बिहार: चुनाव में मिली हार तो मीसा भारती ने वापस ले लिया अनुशंसित फंड, उठे सवाल

राज्यसभा सांसद बनने के बाद मीसा भारती ने तीन वर्षों में किसी योजना की अनुशंसा नहीं की थी, लेकिन लोकसभा चुनाव नजदीक आया तो एक महीने में ही अपने पाटलिपुत्र संसदीय क्षेत्र में 15 करोड़ की योजनाओं की अनुशंसा कर दी. अब जब चुनाव हार गईं तो उसकी अनुशंसा रद्द कर दी.

News18 Bihar
Updated: June 12, 2019, 9:01 PM IST
बिहार: चुनाव में मिली हार तो मीसा भारती ने वापस ले लिया अनुशंसित फंड, उठे सवाल
राज्यसभा सांसद मीसा भारती
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Updated: June 12, 2019, 9:01 PM IST
भारतीय राजनीति में अवसरवाद एक अनिवार्य अंग सा बन गया है. ताजा उदाहरण आरजेडी चीफ लालू प्रसाद यादव की बेटी मीसा भारती से जुड़ा है. सांसद निधि योजना को लेकर पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने वाली राजद प्रत्याशी मीसा भारती का अजीबोगरीब फैसला सामने आया है. मीसा भारती ने पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र के लिये विभिन्न योजनाओं के लिये आवंटित करीब 15 करोड़ रुपये की राशि आवंटन को रद्द कर दिया है. मीसा भारती ने यह फैसला चुनाव हारने के बाद किया है.

चुनाव हारीं तो रद्द कर दी अनुशंसा


गौरतलब है कि इस साल फरवरी तक उन्होंने अपने तीन वर्षों के राज्यसभा कार्यकाल में सांसद निधि का उपयोग नहीं किया था. तीन वर्षों में किसी योजना की अनुशंसा नहीं की थी. लेकिन लोकसभा चुनाव नजदीक आया तो एक महीने में ही अपने पाटलिपुत्र संसदीय क्षेत्र में 15 करोड़ की योजनाओं की अनुशंसा कर दी.

लोकसभा चुनाव में आरजेडी की उम्मीदवार बनीं, लेकिन वह लोकसभा चुनाव हार गईं तो उन्होंने अपनी ओर से अनुशंसित सारी योजनाओं को रद्द करा दिया है. जाहिर है मीसा भारती के इस फैसले को लेकर अब सवाल खड़े होने लगे हैं.

'मीसा भारती ने अपराध किया'
वरिष्ठ राजनीतिक चिंतक डॉ नवल किशोर राय कहते हैं कि मीसा भारती ने अपराध किया है क्योंकि वह लोगों को प्रलोभन और छलावा करार दे रही थीं. चुनाव हारने पर अनुशंसा वापस ले लिया इसका मतलब यही है कि जिन्होंने उन्हें वोट नहीं दिया, वह उन्हें दंडित कर रही हैं. यह जनतांत्रिक नैतिकता के विरुद्ध है और चुनाव आयोग को इसपर संज्ञान लेना चाहिए.

'फंड का होना था क्रियान्वयन'
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मीसा भारती के इस फैसले के पीछे कारण चाहे जो रहे हो लेकिन बिहार की सियासत भी पूरी तरह गरमा गयी है. विपक्षियों की बात तो दूर महागठबंधन की प्रमुख घटक दल कांग्रेस भी इस फैसले से सहमति नहीं रख रही है. कांग्रेस प्रवक्ता प्रेमचंद्र मिश्रा ने बिना किसी कारण के वापस लेने के फैसले की आलोचना की है. उन्होंने कहा कि हर हाल में फंड क्रियान्वयन किया जाना चाहिए था.

RJD को नहीं मिल रहा जवाब
वहीं आरजेडी को जवाब नहीं मिल पा रहा है. पार्टी के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि किन कारणों से वापस लिया इसकी जानकारी आने के बाद ही कोई टिप्पणी की जा सकती है. क्या कारण है इस मामले पर कोई भी बात करना ठीक नहीं है.

'लोकतंत्र के लिए सही नहीं'
जबकि बीजेपी के प्रवक्ता संजय टाईगर ने कहा कि अगर वोट देने या न देने के आधार पर कोई भेदभाव करता है तो यह लोकतंत्र के लिए सही नहीं है. जिन गांवों में आपको मत नहीं मिला, वहां से आपने योजना को वापस ले लिया, इससे सही संदेश लोगों के बीच नहीं जाता है.

दरअसल सांसद निधि के माध्यम से सांसद अपने क्षेत्र में सरकारी योजनाओं से इतर विकास के कार्यों को पूरा करते हैं. इसके तहत सांसदों को किसी काम के लिए न केवल पैसा आवंटित करने का अधिकार है बल्कि उसे खर्च करने का भी पूरा अधिकार दिया गया है. प्रत्येक सांसद को इसके लिये हर साल 5 करोड़ रुपये दिए जाते हैं.

बहरहाल बिहार में शायद यह अपने तरह का पहला मौका है जब किसी जनप्रतिनिधि ने चुनाव हारने के तत्काल बाद अपनी अनुशंसित योजनाओं को रद्द किया हो. मीसा भारती के इस फैसले से ना केवल राजनीति में नैतिकता को लेकर बहस शुरू हो गई है बल्कि सांसद निधि योजना की महत्ता और औचित्य पर भी सवाल खड़ा कर दिया है.

रिपोर्ट- संजय कुमार

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