पूर्णिया के रास्ते बिहार पहुंचा मानसून, AES पीड़ित बच्चों को मिल सकती है राहत
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बिहार में AES से अब तक 160 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है, लेकिन चाइल्ड स्पेशलिस्ट बताते हैं कि बारिश के साथ ही मौत का सिलसिला थमने लगेगा.

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आंध्र प्रदेश के बाद झारखंड में मानसून का प्रवेश हो चुका है. वहीं बिहार के पूर्वी इलाके में भी शुक्रवार को मानसून ने दस्तक दे दी.  अमूमन 12-13 जून तक बिहार में मानसून आ जाता है, लेकिन इस बार 9 दिन की देरी हुई है. पूर्णिया के रास्ते बिहार में मानसून ने प्रवेश किया और पिछले 24 घंटे में यहां 21.7 मिमी बारिश दर्ज की गई.

बारिश के साथ ही कम होता है AES का खतरा
बिहार में AES से अब तक 160 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है, लेकिन चाइल्ड स्पेशलिस्ट बताते हैं कि बारिश के साथ ही मौत का सिलसिला थमने लगेगा. दरअसल इस बीमारी का कारण हीट और ह्यूमिडिटी है. इलाके में गर्मी जब 40 डिग्री के पार होती है और ह्यूमिडिटी 60 पार होती है, और यह स्थिति कई दिनों तक लगातार बनी रहती है तो बच्चे बीमार होने लगते हैं. अगर बारिश होती है तो गर्मी से भी राहत मिलेगी और एईएस  के मामलों में भी कमी आएगी.

पूरे बिहार में होगा विस्तार
अनुमान लगाए जा रहे हैं कि अगले 48 घंटे में इसका विस्तार पटना सहित बिहार के बाकी हिस्सों में हो जाएगा. पटना और इसके आसपस के इलाकों में भी बादल छाए हुए हैं. शुक्रवार दिन में कुछ इलाकों में छिटफुट आंशिक बारिश हुई.



पिछले साल भी देरी से आया था मानसून
पटना में शुक्रवार दोपहर बाद आसमान में बादल छाए और 2.2 मिमी बारिश दर्ज की गई. पटना में 30 से 40 किमी की रफ्तार से तेज हवा चली. गौरतलब है कि पिछले साल मानसून ने 25 जून को बिहार में दस्तक दी थी.

कई इलाकों में हुई छिटफुट बारिश
शुक्रवार को राज्य के कई हिस्सों में बारिश हुई. मखदुमपुर में 40 मिमी, गलगलिया में 40 मिमी, तैयबपुर में 40 मिमी, पूर्णिया 20 मिमी, मनिहारी में 20 मिमी, अरवल में 10 मिमी और बिहारशरीफ में 10 मिमी बारिश दर्ज की गई.

कई इलाकों में आज होगी बारिश
मौसम पूर्वानुमान के मुताबिक शनिवार को पटना का पारा चार डिग्री तक नीचे आ सकता है. आसमान में बादल छाए रहेंगे. गया, भागलपुर और पूर्णिया में गरज के साथ बारिश हो सकती है.

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