नीतीश के मंत्री बोले- कानून-व्यवस्था बिगाड़ते हैं घुसपैठिए, बिहार में भी लागू हो NRC

पिछड़ा वर्ग और अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के मंत्री विनोद कुमार सिंह ने साफ कहा कि प्रदेश में 35 से 40 लाख घुसपैठिए हैं. उन्होंने बिहार सहित पूरे देश में नेशनल रजिस्टर फॉर सिटीजनशिप लागू करने की मांग की.

News18 Bihar
Updated: September 6, 2019, 11:34 AM IST
नीतीश के मंत्री बोले- कानून-व्यवस्था बिगाड़ते हैं घुसपैठिए, बिहार में भी लागू हो NRC
बिहार सरकार में मंत्री विनोद सिंह ने प्रदेश में एनआरसी लागू करने का मुद्दा उठाया.
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Updated: September 6, 2019, 11:34 AM IST
पटना. नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (NRC) का मुद्दा बिहार (Bihar) में भी तूल पकड़ता जा रहा है.  इसे लेकर सत्ताधारी गठबंधन की दोनों पार्टियों- बीजेपी और जेडीयू (BJP and JDU) के बीच तनातनी की भी खबरें सामने आ रही है. बीजेपी की ओर से जहां इसे प्रदेश में भी लागू करने की मांग उठाई जा रही है, वहीं, जेडीयू ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि इसकी जरूरत नहीं है. हालांकि बीजेपी इस मुद्दे को छोड़ना नहीं चाह रही है. अब नीतीश सरकार (Nitish Government) के एक मंत्री ने बिहार में NRC लागू करने की मांग उठा दी है.

'राज्य में 35 से 40 लाख घुसपैठिए'
पिछड़ा वर्ग और अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के मंत्री विनोद कुमार सिंह ने कहा है कि राज्य में 35-40 लाख बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं. उन्होंने कहा कि सिर्फ अररिया, पूर्णिया, किशनगंज और कटिहार जैसे सीमावर्ती जिलों में करीब चार लाख मतदाता और 15-20 लाख आबादी बांग्लादेशी घुसपैठियों की है. मंत्री ने स्पष्ट कहा कि बिहार सहित पूरे देश में नेशनल रजिस्टर फॉर सिटीजनशिप लागू हो.

'बीजेपी अपना एजेंडा लागू करेगी'

बीजेपी कोटे के मंत्री विनोद कुमार सिंह ने कहा कि NRC उनकी पार्टी का एजेंडा रहा है और हर हाल में यह लागू होगा. बीजेपी अपने इस एजेंडे को पूरा कर रही है. तीन तलाक से लेकर कश्मीर में अनुच्छेद 370 हो या 35ए, बीजेपी ने अपने वादे के अनुसार काम किया है. अब राम मंदिर और एनआरसी के मुद्दे पर पार्टी का स्टैंड साफ है.

'1954 के आधार पर हो भूमि सर्वेक्षण'
गुरुवार को वो पटना के विद्यापति भवन में आयोजित रामदेव महतो स्मृति व्याख्यानमाला को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि एनआरसी सबसे पहले किशनगंज, कटिहार, सहरसा, खगड़िया सहित अन्य सीमावर्ती जिले में लागू हो. इन जिलों में 1932 में हुए चुनाव और 1954 में हुए भूमि सर्वेक्षण को आधार मानकर नागरिकता तय की जाए.
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'कानून-व्यवस्था बिगाड़ते हैं घुसपैठिए'
उन्होंने कहा कि जिनके पूर्वजों या माता-पिता के नाम के रिकॉर्ड उस समय के हैं, उन्हें भारत का नागरिक माना जाए. जिनका कोई रिकॉर्ड नहीं है, वो बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं. ये घुसपैठिए ही राज्य और देश की कानून-व्यवस्था बिगाड़ते हैं. जाहिर है नीतीश सरकार में शामिल मंत्री की राय जेडीयू से अलग है. इस मुद्दे पर आने वाले समय में बिहार में राजनीति और गरमा सकती है.

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First published: September 6, 2019, 10:03 AM IST
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