कोरोना और बाढ़ के बावजूद क्यों जारी है बिहारियों का पलायन, जानें वजह और औद्योगिक हालात

बिहार में पिछले कई वर्षों से मजदूरों का पलायन जारी है.

Migration From Bihar: राज्य के श्रम संसाधन मंत्री जीवेश कुमार कहते हैं कि सरकार 20 लाख लोगों को रोजगार मुहैया कराने की दिशा में काम कर रही है. प्रवासी श्रमिकों की सहायता के लिए बिहार सरकार ने टोल फ्री नंबर भी जारी किया है.

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    रजनीश चंद्र

    पटना. बिहार में कोरोना की रफ्तार थमने के बाद प्रवासी मजदूर (Migrant Labors) फिर से अपने-अपने काम पर लौटने लगे हैं. काम की तलाश में परदेश जाते मजदूरों की भीड़ बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर देखने को मिल रही है खास कर मिथिलांचल, सीमांचल और कोशी इलाके से कामगार बड़ी संख्या में पलायन कर रहे हैं. सरकार का दावा है कि सभी को रोजगार (Employment in Bihar) मिलेगा लेकिन सवाल ये है कि रोजगार मिले तो कैसे मिले. नए उद्योग लगे नहीं हैं, जो पुराने उद्योग है वे बंदी की कगार पर हैं. कामगारों के अनुपात में सरकारी योजनाओं से कम ही रोजगार मिल पा रहा है लिहाजा प्रवासी मजदूर रोजगार के लिए परेशान हैं. प्रदेश में बाढ़ की स्थिति ने उनकी समस्या को और गंभीर बना दिया है.

    क्यों बंद हो गये पुराने उद्योग?
    ऐसा नहीं है कि बिहार में कभी उद्योग धंधा था ही नहीं. यहां तो चीनी उद्योग, जूट उद्योग, कागज उद्योग, सूत और सिल्क उद्योग का जाल बिछा हुआ था, लेकिन योजनाओँ के चयन में गलती, भ्रष्टाचार तथा उचित देखरेख के अभाव के चलते इनकी स्थिति खराब होती चली गई. स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद कई सालों तक देश के कुल उत्पादन का 40 प्रतिशत चीनी बिहार में होता था. दरभंगा की सकरी, लोहट, रैयाम चीनी मिल, पूर्णिया की बनमनखी चीनी मिल, सिवान की एसकेजी शुगर मिल, समस्तीपुर की हसनपुर चीनी मिल, मुजफ्फरपुर की मोतीपुर चीनी मिल, जैसी कई चीनी मिलें थीं, जो एक-एक कर के बंद हो गई. स्थानीय समस्याओं और राजनीति के कारण पूर्णिया, अररिया और कटिहार की जूट मिलें भी बंद होने की स्थिति में आ गई. रोहतास जिले का डालमियानगर, जहां सीमेंट, कागज और वनस्पति के कारखाने थे वे भी बंद हो गये. सिल्क सिटी के नाम से विख्यात भागलपुर का रेशम तथा हैंडलूम उद्योग भी बिजली की कमी, खराब कानून व्यवस्था और दोषपूर्ण सरकारी नीतियों की शिकार हो गई.

    नौकरशाही का मकड़जाल
    जानकार मानते हैं कि पुराने उद्योगों के बंद होने में और नए निवशेकों के नहीं आने का मुख्य कारण लालफीताशाही भी है. मामूली काम के लिए परेशान होना पड़ता है. सिंगल विंडो सिस्टम काम नहीं करता है. नये निवशेकों की आम शिकायत रही है कि कागजी कार्रवाई में ही काफी समय निकल जाता है. जमीन मिल जाती है तो कब्जा मुश्किल हो जाता है. अगर कब्जा हो भी जाता है तो बैंक लोन नहीं देने का हर बहाना तलाशता है. कहने का तात्पर्य है कि नौकरशाही के मकड़जाल में फाइलें इस कदर उलझ कर रह जाती हैं कि निवेशकों का धैर्य जवाब देने लगता है और वो कहीं और उद्योग लगाने के लिए निकल पड़ता है.

    निवेश बढ़ाने के लिए सरकार की कोशिश
    नीतीश सरकार ने राज्य के औद्योगिक हालात को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए हैं. निवेशकों को आकृष्ट करने के लिए औद्योगिक प्रोत्साहन नीति, 2016 में संशोधन किया गया है और कई तरह के ऑफर दिये गये हैं. इसका असर भी दिखा है. उद्योग मंत्री शाहनवाज हुसैन के अनुसार राज्य में अभी तक दस हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं जिनमें छह हजार करोड़ से अधिक के प्रस्ताव इथेनॉल सेक्टर से जुड़े हैं. सरकार ने हरेक जिले में कम से कम दो औद्योगिक कलस्टर बनाने का निर्णय लिया है. उद्योगों की स्थापना के लिए जरूरी लाइसेंसों की जल्द मंजूरी के लिए कई लाइसेंसों को ऑटो मोड में दिया जा रहा है. केंद्र सरकार ने भी मुजफ्फरपुर के मोतीपुर में मेगा फूड पार्क स्थापित करने की मंजूरी दे दी है. इससे किसान, खाद्य प्रसंस्करण यूनिटें तथा खुदरा विक्रेताओं को एक प्लेटफार्म मिल सकेगा.

    स्वरोजगार को बढ़ावा
    कोरोना महामारी के दौरान सरकार ने स्किल मैपिंग के जरिए कुशल, अर्द्धकुशल या अकुशल कामगारों की पहचान की कोशिश की ताकि योग्यतानुसार उन्हें काम मिल सके. स्वरोजगार के लिए बेतिया के चनपटिया मॉडल की तर्ज पर जिलों में स्टार्टअप जोन बनाए गए हैं. राज्य के श्रम संसाधन मंत्री जीवेश कुमार के अनुसार सरकार 20 लाख लोगों को रोजगार मुहैया कराने की दिशा में काम कर रही है. सरकार ने प्रवासी श्रमिकों की सहायता के लिए टोल फ्री नंबर भी जारी किया है. राज्य सरकार ने मनरेगा के तहत मिलने वाली मजदूरी 198 रुपये को बढ़ा कर कम से कम 300 रुपया करने की केन्द्र सरकार से मांग की है. औद्योगिक निवेश के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ इज ऑफ डूइंग बिजनेस को प्रभावी बनाने की जरुरत है. ऐसा करने से उद्योग धंधों का विकास होगा जिससे मजदूरों को पलायन के दर्द से मुक्ति मिल सकेगी.

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