिला और पुरुष संगीत शिक्षकों की भी ड्यूटी लगा दी गई है लेकिन अब ये ड्यूटी ना सिर्फ शिक्षकों के लिए गले की हड्डी बन गयी है बल्कि शिक्षक संघ को भी नागवार गुजर रहा है. शिक्षकों को सरकार की ओर से ये आदेश दिया गया था कि क्वारेन्टीन सेंटर पर वाद्ययंत्रों के साथ लोकगीत, राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान सुनाकर आवासित श्रमिकों का मनोरंजन करें.



महिला शिक्षकों से हो रही भोजपुरी फिल्मों के गीत की हो रही डिमांड



हैरानी की बात तो ये है कि श्रमिकों ने अब फरमाइश करना शुरू कर दिया है और नए से लेकर पुराने फिल्मी गीत और भोजपुरी गीत सुनाने की जिद करने लग जाते हैं. सीवान में क्वारेन्टाइन सेंटर पर ड्यूटी कर रही एक संगीत शिक्षिका ने नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया कि अजीब-अजीब गीतों का डिमांड की जा रहा है. वंदे मातरम और जन गण मन सुनाने के बाद हर किसी की अलग-अलग फरमाइश आती है जो पूरा करना शिक्षक की मर्यादा के विपरीत है और एक महिला होने के नाते असहज भी महसूस करती हूं.

नहीं सुनाने पर पड़ती है गालियां

यही हाल पुरुष शिक्षकों की है. उनके साथ भी कुछ इसी तरह का बरताव होता है और नहीं सुनाने पर अभद्र भाषा का प्रयोग किया जाता है और कई बार गाली-गलौज तक की जाती है. संगीत शिक्षकों के साथ हो रही इस तरह की घटना के बाद माध्यमिक शिक्षक संघ ने भी एतराज जताते हुए सरकार से सुरक्षा देने की मांग की है.

शिक्षक संघ ने दी चेतावनी

संघ के प्रवक्ता अभिषेक कुमार ने साफ कहा कि शिक्षक भी देशभक्त हैं और इस संकट की घड़ी में सरकार के साथ हर काम में सहयोग दे रहे हैं लेकिन संगीत शिक्षकों के साथ ऐसा व्यवहार सही नहीं है क्योंकि शिक्षक उसी शर्त पर गए हैं कि उन्हें राष्ट्रीय गीत और राष्ट्र गान सुनाना है. अभिषेक कुमार ने साफ कहा कि सरकार अगर चाहती है कि संगीत शिक्षक ड्यूटी करें तो उन्हें ड्यूटी के दौरान सुरक्षा दी जाए अन्यथा ये आदेश वापस लिया जाए. मालूम हो कि बिहार में लगभग 1200 संगीत शिक्षक हैं जिन्हें अपने स्कूल या बगल के स्कूलों में बने क्वारेंटाइन सेंटरों पर ड्यूटी करने को लगाया गया है.
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