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मानसून सत्र: तेजस्वी के 'प्रकट' होने, न होने के बीच फंसी विपक्ष की राजनीति
Patna News in Hindi

Vijay jha | News18 Bihar
Updated: June 28, 2019, 8:59 AM IST
मानसून सत्र: तेजस्वी के 'प्रकट' होने, न होने के बीच फंसी विपक्ष की राजनीति
बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव

लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद जिस तरह से तेजस्वी यादव ने मैदान छोड़ दिया, इससे बिहार विधानमंडल में सबसे बड़ा दल बचाव की मुद्रा में है.

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बिहार विधानसभा सत्र की शुरुआत हो रही है जो 26 जुलाई तक चलेगी. करीब महीने भर से 'गायब' नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के इसमें शामिल होने की भी उम्मीद है. इस सत्र के लिए विपक्ष के पास मुद्दों की भरमार तो है, लेकिन तेजस्वी के महीने भर से 'लापता' रहने का मुद्दा विपक्ष की धार को कमजोर करने के लिए काफी है.

RJD को बैकफुट पर धकेलेगा सत्ता पक्ष
लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद जिस तरह से तेजस्वी यादव ने मैदान छोड़ दिया, इससे बिहार विधानमंडल में सबसे बड़ा दल बचाव की मुद्रा में है. आलम यह है कि उनके नेता कहां हैं? पार्टी इस बात का जवाब भी दे पाने में सक्षम नहीं है. हालांकि उनके इस सत्र में शामिल होने की उम्मीद है, बावजूद इसकेयह मुद्दा विपक्षी दल को बचाव की मुद्रा अपनाने के लिए मजबूर कर सकती है.

तेजस्वी यादव में अब वो 'दम' नहीं !



लोकसभा चुनाव के दौरान जिस आक्रामक अंदाज में तेजस्वी यादव ने चुनाव प्रचार किया इससे वे एक बड़े कद के नेता के तौर पर उभरने लगे थे. आलम यह था कि नेशनल मीडिया ने भी उन्हें काफी तवज्जो देना शुरू कर दिया था, लेकिन करारी हार के बाद आरजेडी सदस्यों में भी तेजस्वी के प्रति न तो वह आस्था बची और न ही सम्मान. जाहिर अपने ही नेता यह भाव आरजेडी विधायकों को सरकार पर आक्रमण करने की वह ताकत भी नहीं देगी.

RJD की रणछोड़ छवि
अक्सर बिहार विधान सभा या विधान परिषद में आरजेडी के सदस्य मुद्दा उठाते हैं, हंगामा करते हैं और सदन छोड़कर बाहर चले जाते हैं. सदन की कार्यवाही से निकल जाने में बाहर निकल जाने की आरजेडी की नीति सत्ता पक्ष के लिए सुनहरा मौका होता है और वह अपने हिसाब से कार्यों को अंजाम दे पाती है. देखने वाली बात ये होगी कि क्या पहले से कमजोर हुई आरजेडी इसबार भी यही रुख अपनाती है.

कांग्रेस की हो सकती है बड़ी भूमिका
बीते 29 मई को कांग्रेस ने जिस तरह महागठबंधन की समीक्षा बैठक का बायकॉट किया, इससे जाहिर हो गया था कि बिहार में वह अपनी स्वतंत्र भूमिका में आना चाहती है. इस सत्र के दौरान यह देखने को भी मिल जाए कि कांग्रेस कई मुद्दों को उठाने की पहल करे और आरजेडी समेत सारा विपक्ष उसे सपोर्ट करे. हालांकि कांग्रेस की यह रणनीति कितनी कारगर होगी इसका जवाब तो आने वाले कल में ही छिपा है.

कुल जमा तीन दलों का विपक्ष
बिहार विधान सभा में विपक्ष के नाम पर महज तीन दल ही बचे हैं. जिसमें आरजेडी, कांग्रेस और भाकपा माले ही हैं. इस सत्र में आरएलएसपी के दोनों विधायक सत्तारूढ़ जेडीयू सदस्यों की कतार में बैठेंगे.

मुद्दों की भरमार, पर विपक्ष लाचार
मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार से बच्चों की मौत का सिलसिला, सरकारी अस्पतालों का हाल, अपराधों की स्थिति, नियोजित शिक्षकों का समान काम के लिए समान वेतन का मुद्दा और बिहार को विशेष राज्य का दर्जा जैसे कई मुद्दे हैं जिसपर सरकार को एकजुट विपक्ष घेर सकता है, लेकिन सवाल यही है कि क्या विपक्ष भी एकजुट रह पाएगा?

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First published: June 28, 2019, 8:42 AM IST
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